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24 साल से मंदिर में बंद है ये लड़की वैराग्य पूजा कर लोग चढ़ाते हैं प्रसाद, जानिए क्या है वजह

हमारे देश भारत में भी भिन्न भिन्न प्रकार के लोग हैं और उनकी भिन्न-भिन्न सोचें रखते हैं वैसे तो यहां धार्मिक ज्यादा है और सभी धर्मों के लोग भी रहते हैं मगर कोई व्यक्ति इस तरह से धार्मिक हो जाए कि कम उम्र में ही दुनिया का मुंह भंग करके बस तपस्या का जीवन व्यतीत करने लगे अपने आप में यह भी बहुत बड़ी बात है ऐसी ही एक घटना से आपको रूबरू कराते हैं जो बहुत अद्भुत बात है कोई इंसान अपना जीवन इस तरह से एक जोगी की तरह गुजारने लगे आज के लेख में हम बात करने जा रहे हैं एमपी के एक छोटे से गांव की जहां पर एक लड़की ने 8 साल की उम्र में ही संसार का मोहभंग कर दिया.

एमपी की ललिता देवी को 8 साल की उम्र में वैराग्य हो गया उसके बाद इस लड़की ने ऐसा किया जिसे सुनकर आश्चर्य होता है सूत्रों की माने तो ललिता देवी ने अपने आप को मंदिर में बंद कर लिया है और आज उसे पूरे 24 वर्ष हो गए हैं. यहां तक कि वे बाहर भी नहीं निकलती और लोग उस मंदिर की पूजा करने लगे हैं चलिए डालते हैं एक नजर आज के इस लेख पर कहां जाता है बिना देवी देवताओं के एक मंदिर में ललिता ने अपने आप को बंद कर दिया है इस बात को पूरे 24 वर्ष हो गए हैं सोशल मीडिया द्वारा मिली जानकारी के अनुसार आपको बता दें ललिता के मन में छोटी सी उम्र में इतनी ललक पैदा हुई उन्होंने अपने आप को भगवान को समर्पित कर दिया और कहां जाता है.

ललिता ने अपने आपको जिस मंदिर में बंद कर लिया है वे मंदिर चंबल के बीहड़ों में मौजूद है जो कि एक छोटा सा गांव रानी पुरा मैं है ललिता के बारे में मिली जानकारी से पता चलता है कि जब से उन्होंने अपने आप को मंदिर में बंद कर लिया है वे किसी से बात नहीं करती हैं इस बारे में उनके माता-पिता भी कुछ नहीं कहते ललिता के बारे में मिली जानकारी के द्वारा आपको बता दें सन 1997 में गांव में एक धार्मिक आयोजन हुआ कहा जाता है आयोजन में गांव के गांव के सैकड़ों लोग मौजूद थे.

उन्हीं लोगों में एक ललिता भी थी कहा जाता है ललिता ने पूरे 8 दिन तक व्रत रखा अब बस यही से उसका जीवन बदल गया और इन व्रत को रखने के बाद ललिता के मन में वैराग्य उत्पन्न हो गया और उसने संसार का मोहभंग कर लिया खुद को भगवान के प्रति समर्पित करने का सोच लिया और बस जिस जगह वे बैठी थी वहीं बैठी रह गई लोगों के बहुत कहने पर भी मैं वहां से उठने को तैयार ना हुई फिर बहुत सब के कहने पर मैं उस जगह से उठकर दूसरी जगह पर बैठ गई निश्चय कर लिया कि वे अब यही रहेगी यही उसका जीवन है आपको बता दें ललिता के परिवार में इतना धार्मिक कोई भी नहीं था इस हद तक जाता.


कहां जाता है ललिता के पिता इटावा पुलिस में थानेदार थे ललिता के परिवार में उनकी तीन बहनें और एक भाई दे जिनकी शादियां हो गई है सोशल मीडिया द्वारा मिली जानकारी के अनुसार ललिता के जीवन में भगवान के प्रति इतनी लालसा और भावना देखकर परिवार वालों ने वही एक निजी मंदिर बनवा दिया कहां जाता है इस मंदिर में बस ललिता देवी रहती है उनके लिए एक शयन कक्ष भी बनवाया गया है जहां वे आराम करती हैं यहां पर श्रद्धालुओं द्वारा भोग भी लगाया जाता है और लोग दूर-दराज से पूजा अर्चना करने यहां आते हैं और मन्नत पूरी होने पर चढ़ावे चढ़ाते हैं ।

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