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53 वर्षीय महिला ने 33 साल बाद फिर शुरू की पढ़ाई 12वीं में किया टॉप रिजल्ट देख पति को लगा शॉक

कहते हैं पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती शिक्षा एक ऐसी चीज है.जब चाहे तो हम ग्रहण कर सकते हैं शिक्षा से हमेशा हमारा ज्ञान बढ़ता है और यह ज्ञान कभी भी खत्म नहीं होता ज्ञान अवश्य सदा ही बढ़ता रहता है. हम आपको बतादे इस महिला ने 53 वर्ष की आयु में पूरे 35 वर्ष पश्चात फिर से पढ़ाई शुरू की और 12वीं कक्षा में शानदार रैंक प्राप्त कर परिवार को हैरान कर दिया है.वही महिला के पति को शोक लगा अपनी पत्नी के इस तरह सफलता प्राप्त करने के बाद.

 

खबरों के अनुसार राजस्थान के झुझुनूं जिले की रहने वाली भंवरी शेखावत 53 साल की उम्र में भी पढ़ाई कर रही हैं. 33 साल बाद उन्होंने फिर से पढ़ाई शुरु करने का निर्णय किया है.कक्षा दसवीं के बाद ही उनकी शादी हो गई थी.इसी कारण बाद पढ़ाई छोड़ दीं थीं. 51 साल की उम्र में उन्होंने फिर से पढ़ाई शुरू की. उन्होंने 12वीं की परीक्षा पास की और सबसे ज़्यादा राजस्थान में नंबर भी उन्हें ही मिले.इस उपलब्धि के लिए उन्हें मीरा अवार्ड दिया गया.

 

खबरों के अनुसार राजस्थान के झुंझुनूं जिले की 53 वर्ष की भंवरी शेखावत सैकेंड एयर की छात्रा हैं. भंवरी शेखावत पंडित दीनदयाल उपाध्याय यूनिवर्सिटी सीकर से गेजुएशन कर रही हैं. झुंझुनूं की भंवरी शेखावत ने एक बहुत ही सराहनीये सन्देश दिया है. सभी देशवासियो को प्रेरणा मिलेगी के  शिक्षा ग्रहण करने के लिए कोई उम्र नहीं होती. उम्र कितनी भी हो बाधा नहीं हो सकती. भंवरी ने कहा कि शिक्षा प्राप्त करने की कोई उम्र नहीं होती है. जब मेहनत की लगन हो और लक्ष्य प्राप्त करने का जोश हो तो कुछ भी किया जा सकता है. 53 साल की भंवरी भंवरी ने 51 साल की उम्र में 12वीं बोर्ड परीक्षा न सिर्फ पास किया, बल्कि पूरे राजस्थान में सबसे ज्यादा नंबर भी लाई 12वीं की परीक्षा देने के लिए उन्होंने 33 साल बाद फिर से पढ़ाई शुरू की. 2 साल पहले 12वीं का रिजल्ट देख भंवरी के पति को  शॉक लग गया था.

 

मिली जानकारी के अनुसार राजस्थान में सबसे अधिक नम्बर मिलने पर भंवरी शेखावत को मीरा अवार्ड से सम्मानित भी किया गया है.
झुंझुनूं के विवेक नगर में रहने वाली भंवरी शेखावत एक गृहिणी हैं. भंवरी के पति सुरेन्द्र सिंह शेखावत झुंझुनूं डीजे कोर्ट में वकील हैं. भंवरी शेखावत ने 1986 में महाराष्ट्र बोर्ड से 10वीं कक्षा पास की थी. दसवीं पास करने के बाद ही शादी हो गई. शादी के बाद झुंझुनूं आ गईं. भंवरी शेखावत बताती हैं कि यहां ऐसे हालात और माहौल नहीं थे कि आगे की पढ़ाई जारी रख सकें. लेकिन पढ़ने की चाहत उनमें थी. आगे की पढ़ाई करना चाहती थी. सुसराल की स्थितियां अनुकुल नहीं होने के कारण अपनी इच्छाओं को दबा दिया. पढ़ नहीं सकी, लेकिन मन था कि मैं ग्रेजुएशन जरूर करूंगी.

 

भंवरी शेखावत ने करीब 33 वर्ष पहले पढ़ाई छोड दी थी. महाराष्ट्र बोर्ड से 1986 में दसवीं कक्षा पास की थी. भंवरी बताती हैं कि उनको किताबों से बहुत लगाव था. भंवरी के पति सुरेन्द्र सिंह ने बताया कि भंवरी की इच्छा थी कि वह ग्रेजुएशन करें. इसके बाद 2019 में ओपन बोर्ड से उसने फार्म भर दिया. पढ़ाई छोडे़ हुए करीब 33 साल हो चुके थे.लेकिन भंवरी घर का काम भी करती और पढ़ाई भी करती. उसने दसवीं की किताबों को पढ़ना शुरू किया. भंवरी बहुत सिरियस होकर पढ़ाई कर रही थी. वह हर रोज घर का पूरा  काम कर दोपहर में तीन चार घंटे की पढ़ाई करती थी.

भंवरी बताया कि उसने ओपन बोर्ड से फार्म तो भर दिया था, लेकिन पति सहित परिवार के किसी भी व्यक्ति को विश्वास ही नहीं था कि मैं परीक्षा पास करुंगी. जब किसी को बताया गया कि मैं अब 51 साल की उम्र में दसवीं की पढ़ाई कर रही हूं तो लोगों ने कहा कि अब क्या करोगी बुढ़ापे में दसवीं कर, अब कैसे पढ़ाई करोगी. इस उम्र में पढ़ाई होती है क्या, ऐसे लोग बोलते थे. इन बतों से हिम्मत टूटने की बजाएं, भंवरी कहती मेरे में जोश पैदा हो गया.जब वर्ष 2020 में रिजल्ट आया तो सब हैरान रह गए. भंवरी ने राजस्थान में टॉप कर दिखा दिया. रिजल्ट देखकर भंवरी ने कहा कि उसको पक्का विश्वास हो गया था कि मेहनत और लगन का कोई शॉर्टकट नहीं है. इसके बाद भंवरी ने प्राइवेट ही ग्रेजुएशन करने का फार्म भर दिया. भंवरी शेखावत ग्रेजुएशन का प्रथम वर्ष पास कर चुकी है. अब सैकेंड ईयर की पढ़ाई कर रही हैं.

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