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इस नदी में अचानक आई कछुओं की सुनामी, जीव वैज्ञानिक हुए हैरान, जाने क्या है इसका रहस्य

हम अक्सर न्यूज में सुनते है कि कहीं सुनामी आई है.सुनामी का मतलब है तेज पानी की धारा ओर उसके साथ हवा का झोका.सुनामी से बहुत अधिक त्रासदी होती है.सुनामी जिस जगह आती है वहा गांव ओर शहर पूरे तहस नहस हो जाते है.त्रासदी इतनी खतरनाक होती है कि मानव जीवन को बचाना भी मुश्किल होता है.सामान्यत सुनामी समुंद्री किनारों पर आती है.सुनामी की त्रसदी से पशु पक्षी भी इसका शिकार हो जाते है.21वी सदी की सबसे वाहवाह सुनामी 2004 में आई थी.जिसमे लगभग 2 लाख से अधिक लोग की जान गई थी.इस सुनामी से भारत के तटीय राज्यो में भारी नुकसान उठाना पड़ा था.यह सुनामी बड़े बड़े देश के वैज्ञानिकों के लिए चुनौती बन गई थी.आज आपको एक अलग प्रकार की सुनामी के बारे में बताएंगे.यह सुनामी कछुओं की सुनामी है.सुन ने में अजीब लगा ना अपने सही सुना कछुओ की सुनामी आई है


ब्राजील में.चलिए आपको इसके बारे पूरा बताते है.ब्राजिल की नदी किनारे चारो ओर कछुए ही दिख रहे है.मानो सुनामी आ गई है.रेत के तट पर सिर्फ कछुए ही नजर आ रहे है.नदी की लहर दिखा रही है कि कछुओं की सुनामी आ गई है.मामला दक्षिण अमेरिकी देश ब्राजील का है.कछुओं की सुनामी की जानकारी ब्राजील द वाइल्ड लाइफ कंजरवेशन सोसायटी ने दी. उनके द्वारा ढेर सारे कछुओं की तस्वीरे ओर वीडियो अपने ट्विटर अकाउंट में अपलोड किए.वाइल्ड लाइफ कंजरवेशन सोसायटी ब्राजील की एक संस्था है जो लुप्त हो रही प्रजातियों के संरक्षण के लिए कदम उठाती है.तसवीर में दिख रहे सैकड़ों कछुए जायंट साउथ अमेरिकन रिवर कछुए की प्रजाति है.प्रजनन काल में यह प्रजाति 80 से 90 अंडे देती है.कछुए जब अंडे से बाहर आए तो वो सीधे तट की ओर भागे जिस से ऐसा लगा कि कछुओं की सुनामी आ गई हो.

यह घटना ब्राजील की पोरस नदी की है.जो अमेजॉन नदी की सहायक नदी है.रिसर्च के अनुसार इस प्रजाति के कछुए सर्वाधिक यही पाए जाते है.तकरीबन अनुमान लगाया जा रहा है कि 92 हजार से अधिक कछुओं के बच्चे थे.कछुओं की विलुप्त हो रही प्रजाति के लिए इतने बच्चो का जन्म बहुत खुशियों की बात है.कहा जा रहा काफी समय बाद इतने बच्चे एक साथ देखे गए थे.कछुओं की प्रजाति के लिए कई प्रयास किए जा रहे है.

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