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एक भाई वकील, दूसरा क्रिकेटर, MA पढ़ी उनकी बहन, तीनों 10 साल से एक कमरे में बंद थे, NGO ने निकाला..

दूसरी बार हम लाइफ में ऐसा कुछ सुनते हैं जिसको सुनकर यकीन करना बहुत मुश्किल होता है आज हमारा देश एक विकासशील देश में आता है और तेजी से विज्ञान भी तरक्की कर रहा है. पर दूसरी तरफ कई बार ऐसी चीजें देखने और सुनने को मिल जाती है जिसके बाद हमें इन बातों पर विश्वास करने में कठिनाई होती है परंतु भारत में कई जगह आज भी अंधविश्वास देखने को मिल जाता है. हाल ही में एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिसमें एक परिवार कई सालों से एक ही कमरे में बंद था, इससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि यह सभी काफी पढ़े लिखे हुए हैं फिर भी इन की ऐसी हालत के पीछे क्या कारण है आइए जानते हैं.?

गुजरात के राजकोट से ये चौंकाने वाली ख़बर आई है. यहां एक ही परिवार के दो भाई और एक बहन ने 10 साल बाद घर से बाहर की दुनिया को देख पाए. ये लोग पिछले एक दशक से अपने ही घर में बंद थे. इनके पिता रिटायर कर्मचारी है, इनका घर राजकोट का पॉश इलाका माने जाने वाले किसानपरा में है.और तीनों ने अच्छी पढ़ाई कर रखी हैं.27 दिसंबर की सुबह इन तीनों के लिए उम्मीद की एक नई रोशनी लेकर आई जब स्वयं सेवी संस्थान के कुछ लोगों को इनके बारे में पता चला किसान पर रात में दो भाई और एक बहन घर में पिछले 10 सालों से बंद है इसके बाद संस्था के कुछ लोगों ने बिना देर किए इनके घर पहुंचे और दरवाजा तोड़कर उन्हें बाहर निकाला घर में काफी जगह गंदगी पड़ी हुई थी कचरा बिखरा हुआ था, हम तीनों की हालत देखकर हर कोई हैरान हो गया जब दरवाजा तोड़ा तो तीनों जमीन पर सो रहे थे बाल बड़े हुए थे और शरीर सिर्फ हड्डियों का ढांचा दिख रहा था अधिकारियों ने इन्हें नए कपड़े दिए और उनके बाल भी बनवाए!

नवीन भाई न बताया कि मेरे तीनों बच्चे पिछले 6 साल से इसी हालात में घर के अंदर रह रहे हैं. मैं इन्हें खाना पहुंचाता रहा हूं. नवीन का दावा है कि कई जब से उनकी पत्नी की मौत हुई, उसके बाद से ही बच्चों ने घर से निकलना कम कर दिया था. धीरे-धीरे सभी घर में ही रहने लगे. माना जा रहा है कि नवीन अंधश्रद्धा में यकीन रखते हैं. उन्हें अपने बच्चों पर काला जादू के असर की आशंका थी. धीरे-धीरे बच्चों ने घर से बाहर निकलना बंद कर दिया.


लोग हैरत में है कि आखिरकार ऐसा क्यों हुआ क्या अपने पिता के अंधविश्वास के चलते इन बच्चों की ऐसी हालत हुई है, इन तीनो में से एक ने सबसे बड़े बेटे अंबरीश ने वकालत कर रखी है जो की प्रैक्टिस भी करता था, बेटी ने बेटी मेधा ने राजकोट के कणसागरा कॉलेज से साइकॉलोजी में एम.ए की पढ़ाई कर रखी है. छोटे बेटे भावेश को लेकर उन्होंने बताया है कि वह ग्रेजुएट है और राजकोट में खेली जाने वाली नाइट क्रिकेट का आयोजक हुआ करता था!

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