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घर चलाने के लिए पढ़ाई छोड़ चाय बेच रहा था 14 साल का बच्चा, पूरी मुंबई मदद के लिए खड़ी हो गई.

सुब्हान ने बताया उसके पिता की हार्ट अटैक से मौत हो चुकी हैं पिता के बाद उसकी मा ही घर का खर्च चलाराही थी लेकिन लॉक डाउन मे उसकी मा की नौकरी चली गईमुंबई के नागपारा, भिंडी बाजार जैसे इलाको मे चाय बेचते 14 साल के सुब्हान को लोगो ने नोटिस करना शुरू करदिया.

कुछ समय पहले एक ऐसे बच्चे की कहानी हमें पता चली जो केवल 14 वर्ष का था और वो घर चलाने के लिए चाय बेच रहा था.लॉक डाउन के चलते इसकी मा की नौकरी चली गई थी इस कारण ये बच्चों घर चलाने के लिए चाय बेचने लगा.मुंबई के नागपाडा, भिंडी बाजार जैसे इलाको मे चाय बेचते14 साल के सुब्हान लोगो की नज़र मे आने लगा.अच्छी खबर ये हैं की उसकी कहानी लोगो के सामने आने के बाद कई लोग सुब्हान और उसके परिवार की मदद के लिए आगे आये…

Humans of Bombay नाम के पेज पर बहुत से लोगो ने उसके इंटरव्यू को पढ़ा, इस इंटरव्यू मे सुब्हान ने अपनी आपबीती बताई उसने बताया हार्ट अटैक से उसके पिता की मृत्यो होगए थी और पिता की मृत्यो के बाद उसकी मा ही घर का खर्च चलाती थी नौकरी करकर, लेकिन लॉक डाउन की वजह से उसकी मा की नौकरी चली गई.

आपको बतादे सुब्हान जब केवल 2 वर्ष का ही था तब उसके पिता का साया उसके सर से उठगाया था. तब से ही उसकी मा बस अटेंडेंस का काम करती थी जिससे उसके घर का खर्चा चलता था. लेकिन लॉक डाउन के बाद से उसकी मा की नौकरी छूट गई. इसके बाद मुसीबतों का परिवार टूट गया सुब्हान के परिवार पर. तब केवल 14 वर्ष के सुब्हान ने चाय बेचकर घर का खर्च और बहनो की ऑनलाइन पढ़ाई करसके इसके लिए काम करने का फैसला लिया.

सुब्हान ने ये भी बताया के उसकी मा स्कूल बस अटेंडेंड थी जिस की नौकरी स्कूल बंद होने के कारण लॉक डाउन मे नौकरी चली गई.तब घर मे आर्थिक तंगी होगई और तब मैंने मुंबई के इलाको नागपाडा और भिंडी बाजार मे चाय बनानाकर बेचना शुरू किया. मे रोज़ के 300,400 कमा लेता हु और ये पैसे मे अपनी मा को देदेता हु और इसमें से कुछ पैसे बचा लेता हु.सुब्हान की मा उसको एयर फाॅर्स मे पाएलेट बनाना चाहती हैं.और अपने बेटे सुब्हान की पढ़ाई को लेकर काफी चिंतित भी रहती हैं.इस वजह से मुश्किल वक़्त मे सुब्हान को घर खर्च के लिए काम करते देख उसकी मा को दुख होता हैं.

अच्छी बात ये हैं इस मुश्किल वक़्त मे इस परिवार की मदद के लिए काफी लोग आगे आए हैं. आशा करते हैं सुब्हान और उसके परिवार की मुश्किलें थोड़ी कम होजाएँगी.

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