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बिहार की बेटी ने देश का नाम किया रोशन ,मेहनत लगन से हासिल की गूगल में नौकरी सलाना पैकेज 60 लाख रूपये

अक्सर लोगों का यह सोचना होता है कि बेटियां होना नहीं चाहिए बेटा ही होता है जो वंश आगे बढ़ाता है जो खानदान का नाम रोशन करता है. लेकिन आज इस जमाने में लड़कियों ने अपनी काबिलियत के चलते इन सभी रूढ़िवादी सोच को गलत साबित कर दिया है.देश की बेटियां आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं. सफलता प्राप्त कर रही हैं. अपने परिवार माता-पिता का सर गर्व से ऊंचा कर रही हैं.चाहे टोक्यो ओलंपिक, आर्मी,नेवी या एयरफ़ोर्स जैसी मुश्किल कठिन कार्य हो सभी में अपने परिवार और देश का नाम रोशन कर रही हैं. इस कड़ी में एक और परिवार की बेटी ने अपना नाम जोड़ लिया है और अपने परिवार का सर गर्व से ऊंचा कर दिया है.


हम आपसे बात कर रहे हैं बिहार के भागलपुर की रहने वाली शालिनी झा जो सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी गूगल में सिलेक्ट की गई है.खास बात यह है कि इस बड़ी कंपनी ने शालिनी को ₹60 लाख का वार्षिक पैकेज दिया है.बिहार के सुल्तानगंज की रहने वाली शालिनी झा के पिता एक प्राइवेट कंपनी में प्रबंधक का कार्य करते हैं. बचपन से ही पढ़ाई करने की रुचि थी शालिनी ने दसवीं कक्षा में अपने स्कूल में टॉप किया था. 12वीं कक्षा में उन्होंने 96.2 % अंक प्राप्त करके पूरे स्कूल में टॉप किया था. गूगल सॉफ्टवेयर कंपनी में सेलेक्ट हुई हैं  शालिनी. दिल्ली के इंदिरा गांधी टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर विमेन में बीटेक की पढ़ाई कर रही हैं. शालिनी झा बीटेक में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्यूनिकेशन ब्रांच की स्टूडेंट है. कॉलेज में भी स्टूडेंट और थर्ड ईयर में शालिनी ने अपनी ब्रांच में टॉप किया.

21 वर्ष की उम्र में शालिनी ने सबसे बड़ी सफलता प्राप्त की. फाइनल ईयर की पढ़ाई के बीच ही शालिनी का सिलेक्शन गूगल सॉफ्टवेयर कंपनी में हो गया. यह उपलब्धि 21 वर्ष की उम्र में बहुत मुश्किल से लोगों को मिल पाती है. बिहार के भागलपुर की रहने वाली शालिनी झा आज इस मुकाम पर हैं वह उसका श्रेय अपने पिता कामेश्वर झा को देती हैं.शालिनी अपने प्रेरणा स्रोत पिता को मानती हैं. शालिनी ने कहा उनके पिता उनके लिए सब कुछ.हैं उनके पिता बचपन से ही शालिनी को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करते रहे हैं. शालिनी के पिता का मानना है कि पढ़ाई तपस्या है और इसे पूरी निष्ठा से करना चाहिए.  अवश्य ही सफलता प्राप्त होती है. शालिनी के अलावा उनकी एक बहन और एक भाई भी है वह भी शालिनी को हमेशा ही प्रोत्साहित करते रहे हैं.

शालिनी ने सात राउंड इंटरव्यू किया पार .

आप बता दें शालिनी को पहले ऑन केंपस ड्राइव में एक ऑस्ट्रेलियन कंपनी अटलस्सियन  द्वारा 51 लाख का पैकेज दिया जा रहा था. इसके अलावा शालिनी ने डाटा स्टोरेज कंपनी में 2 महीने की इंटरशिप भी की थी. लेकिन बाद में शालिनी ने ऑफ केंपस गूगल कंपनी में अप्लाई किया शालिनी की कड़ी मेहनत लगन रंग लाई गूगल सॉफ्टवेयर कंपनी का 7 राउंड इंटरव्यू अपने अनुभव और काबिलियत के अनुसार पार कर लिया. आखिर में कंपनी ने शालिनी को सिलेक्ट कर लिया. हमारे देश में बेटियां किसी से कम नहीं उन्होंने अपनी लगन और मेहनत से यह साबित कर दिया है. बेटे बेटी में कोई अंतर नहीं होता. सिर्फ हमें अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए पूरे मन और लगन से किया हुआ कार्य अवश्य ही सफल होता है. जिस पर पूरे देश को गर्व है उसी में से शालिनी  है जिन्होंने अपना नाम इस लिस्ट में शामिल कर लिया है. लड़की पढ़ाओ लड़की बचाओ यही अब सोच सभी को बनानी चाहिए और लड़के लड़की का अंतर खत्म कर देना चाहिए.

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