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मेजर संदीप उन्नीकृष्णन को फौज में नहीं भेजना चाहते थे उनके पिता,पर बेटे की जिद के आगे एक ना चली…..

यह भारत है यहां पर लोकतंत्र है और यहां पर हर किसी को स्कूल जाने की भी आजादी है.यह शब्द है उस पिता के जिसने एक आतंकी हमले में अपने इकलौते बेटे को खो दिया.हम आज बात करेंगे के उन्नीकृष्णन की जो कि 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले में शहीद हो गए थे. मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के पिता है मेजर संदीप कहते हैं.उन्नीकृष्ण की शहादत को एक दशक बीत गया है.

लेकिन देश के लोगों के दिलों में उस नौजवान की तस्वीर आज भी ताजा है. उस नौजवान ने आतंकियों के चुंगल से बंधको को छुड़ाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी थी. देश के इस नौजवान और होनहार की जिंदगी को करीब से जानने के लिए सुपरस्टार अदिति शेष ने एक फिल्म भी बनाई है.

इस फिल्म का नाम है मेजर.मेजर फिल्म का टीजर आज लांच किया गया है.इस टीजर में संदीप की शहादत को नहीं बल्कि उनकी जिंदगी के उन लम्हों को दिखाया गया है.जो उन्होंने अपने 31 साल के जीवन में जिए हैं. क्या आप जानते हैं कि मेजर संदीप के पिता नहीं चाहते थे कि उनका इकलौता बेटा संदीप भारतीय सेना मैं जाए.

एक चैनल इंटरव्यू के दौरान मेजर संदीप के पिता के उन्नीकृष्णन ने बताया था कि वह अपने बेटे को भारतीय सेना में भर्ती नहीं होने देना चाहते थे. परंतु संदीप का सपना था कि वह सेना में शामिल हो और देश की सुरक्षा एवं रक्षा में अपना योगदान दें. के उन्नीकृष्णन ने बताया था कि मेजर संदीप आठवीं क्लास में था जब से ही सेना में भर्ती होने का शौक था. उनके माता-पिता दोनों ने ही उन्हें भारतीय सेना में जाने से रोकने की बहुत पुरजोर कोशिश की. लेकिन वे संदीप को मनाने में असफल रहे.

 

मेजर संदीप का बचपन से ही सपना था.संदीप के सपनों को आगे उनके माता-पिता की एक न चली और भारतीय सेना में शामिल होने के लिए चले गए.मेजर संदीप के पिता ने इंटरव्यू में कहा था कि वह अपने बेटे को उस शख्स के रूप में याद करते हैं उनका कहना है कि उनका बेटा राजनीति के चलते बलि का बकरा बना.उन्होंने बताया कि जब उन्हें संदीप के शहीद होने की खबर मिली.तो वे मुंबई ताज होटल में पहुंचे. वहां उन्होंने मेजर संदीप के बारे में सुरक्षाबलों से पूछताछ की तो उधर से उन्हें जवाब मिला कौन है यह संदीप.यह सुनकर मेजर संदीप के पिता की आंखों में आंसू आ गए और काफी दुख हुआ. मेजर संदीप के पिता ने यह भी बताया कि किसी ने उन्हें यह नहीं बताया कि आखिर संदीप कैसे शहीद हुए और उन्हें कैसे और कितनी गोली लगी. संदीप की मां अपने बेटे को आखरी बार देखना चाहती थी लेकिन उनका शव पूरा कवर किया गया था. वह यह तक नहीं देख पाए कि उनके बेटे को कितनी चोट लगी है.

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