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नवरात्री के शुभारम्भ पर 8 साल की बेटी की जिद्द से पूरी बस्ती हुई रोशन,गुलजार अली 400 लोगो के जीवन में लाए रौशनी

दोस्तों कहते है की इंसानियत का कोई धर्म नहीं होता है,सभी धर्मो में इंसानियत को सर्वोपरि रखा है,यानि कोई धर्म ये नहीं कहता की किसी दूसरे धर्म के लोगो की मदद नहीं करनी चाहिए,बल्कि ये कहा गया है की मनुष्य जाती को मनुष्य जाती के लिए काम आना चाहिए,सोशल मिडिया से देश में जहाँ एक तरफ नफरत की एक आग भड़कती रहती है वही पर कुछ लोग इस आग से बचते हुवे इंसानियत के लिए अपना काम कर जाते है,दोस्तों हमारा देश उदय से ही ऐसा रहा है,जिन्हे हम किसी नाम,जात,धर्म से नहीं बल्कि समाजसेवी के नाम से सम्बोधित करते हैं.हमारे देश में कई ऐसे लोग हुवे जो जाती,धर्म से ऊपर उठ कर आने वाली पीढ़ी के लिए एक सन्देश छोड़ जाते है,अब इन संदेशो को हम अपनी जिंदगी में कितना उतार पाते है ये हम पर निर्भर है.

दोस्तों शायद आप को पता होगा की सोशल मिडिया पर नफरतो का,जाती धर्म के नाम का बिजनस किया जाता है.और ये बिजनस आप के लाइक,और कमेंट से होते है.दोस्तों हमें बचपन से सिखाया जाता है की हमें प्रेम से रहना चाहिए,कभी किसी बुरे का जवाब बुराई से नहीं देना चाहिए,तो आइये आज के इस प्रेम भरे आर्टिकल से ही शुरुआत करते है जिसमे एक व्यक्ति के द्वारा किये गए काम से लोगो का आशीर्वाद-दुआ प्राप्त हुई.उन लोगो के चेहरे पर आयी हुई ख़ुशी उस व्यक्ति का सच्चा सुख बन गयी.इस व्यक्ति ने समय समय पर कई ऐसे काम किये है जिन्हे अभी तक गुप्त रखा है.इस व्यक्ति के अनुसार उनका मकसद सिर्फ सुख की प्राप्ति है जो उन्हें लोगो की मदद कर के मिलती हैं,और इस काम को स्वयं अपने हाथो से कर के प्राप्त करते है और इसका प्रचार नहीं करना चाहते है.

दोस्तों आज हम आप को एक ऐसे ही समाजसेवी के बारे में बताने जा रहे है जिन्होंने कुछ ऐसा किया की इनका ये काम एक मिसाल बन गया.दोस्तों ये बात जो हम आप को बताने जा रहे है ये राजस्थान में जोधपुर जिले के कमला नगर में स्थित गुजराती बस्ती का है जहाँ पर तक़रीबन 100 -120 झुग्गी झोपडी है जहाँ पर 400 से 500 लोग रहते है,ये लोग कई सालो से यहाँ रह रहे है,लेकिन इन बीते हुवे सालो में इनकी शाम कभी रोशन नहीं हुई.लेकिन जैसे ही नवरात्री के उत्सव का आगमन हुआ इनके घर रोशन हो गए,

आइये जानते है ये कैसे हुआ-नवरात्री के शुभारम्भ के 5 -6 दिन पहले एक व्यक्ति अपनी बेटी के साथ कार से गुजर रहा था,गुजरते हुवे बेटी ने बस्ती की तरफ देखा तो उसने पिता से पूछा की यहाँ पर अँधेरा क्यों है?इस के तत्पश्चात बाप बेटी उस बस्ती में गए और बस्ती में अँधेरे का कारण पूछा तो बस्ती वालो ने बताया की यहाँ पर आज तक लाइट नहीं आयी है.ये सुनकर बेटी ने पिता से लाइट लेन को कहा.और बेटी घर जाने तक उन बस्ती वालो के यहाँ लाइट लगाने का बोलती रही.पिता ने बेटी की इस बात को गंभीरता से लेते हुवे पूरी बस्ती को सौरऊर्जा से रोशन बनाने का मन बना लिया.जल्द ही नवरात्री के पहले दिन सभी बस्ती वालो के घर लाइट लग गयी और सभी के चहरे खिल उठे.

दोस्तों इस बस्ती को रोशन करने वाला नेकदिल इंसान गुलज़ार अंसारी जी है..और इनकी बेटी का नाम अफ़सा अंसारी है जो की सिर्फ 8 साल की है.गुलज़ार अंसारी जी के अनुसार उनकी बेटी ने बस्ती वालो के घर लाइट आने से पहले कहा की पापा हमारे घर तो लाइट है इनके घर अंधेरा क्यों है और ये पढ़ाई कैसे करेंगे और ये पढ़ाई नहीं करेंगे तो काम कैसे करेंगे अब उसके किसी भी सवाल का मेरे पास कोई जवाब नहीं था. किसी तरह से वापस घर पहुंच गया. लेकिन घर आने तक उसके सवाल जारी थे. लेकिन अगले दिन वापस जब उठा तो उसका वो ही सवाल. पापा उनके वहा लाइट आ गई ?

शायद मेने सोचा की रात की बात को वो भूल गई होंगी लेकिन वो अंधेरा और वो बच्चे शायद उसके दिमाग़ मे घर कर गए थे. जो इतनी आसानी से जाने वाले नहीं थे. तब मेने कहा बेटा इतनी बड़ी जगह है वहा पूरी बस्ती मे लाइट लाने के लिए बहुत पैसे खर्च होंगे तो वो बोली की कोई बात नहीं इस बार मे मेरा जन्मदिन नहीं मनाउंगी और जो पैसे बच जाये वो वहा पर दे देना जिस से वो अपने यहाँ लाइट ले सके. लेकिन शायद उसको ये पता नहीं था ये सब इतना आसान नहीं था.

लेकिन जब बेटी का हुकुम हो गया था तो कुछ तो करना था. अगले दिन वापस मे उसी बस्ती मे गया जहा पर 100 से ज्यादा झोपडीया थी वहा जब कुछ देर रुका तो ये अहसास हुआ की वो बगैर पानी बिजली के परेशान है. वही पर जब देखा तो कुछ झोपड़े जले हुए थे तो लोगो ने बताया की जो रौशनी के लिए जो दिए जलाये उस वजह से आग लगी और ये जल गए उस वक़्त मुझे भी ये अहसास हुआ की ये वास्तव मे परेशान है और परेशान हो भी नहीं वो सभी बड़ी मुश्किल से वहा रहते है. दूसरी तरफ बेटी की बाते. तभी अपने आप से वादा किया की 2 दिन के अंदर इनकी समस्या दूर करने की कोशिश करूँगा.

आज पुरे 4 दिन बाद कड़ी मेहनत की वजह से पूरी बस्ती मे लगभग 100 से 120 झोपडीयो मे कनेक्शन पुरे किये और पूरी बस्ती के लिए 5 kw ऑफ ग्रिड सिस्टम लगाकर स्टार्ट किया सबसे बड़ी बात की आज तक इन बस्ती वालो ने लाइट अपने यहाँ नहीं देखि यहाँ तक की इनको अपने मोबाइल भी पास की दुकानों से पैसे देकर चार्ज करवाने पड़ रहे थे. आज पूरी बस्ती बहुत ख़ुशी थी बस ये सब मेरी बेटी ने काम करने को कहा था जो मेने पूरा किया. कल शाम 4 बजे पूरी बस्ती मे लाइट चालू कर देंगे आप सब की दुआ रही तो आगे भी इस तरह के काम करते रहेंगे.

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