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अफगानिस्तान सीमा पर भारी फोर्स और टैंकों के साथ पहुंचा रूस, क्या तालिबान पर करेगा आक्रमण?

जब से तालिबान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के राष्ट्रपति भवन पर रॉकेट से हमला किया है तब से अफगानिस्तान में अपनी सुरक्षा सीमा को बढ़ा दी है. एक रिपोर्ट के अनुसार रूस ने अफगानिस्तान की सीमा पर अपनी विशालकाय सेना को तैनात कर दिया है. रूस कि सेना अफगानिस्तान की सीमा पर गोले बारूद के साथ खड़ी है.रूस विश्व का सबसे शक्तिशाली देश माना जाता है. रूस के पास विशालकाय सेना के साथ विभिन्न प्रकार के परमाणु हथियार भी मौजूद है.

काबुल की राष्ट्रपति भवन के हमले के बाद 6 देशों ने मिलकर तालिबान का विरोध करना शुरू कर दिया है.इन 6 देशों में रूस का नाम तो शामिल नहीं है. लेकिन इन ग्रुप में रूस का दोस्त देश भी मौजूद है. इसलिए रूस ने अफगानिस्तान की सीमा के लिए अपनी विशालकाय सेना को गोला-बारूद और ट्रकों के साथ में खड़ा कर दिया है. इन देशों के समूह का नियंत्रण अमेरिका के हाथों में है.

रूस की सेना अफगानिस्तान की सीमा पर युद्ध अभ्यास करते हुए नजर आ चुकी है. इस बात की जानकारी रुसी वीडियो द्वारा प्राप्त हुई. लेकिन इस बात पर विश्वास करना मुश्किल हो रहा है. लोगों को नहीं लगता कि रूस ने अपनी विशालकाय सेना को युद्ध अभ्यास करने के लिए अफगानिस्तान की सीमा पर भेजा है.आपको बता दें रूसी सैनिको ने ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान की सीमा पर भी गोला बारूद के साथ युद्ध अभ्यास किया था. इस बातें तालिबान चिंता में पड़ चुका है.

तालिबान ने तुर्की के राष्ट्रपति को धमकी भी दी है. तालिबान मुस्लिम देशों के खलीफा बनने की चाहत मे अफगानिस्तान में लगातार हिंसा कर बढ़ा रहा है. और अफगानिस्तान के रहने वाले लोगों की जमीन हड़प रहा है. तुर्की, तालिबान की इन हरकतों से परेशान होकर अमेरिका से मदद के लिए हाथ मांगा है. तालिबान और तुर्की के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है.सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार हजारों अफगानी सैनिक तालिबान कि से डरकर ताजिकिस्तान आ चुके हैं.

तालिबान के सैनिकों ने अफगानिस्तान को बड़े ही बेरहमी से मार डाला. तालिबान अफ़गानिस्तान के सामने कमजोर हो चुका है. तालिबान के इन सभी कारनामों को देखते हुए रूस ने अपनी सेना को अफगानिस्तान की सीमा पर खड़ा कर दिया है. इसी के साथ रूसी सैनिक का ताजीकिस्तान और उज़्बेकिस्तान की सीमा पर युद्ध अभ्यास कर रहे हैं. बता दे तालिबान ने ईरान और पाकिस्तान के लिए भी परेशानियां खड़ी कर दी है.अपने देश के विस्तार करने की चाहत में तालिबान ने पाकिस्तान और ईरान की सीमाओं पर आक्रमण कर दिए हैं.

तालिबान की इन हरकतों को देखकर हर कोई परेशान है और सब की आशा सिर्फ रूस पर ही टिकी है. अफगानिस्तान की स्थिति को देखकर उसने तालिबान से निपटने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति से मुलाकात की और उनके सामने मदद का प्रस्ताव रखा. एक्सपर्ट का मानना है कि रूस अफगानिस्तान की सीमा के अंदर नहीं जाता है तो वह ड्रोन के द्वारा भी तालिबान को तबाह कर सकता है.

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