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कभी दूसरों की गाड़ी चला कर भी पूरे नहीं हो पाते थे इस एक्टर के खर्चे, मजबूरी में वाइफ भी करती थी काम….

आज हम आपसे भोजपुरी एक्टर के बारे में बात करने जा रहे हैं जो खलनायक से लेकर दोस्त से लेकर पिता तक के रोल में अभिनय कर चुके हैं. दोस्तों हम बात कर रहे हैं अवधेश मिश्रा की जिन्होंने अपने अभिनय के दम पर अपना लोहा मनवाया है. उन्होंने मेहंदी लगा के रखना ज्वाला और सेहरा बांध कर आऊंगा इन भोजपुरी फिल्मों से अपने अभिनय द्वारा अपना लोहा मनवाया है. आपको बता दें अपनी एक्टिंग मैं खलनायक का रोल और दोस्त और पिता का रोल भी उतना ही अच्छे तरीके से निभाते थे। आज हम आपको उनके संघर्ष की कहानी बताते हैं. कि किस तरह वह यहां तक पहुंच सके.

हम आपको बता दें अवधेश मिश्रा के यहां तक के सफर के संघर्ष की कहानी के किस तरह संघर्ष करते हुए यहां तक इस मुकाम पर पहुंच पाए. आपको बता दें अपने शुरुआती संघर्ष के सफर में कितनी रातों ही यार्ड में सोकर बिताना पड़ी थी. आपको बता दें अंवधेशमिश्रा ने अपने इंटरव्यू में बताया था कि जब वह मुंबई आए थे तो उनके पास रहने का कोई ठिकाना नहीं था और उन्होंने कितनी ही रहते यार्ड में सोकर बताई थी. आज जब उसके बाद उनका परिवार बच्चे और पत्नी मुंबई आ गए तो परिवार का खर्च चलाने के लिए वह पेंटिंग किया करते थे,और ड्राइविंग भी किया करते थे. इन पैसों से ही घर चलाया करते थे। आपको बता दें एक्टर ने बताया कि एक वक्त ऐसा भी आया जब मेरी पत्नी स्कूल में जाकर बच्चों को डांस सिखाती थी और उनको भी काम करना पड़ा था. उन पैसों से हम अपने बच्चों का पेट भरते थे.

आपको बता दें और देश ने कहा कि ऐसी नौबत तब आई जब मुझको इंडस्ट्री में कहीं काम नहीं मिल पा रहा था. कोई टीवी इंडस्ट्री ने भी मेरे चेहरे को रिजेक्ट कर दिया था शायद मेरा चेहरा टीवी इंडस्ट्री के लिए फिट नहीं,था कहीं काम नहीं मिल रहा था. आपको बता दें अवधेश ने बताया कि भोजपुरी फिल्मों से मुझे कई बार काम का ऑफर आया. और इस बार उन्होंने काम करने से मना नहीं किया और हां कर दी. आपको बता दें अब देश की भोजपुरी पहली फिल्म दूल्हा आई सन चाही थी. यह मूवी के लिए उन्हें केवल 2500 रुपये मिले थे. अवधेश का कहना है कि उन्हें इंडस्ट्री से मतलब नहीं था. उस समय हालात को देखते हुए उनके लिए पैसे ज्यादा जरूरी थे. इसलिए उन्होंने इसमें काम किया.

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