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दिल्ली में रिक्शा चलने वाला शख्स की चमकी किस्मत ,इस चीज की खेती कर लाखों रुपये कमाता है

खेती और मार्केट को समझने वाला हर आदमी कहता है, खेती के कमाई करनी है हो अनाज नहीं उसके प्रोडक्ट बेचो। गेहूं की जगह आटा,तो फल की जगह जूस और जैम,लेकिन ये काम कैसे होगा, उसकी न फैक्ट्री लगाने की मशीनें सस्ती और सस्ती मिलती हैं,लेकिन कुछ किसान ऐसे हैं जिन्होंने इसका तोड़ निकाल लिया है,हरियाणा के रहने वाले धर्मवीर कंबोज न सिर्फ खुद इस राह पर चले बल्कि अपनी बनाई जुगाड़ की मशीनों से हजारों किसानों को रोजगार दिया,उनका खुद का कारोबार आज लाखों में है और वो सफल उद्यमी और किसान ट्रेनर हैं,हरियाणा के यमुना नगर जिले के दंगला गाँव के रहने वाले धर्मवीर कंबोज सालाना 80 लाख से एक करोड़ रूपए तक कमा लेते हैं!

लेकिन कभी वो दिल्ली की सड़कों पर दिन-रात रिक्शा चलाते थे,लेकिन एक दिन वो घर लौटे और जैविक खेती शुरु की,फिर अपने ही खेतों में उगाई सब्जियों की प्रोसेसिंग शुरु की,उसके लिए मशीनें बनाईं,लेकिन, रिक्शा चालक से करोड़पति बनने तक की राह इतनी आसान नहीं थी,करोड़पति बनने तक के सफर के बारे में धर्मवीर सिंह बताते हैं,इतना पढ़ा लिखा नहीं था कि कोई नौकरी पाता,इसलिए गाँव छोड़कर दिल्ली में रिक्शा चलाने लगा,रिक्शा चलाकर घर चलाना भी मुश्किल था,एक बार एक एक्सीडेंट हो जिससे मैं वापस आने गाँव आ गया!

 

घर आने के बाद कई महीनों तक उन्हें कोई काम नहीं मिला और वो घर पर ही रहे,एक बार वे राजस्थान के अजमेर गए, जहां उन्हें आंवले की मिठाई और गुलाब जल बनाने की जानकारी मिली,धर्मवीर बताते हैं,एक बार हमारे गाँव के किसानों का टूर अजमेर गया, वहां पर मैंने देखा कि वहां पर महिलाएं आंवले की मिठाइयां बना रहीं हैं,मैंने सोचा कि मैं भी यही करूंगा,लेकिन इसको बनाने के लिए गाजर या फिर आंवले को कद्दूकस करके निकालना होता है,जिससे हाथ छिलने का डर बना रहता था,जिस हिसाब से मुझे प्रोडक्शन चाहिए था, वो मैन्युअल पर आसानी नहीं हो सकता था,तब मैंने सोचा कि कोई ऐसी मशीन बनायी जाए जिससे मेरा काम आसान हो जाए,करते हैं!

जैविक खेती आज धर्मवीर पूरी तरह से जैविक खेती करते हैं,लेकिन वो अपनी फसल को मंडी में नहीं बेचते हैं जितनी भी फसल होती है, उसकी प्रोसेसिंग करके अच्छी पैकिंग करके बाजार में बेचते हैं,इसके लिए उन्होंने इसके लिए एक मल्टीपरपज प्रोसेसिंग मशीन बनायी है,जिसमें कई तरह के उत्पादों की प्रोसेसिंग हो जाती हो,वो बताते हैं,इस मशीन से एक घंटे में दो कुंतल एलोवेरा का जूस बनाते हैं और जो छिलका बचता है उससे भी हैंड वॉश,एलोवेरा जेल जैसे उत्पाद बनाते हैं,इसी के साथ ही इसी मशीन से आंवला, अमरूद, स्ट्राबेरी जैसे कई फलों के साथ ही गाजर,अदरक, लहसुन की भी प्रोसेसिंग हो जाती है!

डेढ़ लाख रुपए की इस मशीन का बाद में पेटेंट भी कराया गया,इस मशीन से सब्जियों का छिल्का उतारने,कटाई करने, उबालने और जूस बनाने तक का काम किया जाता है,वर्ष 2010 में नेशनल फॉर्म साइंटिस्ट पुरस्कार से पुरस्कृत कंबोज ने बताया कि वे तुलसी का तेल, सोयाबीन का दूध, हल्दी का अर्क तो तैयार करते ही हैं गुलाब जल, जीरे का तेल, पपीते और जामुन का जैम आदि भी तैयार करते हैं,वे अमरूद का जूस निकालने के अलावा इसकी आइसक्रीम और अमरूद की टॉफी भी बनाते हैं,राष्ट्रीय पुरस्कार से भी हैं सम्मानित वर्ष 2013 में खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित कंबोज ने बताया कि उनकी मशीन सिंगल फेज बिजली से चलती है और इसमें मोटर की रफ्तार को नियंत्रित करने की भी व्यवस्था है ताकि जरूरत के अनुसार उसका उपयोग किया जा सके,वे अब तक 250 मशीनें बेच चुके हैं,इनमें से अफ्रीका को 20 और नेपाल को आठ मशीनें दी गई हैं,अधिकांश मशीनों को सेल्फ हेल्फ ग्रुप को बेचा गया है!

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