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मंदिर देता है दिन में 2 बार दर्शन, मांगता है इस बात की माफी, फिर वापस लील लेता इसको समंदर !

भारत भूमि की देव भूमि कहना गलत नहीं होगा.दुनिया के प्राचीन से प्राचीन मंदिर आज भारत की धरती पर है.इन मंदिरो से अनेक लोक कथाएं ओर वाचनाए जुड़ी है.मंदिरो के मामले में भारत का कोई सानी नहीं है.भारत की भूमि पर हजारों वर्ष पुराने मंदिर भी है.उन मंदिरो विष्णु भगवान,शिव भगवान,कृष्ण भगवान आदि मुख्यत मंदिर है.भारतभूमि देवो की भूमि होने से यहां चमत्कार वाले मंदिर भी है.हिंदू धर्म के अनुयाई द्वारा अपने मनोकामना के लिए मंदिर की पूजा अर्चना आदि करने से उनकी मनोकामना पूर्ण होती है.भारत में चमत्कारिक मंदिरो की कई कथाएं सुनते आ रहे है.

भगवान उन कथाओं में अपने चाहने वाले श्रद्धालु को अपनी दिव्य शक्ति से रक्षा करते है.आज भारत में विद्यमान मंदिर अपनी वास्तुकला और कलात्मक विद्या के रूप में विकसित है.आज हम आपको भगवान शिव का मंदिर के बारे बताएंगे.भगवान शिव को देवो का देव कहा जाता है.भगवान शिव सभी सृष्टि किए रचनाकार माने जाते है.हिन्दू पुराणों के अनुसार भगवान शिव की शरण स्थली हिमालय पर्वत है.वही से को पूरे ब्रह्मांड को चलाते है.आज हम जिस मदिर की बात कर रहे है वो चमत्कारी मंदिर है.भगवान शिव दिन में 2 बार समुंदर में शमा जाते है लेकिन जब श्रद्धालु को दर्शन देने के लिए पुन आ जाते है.यह मंदिर की स्टमभेश्वर महादेव मंदिर कहलाता है.इस मंदिर की स्तिथि अरब सागर में गुजरात के केंबे तट पर है.

यह मंदिर अपनी चमत्कार वाली शक्ति के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है.इस मंदिर की स्थापना को लेकर शिवपुराण में इसका जिक्र आया है.भगवान शिव की आराधना करने के पश्चात एक असुर की वरदान मिला की उसे शिव पुत्र वो भी 6 दिन का होने पर ही कोई मार सकता है अन्यथा वो अमर है.वो असुर ताड़कासुर था.उसने वरदान पाकर तीनो लोको में कोहराम मचाया.देव मुनि को बंधी बना दिया गया.उसका आतंक देखकर सारे देव भगवान शिव से गुहार लगाई उनको वध करने का कुछ उपाय सुझाए.इस पर भगवान शिव के पर्वत से एक बालक उत्पन होता है जिसकी 4 आंख,6 मस्तिष्क ,12 हाथ होते है.यह बालक अपने अदम्य साहस और भगवान शिव के आशीर्वाद से ताड़कासुर का वध कर देता है.

भगवान शिव को खुश करने के लिए कार्तिकेय ने भगवान विष्णु उपाय मांगा था तो भगवान विष्णु ने एक शिवलिंग स्थापित करने की सलाह दी.कार्तिकेय ने इसी जगह शिवलिंग स्थापित कर पूजा अर्चना करते ओर भगवान शिव से माफी मांगते थे.भगवान शिव का यह शिवलिंग 4 फुट ऊंचा है एवं 2 फुट व्यास का है.इसके उपर बना मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए फेमस है.यहां पीछे अरब सागर है को मंदिर की सुंदरता को चार चांद लगा देता है ।

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