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चीटियां खाने के लिए अपना आकार छोटा करते गए थे, यह डायनासोर, चीनी शोध…..

डायनासोर एक ऐसा जानवर जो हमेशा आश्चर्यचकित होकर लोग देखते और सुनते आए हैं जिसके बारे में सुनकर ही लोग हैरान हो जाते हैं और इसका आकार इसका शरीर देखकर एक खाफ आ जाता है यह आज तो लुप्त हो चुके हैं इनका कोई वजूद नहीं लेकिन अब से कई वर्षों पूर्व इनको पाया गया था और इनका एक अलग ही खौफ था। यह प्रजाति लुप्त हो चुकी है लेकिन इसका रूप दिखाने के लिए कई फिल्में बनाई गई हैं और जो काफी चर्चित भी हुई हैं. यह प्रजाति डायनासोर की अपने शरीर अपने आकार से इतनी भयानक दिखती है कि सोचकर ही रूह कांप जाती है.

लेकिन अब एक जानकारी के अनुसार एक खबर सामने आई है कि यह ठंडे खून के जीव छोटे आकार के भी होते हैं. हाल ही में चीन के शोधकर्ताओं ने जीवाश्मों का अध्ययन करते हुए ऐसे ही एक छोटे डायनासोर के बारे में एक बहुत ही रोचक जानकारी ग्रहण की है. उन्होंने बताया कि अल्वारेजसार प्रजाति के डायनासोर ने अपनी खुराक में बदलाव करते हुए चींटी को खाना शुरू कर दिया था जिसके बाद से उनका आकार तेजी से कम होने लगा था।

किसने किया अध्ययन…

यह डायनासोर मुर्गे के आकार तक छोटे हुआ करते थे बीजिंग में  इसट्यूटर आफ वर्टिब्रेट पेलिओंटोलॉजी एवं पेलिओएंथ्रोपोलॉजी और ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी से पीएचडी छात्र जिसुआन किन की अगुवाई में हुए. अध्ययन में बताया गया कि अलवारेजसार डायनासोर ने आज से करीब 10 करोड़ वर्ष पहले चीटियों की खुराक अपनाने के बाद अपना आकार बहुत तेज़ी से कम करना शुरू कर दिया था.जिचुन ने इस प्रजाति के डायनासोर के दर्शन नमूनों का अध्ययन किया और लाखों वर्ष तक उनके आकार में बदलाव का अध्ययन भी किया.लाखो साल उत्तर ज्यूरासिक  काल से लेकर उत्तर क्रिटेशियस काल में रहा करते थे. यानि के 16 करोड़ वर्ष से सात करोड़ वर्ष पहले के समय में चीन मंगोलिया और दक्षिण अमेरिका में पाए जाते थे.

पहले कैसे आकार में दिखा करते थे डायनासोर…

पहले के समय में ज्यादातर अल्वारेजसार पतले, दो पैरों वाले शिकारी डायनासोर छिपकली, शुरुआती स्तनपाई जीव और शिशु डायनासोर के तौर पर अपनी खुराक लिया करते थे.नमूनों का अध्ययन करने के दौरान उन्होंने पाया कि 10 से 70 किलो के वजन वाले पुराने नमूनों का आकार विशाल टर्की या छोटे शतुरमुर्ग के आकार का था।

खुराक में बदलाव…

अल्वारेजसार के काल के बाद के समय में नमूनों के आकार एक मुर्गे का हो गया जिचीन का कहना है कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि वे चीटियां खाने लगे थे जीचुआन के पर्यवेक्षकों में से एक ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर माइकल बैटन का कहना है कि खुराक में यह बड़ा बदलाव खाने की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण हुए होगी.

क्यों बदली खुराक…

क्रिटेशियल काल में परिस्थिति की बहुत तेजी से बदल रही थी और धरती पर फूल वाले पौधे बहुत अधिक मात्रा में पनप रहे थे. लेकिन इससे चींटी और दिमक जैसे कई नई तरह के कीट पतंगे पैदा हो गए. डायनासोर इस तरह के पौधे नहीं खाया करते थे.लेकिन क्रीटेशयस काल के जीवो के खान पर बहुत असर पड़ा और आधुनिक जंगलों  आधारित जैव मंडल पैदा होने लगे।

हमेशा से नहीं था ऐसा आपकार इसकी पुष्टि…

इससे पहले मंगोलिया में इस तरह के छोटे डायनासोर के अवशेष खोजे गए थे उस समय भी उनकी खुराक चीटियों पर आधारित थी.इन की प्रजाति करीब 1 मीटर लंबी थी. लेकिन उसका वजन 4. 5 किलो था और उसका आकार एक टर्की पक्षी की तरह था.लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि अल्वारेजसार ने जब चीटियों को खाना शुरू किया तब भी उतने छोटे नहीं थे. उनके पूर्व रैपलोंशेरस छोटे शतुर मुर्गों के आकार के थे.

 

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