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पिता की जिंदगी में बचे में थे महज 6 महीने ,बेटे ने अपना लिवर देकर बचाई पिता की जान

दोस्तों मां बाप बच्चों की हिम्मत होते हैं, और मां कोई भी मुसीबत आने पर माता-पिता ही अपने बच्चों का सहारा बनते हैं और जो भी बन पड़ता है उनके लिए करते हैं, पर दोस्तों जहां माता-पिता बच्चों के लिए इतना कुछ करते हैं वही बच्चे भी अपने मां-बाप के लिए समय पड़ने पर अगर कोई जरूरत हो जाए तो पीछे नहीं हटते. आज हम एक ऐसे ही बेटे के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने अपने पिता की जान बचाकर सभी बेटों के लिए एक मिसाल पैदा की है.

जब पता चला कि पापा का लीवर खराब है, तो मैं हैरान था! उन्होंने कभी सिगरेट और शराब को हाथ भी नहीं लगाया था. जब डॉक्टर ने कहा, ‘बिना डोनर (अंगदान करने वाला), उनके पास सिर्फ 6 महीने बचे हैं.तो मैं खुद को लाचार महसूस कर रहा था.पापा ने मुझसे कहा, ‘मैं मरना नहीं चाहता.मैं तुम्हे ग्रेजुएट (स्नातक) होते देखना चाहता हू.

घर का माहौल बदल गया था.खुशियां चली सी गईं और हमें उदासी ने घेर लिया.उसी दौरान कोविड की दूसरी लहर भी आई, जिसमें मैं संक्रमित हो गया! जब मैं आईसोलेशन में था तो बहुत रोया.क्योंकि मेरे पिता को मेरी जरूरत थी और मैं उनके पास नहीं था.हालांकि,मैं पापा को खुश (पॉजिटिव) रखने के लिए उन्हें वीडियो कॉल करता और लूडो में उनसे हार जाता.हम एक-दूसरे को उम्मीद दे रहे थे कि हम इससे उबर जाएंगे.

लेकिन मेरे ठीक होने के बाद, पापा वायरस की चपेट में आ गए! उन्हें नियमित रूप से हॉस्पिटल ले जाया जाता था इसलिए मैं उनके करीब बैठकर अपनी परीक्षा की तैयारी करता.मैं उन्हें ऐसे जूझते हुए और नहीं देख सकता था.इसलिए मैंने अपने परिवार से कहा, ‘मैं उन्हें बचाने जा रहा हूं. मैं उन्हें अपना लीवर डोनेट करूंगा.

किस्मत से, मेरा लीवर मैच हो गया, लेकिन वह फैटी था। मुझे अपने लीवर का 65 प्रतिशत उन्हें दान करना था.इसलिए मैंने एक्सरसाइज की और खाने पीने का खास ध्यान रखा.कुछ टेस्ट के बाद, मुझे कहा गया कि मैं सर्जरी के लिए स्वस्थ्य हूं. मैं राहत महसूस कर रहा था, लेकिन पापा रो पड़े! उन्होंने मुझसे कहा,अगर तुम्हें आगे चलकर कॉम्प्लिकेशन (परेशानी) हो गए तो क्या होगा? मैं खुद को माफ नहीं कर सकूंगा! लेकिन मैंने उनसे कहा, आपकी लड़ाई मेरी भी है। हम हारने वाले नहीं हैं!

हमने सर्जरी पर अपनी बचत के 20 लाख रुपये लगा दिए. मां ने रोते हुए भारी मन से कहा मेरी लाइफलाइन सर्जरी के लिए जा रही है. यह जानकर कि हम अपनी जान गंवा सकते हैं… पापा और मैं चिंतित थे.लेकिन पापा ने मजाक में कहा, ‘जब यह सब खत्म हो जाएगा तो मैं तुम्हें लूडो में हरा दूंगा!’ उनकी सोच ने मुझे ध्यान केंद्रित करने में मदद की और मैंने अपनी परीक्षा पास कर ली!

और हमारी सर्जरी से दो दिन पहले मैं ग्रेजुएट हो गया. पापा ने कहा, मुझे डरा था कि मैं यह दिन नहीं देख सकूंगा। तुमने मुझे दुनिया का सबसे खुश पिता बना दिया. अब हमें बस एक और टेस्ट पास करना था और मैं दुआ कर रहा था कि सर्जरी आराम से हो जाए. जब मैं सर्जरी के बाद उठा तो डॉक्टर मुझे देखकर मुस्कुराया और कहा, तुमने अपने पापा को बचा लिया. मेरी आंखों में खुशी के आंसू आ गए.

जब पापा और मैंने एक-दूसरे के जख्मों को देखा तो उन्होंने कहा,’हमने इस लड़ाई को साथ लड़ा और जीत गए. महीनों से जो तनाव हमने महसूस किया था वह उड़ चुका था.और हां, ठीक होने का सफर मजेदार था.हमने एक साथ व्हीलचेयर को चलाना सीखा और खूब समय लूडो खेलने में बिताया.आज, हम दोनों फीट हैं.अगर इस अनुभव ने हमें कुछ सिखाया है तो यह कि जीवन अनिश्चित और परिवार ही सब कुछ है.

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