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9 साल का आशीष कबाड़ बिन कर बना अंधे माँ बाप का सहारा ,वीडियो देख आँखे हो जाएँगी नम

अंधे मां बाप पर जान कुर्बान करने वाले श्रवण कुमार की कथा तो सब को पता है।मगर कानपुर के जवाहर नगर में रहने वाले 9 वर्ष के मासूम आशीष की स्थति भी कुछ इसी तरह की है, जो अपने अंधे पिता की नौकरी जाने के बाद अपने अंधे मां-बाप का छोटा श्रवण बनकर परिवार की पैसो की तंगी को दूर करने का साहस उठा रहा है,

कलयुग में नन्हे श्रवण कुमार ने दोहराई सतयुग की कहानी…

इस कलुयग में इस बच्चे ने इतना बड़ा बीड़ा उठया है की कोई बड़ा भी नहीं उठा सकता, इस नन्हे बच्चे के पिता एक नेहरू नगर स्थित अंध विद्यालय में काम करते थे लेकिन अपनी मनमानी के चलते उस स्कूल के प्राचार्य ने इस नन्हें श्रवण कुमार के परिवार की खुशियां उसके पिता की नौकरी से निकालकर छीन ली.इस स्कूल के प्राचार्य इंद्रजीत से जब हमने संपर्क साधा तो उन्होंने हमसे बात करने से मना कर दिया.इंद्रजीत ने अपनी मनमानी और काम से नाखुश होकर अपने पद की पावर का प्रयोग करते हुए अंधे गोपाल नेगी को 2019 में नौकरी से निकाल दिया.

जिसके बाद यह बेबस लाचार परिवार दर-दर भटकते हुए लोगों से गुहार लगा कर अपने परिवार के लोगों की देखभाल कर रहा है.किसी से मदद तो नहीं मिली मगर या परिवार आर्थिक तंगी झेलने को मजबूर हो गया। कई दिनों तक भूखे प्यासे रहने के बाद किराए के मकान में बसर करने वाले इस अंधे परिवार का सहारा इनका 9 साल का बेटा आशीष बना। जो अपने अंधे पिता गोपाल नेगी के साथ सड़कों पर कबाड़ बीनने का काम करता है इससे प्राप्त हुवे रुपयों से अपने घर के सदस्यों के लिए भोजन का प्रबंध करता है साथ ही साथ अपने लिए पढाई की उपयोगी किताबे भी ले लेता है,

दोस्तों जैसा की आप सब जानते है की प्रदेश में 2017 से भारतीय जनता पार्टी के उच्चा कोटि के सदस्य योगी की सरकार है और मोदी-योगी सरकार ने यह वादा किया था कि किसी भी बेसहारा और दिव्यांगों के ऊपर कोई जुल्म नहीं किया जाएगा, अगर ऐसी सूचना पर कोई अधिकारी कार्यवाही नहीं करता है तो उसके ऊपर भी कार्यवाही की जाएगी। लेकिन गोपाल के केस में ऐसा कुछ होना नहीं दिखाई दे रहा है. उसके नौकरी निकाले जाने के बाद गोपाल ने कई दफ्तरों के चक्कर लगाए लेकिन उसकी बातों पर किसी ने ध्यान नहीं दिया.यहां तक की वह पुलिस के पास भी गया लेकिन उसकी किसी ने कोई मदद नहीं की पुलिस के अनुसार ये मामला सरकारी कर्मचारियों का है न की पुलिस का है,

दिव्यांगों के लिए सरकारी योजनाओं से लाभ पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं लेकिन आज भी या परिवार इन योजनाओं से वंचित रहा है।दोस्तों हो सकता है की आप के इस आर्टिकल शेयर और कमेंट करने से कोई कार्यवाही हो सके और सरकार इस बच्चे के अंधे पिता को नौकरी लौटा दे,और ये मासूम बच्चा फिर से जिम्मेदारियों के बोझ से रिहा हो सके खेल-कूद सके,अपनी पढाई पूरी कर सके,दोस्तों देखने को ये सिर्फ एक आर्टिकल है मगर आप के लिए जिम्मेदारी है की हम इसे उचित न्याय दिला सके.दोस्तों आप की सूझ बुझ से किया गया काम इन की खुशियों को छीनने वालो के लिए यम पाश का काम कर सकती है

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