अवर्गीकृत

एयर फोर्स का विमान भिंड में दुर्घटनाग्रस्त, विमान मिराज दो टुकड़े होकर गिरा, ऐसे बचे पायलट अभिलाष सुरक्षित

देश में एयर फोर्स के फाइटर एयरक्राफ्ट के गिरने का यह सिलसिला सा बन गया है.अगर पिछले कुछ सालों में गिरे फाइटर प्लेन के गिरने की बात करें तो इसकी शुरुआत 2002 से हुई थी.जब जालंधर में 3 मई 2002 को मिग-21 मिकोयन-गुरेविच क्रैश हुआ था.यह प्लेन एक ऑफिस बिल्डिंग में गिरा था जिसमें आठ लोगों हताहत और 17 लोग घायल हो गए थे लेकिन पायलट ने खुद को बचा लिया था.ऐसा ही एक हस्ता भिंड में हुआ जहा कोई हताहत हो नहीं हुयी . भिंड से लगभग 6 किमी दूर मनकाबाद में बाजरे के खेत इंडियन एयरफोर्स का मिराज 2000 विमान क्रैश हो गया, इस हादसे में पायलट सुरक्षित रहा.

विमान एक ट्रेनी पायलट अभिलाष उड़ा रहे थे.सूचना पाते ही स्थानीय पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची, और चारों और घेरा बनाकर लोगों की आवाजाही को बंद कर दिया. पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, विमान के टेल सेक्शन का आधा हिस्सा जमीन में दबा हुआ दिखाई दिया. लोगों ने पायलट की पैराशूट लैंडिंग का वीडियो भी बनाया है.

हादसे के बाद इंडियन एयरफोर्स की तरफ से एक ट्वीट किया गया. जिसमें लिख, ‘IAF के मिराज 2000 विमान में आज सुबह केंद्रीय क्षेत्र में एक प्रशिक्षण उड़ान के दौरान तकनीकी खराबी का अनुभव हुआ लेकिन हादसे में पायलट सुरक्षित बाहर निकल गया. हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच के आदेश दिए गए हैं’.जून महीने में ही दो जगुआर और सुखोई विमान हादसे का शिकार होना यह आम घटना नहीं है.

सरकार और एयरफोर्स को गंभीरता से सोचने की जरूरत है.दो महीने में तीन फाइटर जेट का गिरना यह बताता है कि कहीं न कहीं कुछ कमी है जिसे हम समझने में नाकाम हो रहे हैं.अगर सुखोई और मिग के क्रैश होने वाली घटनाओं पर नजर डालें तो यह आंकड़ा चौंकाने वाला है.सिर्फ साढ़े तीन सालों में देश ने न केवल 45 जवानों को खोया है बल्कि हजारों करोड़ रुपये के 30 फाइटर प्लेन दुर्घटना ग्रस्त हुए हैं.मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा में एयर फोर्स के दुर्घटना का शिकार हुए फाइटर प्लेनों की एक सूची जारी की गई है. जिसमें बताया गया है कि सिर्फ विमानों के गिरने से देश को आर्थिक नुकसान नहीं हुआ है,

बल्कि देश ने 43 जवानों को भी खोया है,जो जवान देश के लिए तैनात है वो ट्रेनिंग के दौरान ही हादसे के शिकार हो गए.आंकड़ों की मानें तो देश ने पिछले 45 साल में 465 मिग विमान बिना किसी युद्ध में शामिल हुए जमीदोज हो चुके हैं.लेकिन यही जाबांज जब युद्ध के मैदान में दुश्मनों की दांत खट्टे करते हुए क्रैश होने वाले मिग की संख्या महज 11 है। सूत्रों के अनुसार एक आंकड़े के मुताबिक 946 मिग विमानों में से दो 1965 की लड़ाई में, आठ 1971 की लड़ाई में और 1 मिग विमान 1999 में कारगिल की लड़ाई में क्रैश हुआ है.सूचि में बताया गया है कि 2015-16 में आठ, 2016-17 में 11, 2017-18 में आठ और 2018-19 में जुलाई 18 तक चार क्रैश हो चुके हैं। यही नहीं एयर फोर्स के आठ सुखाई विमान भी क्रैश हो चुके हैं.

हेलिकॉप्टर की बात करें तो चेतक और एमआई-17 सरीखे हेलिकॉप्टर भी क्रैश हो चुके हैं.एक एमआई-17 हेलिकॉप्टर तो हाल ही में अरुणाचल प्रदेश में क्रेश हुआ था.मार्च 2017 में राजस्थान में एक हेलिकॉप्टर गिरा था.लगातार क्रैश हो रहे विमानों पर 2013 की अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि जब भी कोई फाइटर जेट क्रैश होता है तो उसकी वजह पायलट को बताया जाता है.लेकिन एयरफोर्स से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि प्लेन क्रैश होने की वजह इसका रख-रखाव है.न्यूयॉर्क टाइम्स की इस रिपोर्ट में बताया गया है,तत्कालीन भारत के रक्षा मंत्री एके एंटनी ने बताया था कि उस दौरान भी महज तीन सालों में 29 जेट क्रैश हुए थे जिसमें 12 मिग-21 था और जब एंटनी रिपोर्ट दे रहे थे उसी दौरान देश में और दो मिग 21 दुर्घटनाग्रस्त हुआ था.

 

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.

To Top