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दिल्ली में एक छोटी दुकान से बना लिया है मिलियन डॉलर का साम्राज्य, आइए जाने

मेहनत के बल बूते पर सब कुछ पाया जा सकता है चाहे परेशानियां कितनी ही हो.आज ये लाइन को सही साबित करने वाले उस शख्स की कहानी बताते है.जिसने अपनी जिंदगी में प्रतिस्थापन, बाजार उतार चढ़ाव,वैश्विक आर्थिक मंदी,डिजिटल क्रांति आदि को देखा को ओर उन सब समस्या से डरे नहीं अडिग खड़े होकर समना किया और आज फ़ूड चैन मार्केट में जाना पहचाना नाम बन गए.गरीबी के हर मोड़ पर खुद को खड़ा पाया और उससे निकलने के लिए किया गया अथक प्रयास ही आज उनको चर्चा का विषय बना रहा है.हम बात कर रहे ज्ञानी गुरु चरण सिंह की.

जो आज हर उस बन्दे के प्रेरक है जो अपना दुकान या व्यापार शुरू कर रहे है.आजादी के बाद पाकिस्तान से आकर दिल्ली में बसे ज्ञानी जी के लिए सफर इतना आसान नहीं था.लेकिन अपने मिठास से पूरे दिल्ली में तहलका मचा रखा है.उन्होंने 1956 में अपनी जीविका चलाने के लिए छोटी सी राबड़ी ओर फालूदा की दुकान खोली.अपने मिठास ओर जायके के लिए यह दुकान पूरे पुरानी दिल्ली ओर आस पास के गांव में लोगो कि जुबा पर आ गई.दुकान पर ग्राहकों की आवाजाही और प्रसिद्धि से खुश होकर ज्ञानी जी ने अपने व्यापार का एरिया बढ़ते हुए इस दुकान को मिठाई कि दुकान में बदल दिया.अपने बाल बूते पर ज्ञानी जी ने 1962 में 12000 हजार का निवेश किया और एक मशीन को खरीदा जो बहुत बड़ा निवेश था.

ज्ञानी जी आजादी के बार के प्रतिस्थापन को भूले भी नहीं थे कि.भारत आर्थिक मंदी का शिकार हुआ और ग्लोबाइज़ेशन बढ़ गया चारो तरफ.अब दिल्ली में मॉल ओर रेस्टोरेंट का स्वरूप आ गए.ज्ञानी जी इस से भयभीत नहीं हुए बल्कि खुद को मॉडर्न करते गए.गुरु ज्ञान चरण सिंह ने अपनी पहली मॉल शॉप की नीव डाली को ज्ञानीज आइसक्रीम कहलाई.ज्ञानी जी ने अपने आप को मार्केट में बनने के लिए दिल्ली के पोश इलाकों में ब्रांच खोली और उसमे न्यू आइटम एड करते रहे.एक समय ऐसा भी था बड़े बड़े रेस्टोरेंट बंध हो रहे थे वहीं ज्ञानी जी ने बड़ी चतुराई से उस आर्थिक मंदी का सामना किया.अभी फिलहाल उनका ये काम उनका बेटा गुरुमीत सिंह संभाल रहा है.लेकिन उसका मार्गदर्शन आज भी ज्ञानी जी करते है.कहा जाता है शुरआत में 3 तरह के लजीज टेस्ट के लिए फेमस ज्ञानी जी की दुकान आज 38 तरह के स्वाद के लिए फेमस हो गई.

आपको एक बात बता दे गुरु ज्ञान चरण सिंह ने अपनी दुकान में कई मशीन बाहर से इंपोर्ट कि है लेकिन दूध वो आज भी किसानों से लेते है एवं हाथ से क्रीम बनते है.इसके पीछे उनका कहना है ये सब हाथ का ज्यका है.उनका बेटा बीसवीं सदी में हो रहे डिजिटल बदलाव कर उनके व्यापार को देश विदेश में पहुंचा रहे है.

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