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आगरा की महिला ने करदिया कमाल ,घर के बाथटब में मोती उगाकर कमा लिए 80,000 रूपए

संसार में हर एक व्यक्ति अपने सपने को सच करने के लिए भी लगा रहता है और लगातार प्रयत्न करते रहने के बाद उसको अंत में सफलता अवश्य ही मिलती है. अगर हम अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए मेहनत करते रहे पूरी लगन और मेहनत से उस कार्य को करते रहे तो निश्चित ही हमें एक दिन सफलता प्राप्त होती है.ऐसा ही आज हम आपसे एक मामला साझा करने वाले हैं जिसे जाने के बाद आप भी हैरान रह जाएंगे.हम बात कर रहे हैं उधमी रंजना यादव जो कि 27 वर्षीय हैं.कई परेशानियों को पीछे छोड़ती हुई अपने सपने को पूरा किया.
रंजना ने उत्तर प्रदेश के आगरा में विधि वाणी पर्ल फार्मिंग नाम से एक स्टार्टअप शुरू किया है.

3 वर्ष पहले रंजना ने फॉरेस्ट्री में एमएससी की पढ़ाई पूरी की थी इसके बाद ही वह पर्ल फार्मिंग यानी मोती की खेती की ओर आकर्षित हो गई थी.रंजना बताती हैं सीप के भीतर मोती बनने की प्रक्रिया मुझे काफी चकित करती थी और मैं काफी आश्चर्यचकित थी इस प्रक्रिया से.यह देखना मेरे लिए और भी ज्यादा दिलचस्प था कि किस तरह लोग प्राकृतिक प्रक्रिया का इस्तेमाल सुंदर चीजें बनाने में करते हैं.सुंदर चीजें बनाने में करते हैं मैं भी इसका हिस्सा बनना चाहती थी रंजना ने अपने परिवार को इस बारे में बताया और कहा कि वह यह काम शुरू करना चाहते हैं लेकिन परिवार के लोग सहमत नहीं थे फिर रंजना ने तय किया कि वह पहले घर पर ही मोती की खेती करके दिखाएंगी.

रंजना ने वर्ष 2018 जनवरी में इस काम की शुरुआत की.अपने ससुराल से ही यह काम शुरू किया उन्होंने वहां एक पुराने बाथ टब में एक छोटा सा खेत बनाया.रंजना ने कहा मैंने छोटे स्तर पर कार्य करना शुरू किया 20 मोटी के सीप लगाए हर दिन मैंने इसकी देखभाल की 10 12 महीनों में अच्छे परिणाम दिखने लगे.सभी सीप में करीब 2 मोती थे और मैंने माना कि यह मेरी 80 फ़ीसदी सफलता थी. इस सफलता से रंजना का आत्मविश्वास और मजबूत हुआ और वह अपनेपरिवार को अपने इस सपने में साथ देने के लिए मनाने में सफल रही इसके अलावा हैदराबाद में बाथ टब में उगाए गए मोती के लिए उन्हें एक ज्वेलरी के बाजार में ₹350 ₹450 मिले ₹80000 का सीधा मुनाफा हुआ.


अपनी सफलता से काफी ज्यादा खुश थी रंजना. रंजना ने भुवनेश्वर के सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेश वॉटर एक्वा कल्चर में मोती की खेती पर 1 सप्ताह के क्रैश कोर्स में दाखिला लिया.यूपी के गंगा बेल्ट में मोती की खेती की सफलता ने रंजना को खुद के लिए एक अलग जगह बनाने में काफी मदद की. भुवनेश्वर से लौटने के पश्चात उन्होंने अपने पैतृक घर के आंगन में खेती शुरू की. रंजना बताती है कि अपने परिवार की यह पहली सदस्य हैं जिसने बिजनेस किया है.


रंजना का कहना है जिंदगी रिस्क लेने का ही नाम है मैंने अपने पिता सुरेश चंद्र यादव को मनाया और एक कृतिम तालाब बनाने के लिए 14,14 फीट जमीन खोदने की अनुमति ली. रंजना ने बताया उन्होंने अहमदाबाद से 2000 सीप भी खरीदे कुल मिलाकर ₹1 लाख का निवेश किया.रंजना ने मोती की प्रक्रिया को विस्तार से बताया.”सीप मिलने के बाद उन्हें एक दिन के लिए ऐसे ही छोड़ा जाता है। इसके बाद अगले 7 दिनों के लिए क्षार उपचारित पानी में डुबो कर रखना होता है और साथ ही उन्हें नियमित रूप से हरे शैवाल का चारा भी देना पड़ता है. 7 दिनों के बाद जब कवच और मांसपेशियां ढीली हो जाती हैं तो सर्जरी कर सीप के अंदर सांचा डाल दें। फिर नायलॉन नेट और रस्सियां टांगी जाती हैं ताकि सीप को सहारा मिल सके और वैरायटी के आधार पर उन्हें 10-12 महीने या उससे भी अधिक समय तक के लिए छोड़ दिया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान, कुछ चीज़ों का ध्यान रखना बेहद महत्वपूर्ण है, जैसे  पानी के तापमान की जाँच करना, तालाब की सफाई करना और सुनिश्चित करना कि उन्हें ठीक चारा मिल रहा है”रंजना अपने इस काम को पूरी तरह से मेहनत लगन से करती हैं रोज सुबह तलाब में प्रदीप के काम पर ध्यान देती हैं 3 से 4 घंटे तक कोई काम में अपना समय लगाती हैं. लॉकडाउन के कारण समस्याओं का सामना भी करना पड़ा. रंजना दो जुड़वा बच्चों की मां है अपने बच्चों की तरह ही वह सीप का ध्यान रखती हैं.

रंजना कहती हैं उन्हें दवाइयां देना स्वास्थ्य  का ध्यान रखना तक सभी मैंने सावधानीपूर्वक काम किए यदि मौसम अनुकूल ना हो तो मृत्यु दर 90% तक बढ़ जाती है. इसलिए रोजाना जाँच जरूरी है.समय के साथ वे और मजबूत  होते हैं.रंजना ने बताया  मीठे पानी के सीप मोती डिजाइनर होते हैं.उन्हें विभिन्न आकारों और डिजाइनों में ढाला जा सकता है.जबकि खारे पानी वाले सीप मोती हमेशा गोल होते हैं. मीठे पानी वाले सीप मोती उगाना भी आसान है और तुलनात्मक रूप से कम खर्चीला भी है। इसके अलावा, मीठे पानी वाले सीप में, प्रत्येक उत्पादन चक्र में प्रति सीप लगभग 2-6 शुद्ध मोती उगाए जा सकते हैं.एशिया में कुछ स्थानों पर लोग एक समय में एक ही सीप में कम से कम 20 मोती तक उगा रहे हैं.समुद्र के मोती की खेती में उन्नत सर्जिकल कौशल की आवश्यकता होती है. जबकि थोड़ी ट्रेनिंग के साथ कोई भी व्यक्ति मीठे पानी में मोती उगा सकता है.साथ ही यह सस्ता भी है। इसका मतलब है कि ये मोती तुलनात्मक रूप से सस्ते हैं, और निवेश और लाभ अनुपात काफी अच्छा है” रंजना ने कहा कि अक्टूबर-नवंबर में उन्हें मोती की खेती से 4 लाख रुपये का मुनाफा होने की उम्मीद है.रंजना ने अपने खेतों में 16 कृषि छात्रों को प्रशिक्षित किया है यूपी हाथरस में 10 किसानों की मदद की है खुद का मोती खेत तैयार किया है.इसलिए  हमेशा अपने लक्ष्य पर लगन और मेहनत से कार्य करते रहें 1 दिन सफलता जरुर मिलेगी.

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