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बुजुर्ग के साथ बीच सड़क पर बैठे दिखे IAS अफसर ,लोग कर रहे है तारीफ

सोशल मीडिया पर आए दिन तरह-तरह के वीडियोज और फोटोज वायरल होते रहते हैं. इन दिनों भी आईएएस अधिकारी का एक पोस्ट तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वायरल हो रहे पोस्ट में तीन फोटोज हैं. इन तीनों फोटोज में एक आईएएस अधिकारी जमीन पर बैठा नजर आता है.फोटोज में देख सकते हैं कि अधिकारी एक बुजुर्ग के साथ जमीन पर बैठे नजर आते हैं. आईएएस अधिकारी को गांव के बुजुर्ग के साथ जमीन पर बैठकर ठहाका लगाते देखना वाकई बेहद शानदार है. इन तीनों फोटोज को किसी और ने नहीं बल्कि खुद आईएएस अधिकारी ने शेयर किया है.

आईएएस अधिकारी की सादगी के फैन हुए लोग
IAS रमेश घोलप ने ट्विटर पर अपनी तस्वीरें शेयर की तो लोग उनकी सादगी के फैन हो गए.इन तस्वीरों में वह अपनी इनोवा कार से बाहर एक बुजुर्ग के साथ जमीन पर बैठे बतिया रहे हैं, जबकि उनके बॉडीगार्ड कार में बैठे दोनों को देख रहे हैं. आईएएस की इसी सादगी लोगों का दिल जीत लिया है और उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है.आईएएस रमेश घोलप ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘तज़ुर्बा है मेरा मिट्टी की पकड़ मजबूत होती है, संगमरमर पर तो हमने पांव फिसलते देखे हैं.’ उनके इस ट्वीट को न्यूज लिखे जाने तक ढाई हजार से अधिक लाइक्स और 170 से ज्यादा रीट्वीट मिल चुके हैं.

रमेश के पिताजी अपनी पंक्चर की दुकान से 4 लोगों के परिवार का जैसे-तैसे गुजर-बसर करते थे। लेकिन उनकी तबीयत खराब होने के बाद परिवार का गुजर-बसर करने के लिए मां ने आसपास के गांवों में चूड़ियां बेचना शुरू किया। रमेश भी इस काम में मां की मदद करते थे.लेकिन किस्मत को शायद उनकी और परीक्षा लेनी थी, इसी दौरान रमेश का बाएं पैर में पोलियो हो गया.

रमेश के गांव में पढ़ाई के लिए केवल एक ही प्राइमरी स्कूल था.रमेश को आगे की पढ़ाई करने के लिए उनके चाचा के पास बरसी भेज दिया गया.पढ़ाई के प्रति उनकी मेहनत ने स्कूल में उन्हें शिक्षकों का प्रिय बना दिया.साल 2005 में जब वो बारहवीं क्लास की परीक्षा दे रहे थे उसी समय उन्हें उनके पिता के निधन की खबर मिली थी.बाद में रमेश घोलप ने इस परीक्षा में 88.5 प्रतिशत अंक हासिल किये थे.रमेश ने डी.एड किया ताकि वे शिक्षक बन सके और अपने परिवार की आर्थिक मदद कर सकें.साल 2009 में वे बतौर शिक्षक काम करने लगे थ.शिक्षक की नौकरी करते हुए उन्होंने UPSC की तैयारी का मन बनाया.

रमेश घोलप महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के वारसी तहसील के महागांव के रहने वाले हैं.उनके पिता साइकिल रिपेयरिंग की दुकान चलाते थे.उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी.कड़ी मेहनत कर उन्होंने परिवार को भी संभाला और तैयारी कर 2010 में यूपीएससी की परीक्षा दी.हालांकि, वह सफल नहीं हुए.लेकिन 2011 में उन्होंने ऑल इंडिया 287 रैंक के साथ UPSC की परीक्षा पास कर अधिकारी बन गए.

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