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MP: न पंडित, न मंत्र और हो गई शादी, दूल्‍हे ने कहा- ‘मैं भारत के संविधान की शपथ लेता हूं कि

दित्य विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद जुलाई 1945 में ब्रिटेन ने भारत संबन्धी अपनी नई नीति की घोषणा की तथा भारत की संविधान सभा के निर्माण के लिए एक कैबिनेट मिशन भारत भेजा जिसमें 3 मंत्री थे.15 अगस्त 1947 को भारत के आज़ाद हो जाने के बाद संविधान सभा की घोषणा हुई और इसने अपना कार्य 9 दिसम्बर 1947 से आरम्भ कर दिया.संविधान सभा के सदस्य भारत के राज्यों की सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के द्वारा चुने गए थे.जवाहरलाल नेहरू, डॉ भीमराव अम्बेडकर,डॉ राजेन्द्र प्रसाद,सरदार वल्लभ भाई पटेल,मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे.


इस संविधान सभा ने 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन में कुल 114 दिन बहस की.संविधान सभा में कुल 12 अधिवेशन किए तथा अंतिम दिन 284 सदस्यों ने इस पर हस्ताक्षर किया और संविधान बनने में 166 दिन बैठक की गई इसकी बैठकों में प्रेस और जनता को भाग लेने की स्वतन्त्रता थी.भारत के संविधान के निर्माण में संविधान सभा के सभी 389 सदस्यो ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई,26 नवम्बर 1949 को सविधान सभा ने पारित कियाऔर इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था.इस सविधान में सर्वाधिक प्रभाव भारत शासन अधिनियम 1935 का है.इस में लगभग 250 अनुच्छेद इस अधिनियम से लिये गए हैं.

दोस्तों भारतीय संविधान की रूप रेखा हमारे बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर जी ने की और सम्पूर्ण रूप से सभी वर्गों का ख्याल रखते हुवे इसका निर्माण हुआ.दोस्तों आज देश के कई हिस्सों में इनको कई वर्गों के लोग मानते है.इनके बताये गए आदर्शो की पलना करते है.इसी तरह दोस्तों देश में कई ऐसे किस्से हुवे है हमें ये देखने को मिला की कई लोग भारतीय संविधान को साक्षी मानकर शादी कर ली है,

मध्य प्रदेश के सीहोर में अग्नि नहीं, बल्कि बाबा साहेब अंबेडकर की फोटो को साक्षी मानकर वर-वधु ने सात फेरे लिए. न मंगलसूत्र था और ना ही मांग में सिंदूर भरा गया, संविधान की शपथ लेकर नव दंपति एक दूजे के हो गए. वर-वधु ने एक दूजे को माला पहनाई, जिसके बाद दोनों को संविधान की प्रस्तावना की शपथ दिलाई गई.मध्य प्रदेश के सीहोर में मालवीय समाज के ग्राम मुल्लानी के दीपक मालवीय की शादी शाजापुर के लसूड़िया गौरी की रहने वाली आरती मालवीय के साथ हुई.इस शादी में मंत्रोच्चारण की आवाजें नहीं, बल्कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना की शपथ सुनाई दी.3/7वर-वधु ने पहले संविधान निर्माता डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर के ​फोटो पर माल्यार्पण किया. इसके बाद वर-वधु ने एक दूसरे को वरमाला पहनाई और भारतीय संविधान की प्रस्तावना का वाचनकर शपथ दिलवाई गई.

4/7संविधान और डॉ. आंबेडकर के चित्र के समक्ष फेरे लेकर वैवाहिक जीवन की सामाजिक जिम्मेदारियों के निर्वहन का वचन लिया और विवाह बंधन में बंध गए. इस मौके पर मौजूद दोनों परिवार के लोगों ने दूल्हा और दुल्हन को आर्शीवाद दिया.5/7शहर के नदी चौराहा स्थित मालवीय समाज के मंदिर में यह विवाह संपन्न हुआ, जिसमें वर-वधु की ओर से 10 से 15 लोग ही शामिल हुए और सभी ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया.दूल्हे दीपक मालवीय ने बताया कि आज हमें गर्व हो रहा है. हमारे संविधान निर्माता बाबा साहब के चित्र के समक्ष फेरे लेकर विवाह हुआ है. समाज के लोग इसी तरह आगे आएं और शादी करें

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