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गाँव में साधारण जिंदगी जीने वाली अनु मेहनत और लगन से अब बन गई आईएएस अफसर ,जुनून हो तो अनु जैसा

यह कहते हैं कि अगर हमें किसी लक्ष्य को प्राप्त करना है तो हमें अवश्य ही कठिन परिश्रम करना चाहिए अपने लगन मेहनत और कठिन परिश्रम के कारण अगर हमारे भाग्य में लिखा है तो हम उस सफलता को जरूर पहुंच सकते हैं. जिस लक्ष्य को हम पाना चाहते हैं. आज हम आपसे गांव की एक साधारण सी लड़की जो आईएएस बनी है जिस पर आज उसके गांव वासियों और उसके परिवार वालों को काफी ज्यादा गौरव गौरव महसूस करते हैं.

आपको बताने 18 नवंबर 1986 को अनु का जन्म एक साधारण से परिवार में हुआ था. इससे पहले अनु की एक बड़ी बहन भी है अनु अपने घर में दूसरी बेटी का जन्म हुआ था.मगर बेटी एक ही बेटू के पैदा होने पर घर में तब भी दुखों का माहौल होता है और दूसरी बेटी पैदा हो जाए तो इस संसार के लोगों की रीत है कि मातम मनाते हैं.मगर अनु के घर पर ऐसा माहौल नहीं था.अनु ने बताया उनके परिवार में उनके पिता अपनी बेटियों से काफी प्यार करते हैं.उनके विचार अपनी बेटियों के बारे में ऐसे नहीं हैं. लेकिन अब हमारे इस संसार में बेटा बेटी के जन्म को लेकर यह भेदभाव कम हो रहा है और लोगों की मानसिकता बदल रही हैं.वह बेटे, बेटी में अंतर की भावना को कम कर कर अपनी बेटियों को सम्मान आदर देने में तत्पर रहते हैं. तीस पैतीस वर्ष की बात की जाए तो हर कोई जानता है महसूस कर सकता है कि तब लड़का लड़की में भेदभाव कितना ज्यादा देखा जाता था और बेटों के खातिर बेटियों को ही दोषी ठहराया जाता था. बेटियों को मार दिया जाता था अजन्मी कितनी ही बेटियों को मार दिया जाता था.

 

अनु का जन्म ग्रामीण परिवेश में हुआ जिस कारण गांव में जिंदगी होती है वैसे ही अनु की जिंदगी भी रही. घर में भैंसों का होना और उनको पालना उनकी गोबर उपले बनाना आदि चीजें अनु को करनी पड़ती थी. इन सब के बीच हो काम से समय निकालकर अपने लिए पढ़ाई करती थी और पढ़ाई में काफी अच्छी थी शुरू से. अनु के पिता एक प्राइवेट कंपनी में मामूली से काम करते थे. उनकी मां घर के घरेलू महिलाओं की तरह हरियाणा की औरतें जैसे काम करती हैं वैसे ही भैंस पालती है खेतों का काम इस प्रकार से उनकी मां कार्य करती हैं जो हरियाणा में औरतों के लिए माहौल है. अनु की मां ने बताया जैसे लड़कियों को शौक होते हैं सजना सवरना नेल पॉलिश लगाना इस प्रकार के शौक अनु को बचपन से नहीं थे.उसका सजने संवरने में कोई ध्यान ना था.अनु का ध्यान सिर्फ पढ़ाई पर ही रहता था. उसने बहुत सी लड़कियों की तरह कभी भी इस प्रकार की ज़िद नहीं की ब्यूटी पार्लर जाना है यह सहेलियों के साथ चीजों को खरीदना है.अनु बस कुछ करने बनने का और पढ़ने का ही एक शौक रहा. इस शौक को पूरा करने के लिए परिवार ने भी अनु का सहयोग किया.

उन्होंने बताया 12 कक्षा के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी हिंदू कॉलेज में बीएससी में एडमिशन लिया. मगर यहां पर उन्होंने यह समस्या देखी अंग्रेजी को सही रूप से नहीं बोल पाती थी अनु. उन्होंने बताया मैंने ठान लिया कि उन्हें अंग्रेजी की जो भी समस्या है उसको वह ठीक करेंगे इसके पश्चात उन्होंने अपना पूरा ध्यान अंग्रेजी भाषा पर केंद्रित कर दिया कुछ समय बाद इसी  जुनून की हद में अनु शानदार अंग्रेजी बोलने लगी.अंग्रेजी भाषा से कोई समस्या नहीं है अब.दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने के बाद अनु आईएमटी नागपुर से एमबीए की पढ़ाई कर रही हैं. 21 वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली नौकरी की पहली नौकरी  आईसीआई बैंक मुंबई में लग गई. अनु ने अपना सफर हरियाणा सोनीपत से शुरू किया था फिर दिल्ली और उसके बाद मुंबई आ गई अनु अब नौकरी करने के लिए मुंबई चली गई थी. लेकिन उन्होंने बताया मुंबई का अपना एक ही लाइफ स्टाइल है वहां पर लोग काफी फैशन करते हैं. अनु एक साधारण सी लड़की थी जब अपने ऑफिस में जाती थी तो बिल्कुल साधारण तरीके से जाती थी किसी प्रकार का फैशन नहीं करती इस प्रकार के कपड़ों का प्रयोग नहीं करते थे जो फैशन के हैं इन्हीं चीजों को लेकर उनके ऑफिस में काम करने वाले साथी उनका मजाक उड़ाते थे.कितनी साधारण सी दिखने वाली लड़की इस प्रकार से ऑफिस में आती है.लेकिन इन सब चीजों पर ध्यान नहीं देती थी.अनु अपने काम पर ही मन लगाकर के ध्यान केंद्रित रखते थी.

आपको बता दे नौकरी छोड़ना अनु के लिए आसान नहीं था क्योंकि उस समय आईएएस बनने का फैसला लिया था अनु इसकी तैयारी में वह लग गई उससे पहले अनु को 20 लाख के पैकेज पर नौकरी कर रही थी. उन्होंने बताया उनके भाई ने लगातार कहा कि उन्हें आईएएस की तैयारी करनी चाहिए.वह काम कर सकती हैं. रिश्तेदारों ने कहा इसलिए अनु ने कोशिश की और उनकी मौसी ने गांव पुरखास में रहने वाली ने कहा हो सकता है नौकरी छोड़ने के बाद तुम अपने ससुराल में पढ़ाई सही से ना कर पाओ तो इसलिए हमारे पास आकर रहना शुरू कर दो जहां पर तुम मन लगाकर अपना ध्यान पढ़ाई में लगा सकती हो.और सोनीपत के गांव पुरखास में अनु आ गई. पढ़ाई करने गांव में इतनी सुविधाएं नहीं होती सीमित सुविधाओं के चलते उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी कोचिंग नहीं लि खुद से पढ़ाई करके आज आईएएस की डिग्री हासिल की.उनकी मौसी बहुत ज्यादा उनकी मदद करती थी वहां पर रहकर मौसी के यहां सारी तैयारी की पढ़ाई की सब चीजें मौसी ने उपलब्ध कराई यहां तक कि ध्यान रखती थी कि कोई उन्हें परेशान ना करें पढ़ने में. 1 दिन उनकी मेहनत रंग लाई जिसका सपना अनु ने देखा था और अनु आईएएस के परिणाम घोषित होने को थे और जब परिणाम सामने आया तब उन्होंने दूसरी रैंक प्राप्त की.अनु उनका परिवार सफलता से और अनु बहुत ज्यादा खुश हैं. हम कह सकते हैं कितनी ही कठिनाइयां आए जीवन में सब कठिनाइयों का सामना डट कर करना चाहिए और अपने लक्ष्य को केंद्रित रखकर अपने  लक्ष्य के लिए बढ़ते रहना चाहिए.जीत अवश्य ही मिलती है और अनु के इस कठिन परिश्रम कठिन रास्तों से गुजर कर इस मुकाम तक पहुंचना दूसरों के लिए भी प्रेरणादायक है.

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