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नौकरी जाने के बाद भी युवक ने नहीं मानी हार ,छाए की टापरी खोल कमा रहा है लाखों में

कहते हैं किस्मत वक़्त के साथ पल्टी मारती है तो कुछ कह नहीं सकते कब हमारा समय बुरा आ जाए और उस बुरे वक्त से हार नहीं माननी चाहिए  निरंतर प्रयास करते रहने के बाद वैसे ही सफलता मिलती है. आपकी मेहनत अपना रंग दिखाती है. हम बात कर रहे हैं पुणे के रहने वाले रेवन शिंदे की जिन्होंने काफी मुश्किलों का सामना करने के बाद सफलता आखिर पाहिली. इनका नाम अभिमन्यु है सफलता की आज हम आपसे इनके जीवन में आगे बढ़ने की कहानी पर चर्चा करेंगे.आपको बता दें रेवन 12th तक की पढ़ाई पूरी कर कर नौकरी के सिलसिले में परिवार के साथ पुणे आ गए थे इसके बाद उन्होंने पिंपरी चिंचवाड छेत्र में एक लॉजिस्टिक कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर नौकरी कर ली.

वहां उन्हें 12 से ₹13 हज़ार प्रति महीने सैलरी मिल जाती थी. इसलिए अपने घर परिवार के खर्चों को पूरा करने के लिए बहुत कम थी लेकिन गरीबी के इस हालात में जैसे-तैसे कर कर वो अपना घर चलाते थे. रेवन ने बताया कम सैलरी में उनको काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था. इसके बाद हालात कुछ ऐसे थे कि सन् 2019 के आखिरी महीने दिसंबर में वह लॉजिस्टिक कंपनी बंद हो गई.इस कारण से उनकी नौकरी चली गई. अब उनके पास चुनौती भरा समय था.उन्होंने अपनी जरूरतों के लिए नाश्ते की दुकानों पर काम किया वहां काम करते करते हैं उन्हें एक विचार आया क्यों ना वो खुद का एक चाय की टपरी खोल दें. हम सब जानते हैं चाय का बिजनेस एक ऐसा बिजनेस है जहाँ काफी कमाया जा सकता है.

बस बात है आप की चाय की गुणवत्ता की वह कितने मज़ेदार होगी की भीड़ लग जाती है. वहां से अपने इस आईडिया को पूरा करने के लिए पिंपरी क्षेत्र में मार्च महीने में एक चाय की टपरी खोल दी चाय की बिकने के लिएजरूरत थी ग्राहकों की इसलिए उन्होंने शुरू में लोगों को फ्री चाय बनाना शुरू कर दिया जब फ्री चाय लोगों को पिलाने लगे थे उनसे जुड़ गए लोग इस दौरान करोना के कारण से लॉक डाउन चल रहा था धीरे धीरे कर रेवन अपनी बची हुई राशि को खर्च कर चुके थे. उनकी चाय मशहूर हो चुकी थी और लोग उनकी चाय के दीवाने हो गए धीरे-धीरे व्यवसाय उनका चल पड़ा और 5 कर्मचारी भी रखिए रेवन ने.

रेवन को गरम चाय के लिए कॉल आने लगे वह गर्म चाय की डिलीवरी करने लगे. इस छोटे से व्यवसाय की डिमांड के अनुसार चाय के अलावा काफी गर्म दूध को भी मिला लिया गया जिसमें लोगों के आर्डर करने में आसानी हो गई.चाय के छोटे कद की रेट 6 रुपए बड़े कप की ₹10 के 6 महीने में उन्होंने अपने क्षेत्र में 700 तक चाय की बिक्री शुरू कर दी.उन्हें दो हजार के करीब प्रतिदिन मुनाफा होने लगा.

देखते ही देखते चाय का कारोबार दो हज़ार तक का होने लगा. लगभग ₹50 हज़ार तक का मुनाफा हुआ छोटे से बिजनेस से आज रेवन सफल जीवन जी रहे हैं.कहते हैं कोई काम छोटा और बड़ा नहीं होता सिर्फ मेहनत और लगन से किया हुआ कार्य अवश्य ही सफलता देता है.

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