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3 दिन से घर मैं पड़ी थी फिल्म क्रिटिक की डेड बॉडी,ऐसे पता चली मौत की खबर, स्लेबस ने जताया शोक…..

बॉलीवुड फिल्मी दुनिया के जाने-माने क्रिटिक्स राशिद  ईरानी का 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। सूत्रों के अनुसार राशिद  काफी समय से स्वास्थ्य संबंधित बीमारियों से जूझ रहे थे. लेकिन उनके दोस्त रफीक इलियास ने बताया कि दक्षिण मुंबई के पास धोबी तालाब में अपने घर में राशिद ने 30 जुलाई को अंतिम सांस ली.उनके दोस्त रफीक का कहना है कि शायद उन्होंने 30 जुलाई को इस दुनिया को अलविदा कह दिया होगा. क्योंकि उनकी बॉडी बाथरूम में पाई गई उनका कहना है कि हम सब सोच रहे थे कि वह शायद शहर से बाहर कहीं गए हुए हैं.

रफीक का कहना है कि शुक्रवार की सुबह नहाने के दौरान उनकी मौत हुई होगी क्योंकि उनकी बॉडी बाथरूम में मृत पाई गई.रशीद इलियास काफी दिन से नहीं दिखे तो सोचा वह कहीं शहर से बाहर गए होंगे.लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ तो चिंता होने लगी तब पुलिस को सूचना दी  फिर घर का दरवाजे को तोड़ा गया.

रफीक का कहना है कि शुक्रवार की सुबह नहाने के दौरान उनकी मौत हुई होगी क्योंकि उनकी बॉडी बाथरूम में मृत पाई गई.रशीद इलियास काफी दिन से नहीं दिखे तो सोचा वह कहीं शहर से बाहर गए होंगे.लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ तो चिंता होने लगी तब पुलिस को सूचना दी  फिर घर का दरवाजे को तोड़ा गया. रशीद को पिछले वर्ष करोना भी हो गया था रशीद की तबीयत ठीक नहीं थी. वह मुंबई प्रेस क्लब ने भी ट्वीट कर राशिद के निधन की जानकारी दी.

ट्वीट में लिखा देश के जाने माने फिल्म समीक्षकों में से राशिद ईरानी का घर पर ही 30 जुलाई को निधन हो गया.उन्हें दो-तीन दिनों से नहीं देखा गया था उनके दोस्तों,क्लब मेंबर,पुलिस द्वारा तलाशने के बाद उनके घर पर उनकी डेडबॉडी पाई गई वह मुंबई प्रेस क्लब फिल्म सोसाइटी के स्तंभों में से एक थे और क्लब के एक लीड मेंबर थे उनकी कमी हमेशा सताएगी उनके अंतिम संस्कार के बारे में जल्दी बताया जाएगा.राशिद ईरानी के निधन के कारण बॉलीवुड में दुख का माहौल है करण जौहर ने उनके निधन पर शोक जताया उन्होंने ट्वीट कर लिखा आपकी आत्मा को शांति मिले राशिद मुझे हमारी सारी मुलाकात और बातचीत याद है सिनेमा पर आपकी अंतर्दृष्टि हमेशा कीमती रहेगी.निर्माता निर्देशक सुधीर मिश्रा ने भी उनके निधन पर शोक जताते हुए ट्वीट में लिखा, जब मैं 80 के दशक की शुरुआत में मुंबई आया तो यह उस तरह का बाम्बेइट था,जिसे मैं प्यार करने लगा था. सज्जन,द्ढ़,चर्चा में खुद को रखते थे,लेकिन हमेशा सुनते भी थे. उनके सामने उनका शहर बदल गया वह फेलिनी अमरकोट के दादाजी की तरह थे, जो अपने ही घर के पास खो गया.

 

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