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पिता चलाते थे किराने की दुकान बेटी ने मेहनत और लग्न से बानी IAS अधिकार ,पुरे गाँव का बढ़ाया मान

IAS बनने के लिए UPSC द्वारा आयोजित की जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है.हर साल लाखों की संख्या में युवा इस परीक्षा में बैठते हैं,लेकिन उनमें से 100 से भी कम लोग आईएएस बनते हैं.इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह परीक्षा कितनी कठिन होती है.तभी तो इसे पास करने वाले किसी हीरो से कम नहीं होते.आज हम आपको एक ऐसे ही हीरो से मिलवाने जा रहे हैं जिसने विपरीत परिस्थितियों में आईएएस बनने का ख्वाब बुना और उसे पूरा भी किया.हम बात कर रहे हैं IAS अफसर राधिका की.

राधिका एक ऐसे जिले से ताल्लुक रखती हैं जहां बहुत ही कम लोग शिक्षा हासिल कर पाते हैं लेकिन अपने मजबूत इरादे और सपनों को साकार करने की चाह ने उन्हें देश की सबसे कठिन परीक्षा में टॉपर बना दिया.राधिका के पिता एक किराने की दुकान चलाते हैं.राधिका से पहले उनके परिवार में किसी ने भी सिविल सर्विसेज में जाने के बारे में सोचा तक नहीं.

ऐसे में अपने सपनों को साकार करना भी किसी सपनें से कम नहीं होता है. राधिका की कहानी ऐसे युवाओं के लिए प्रेरणा हो सकती है जो मुश्किल हालतों और सुविधाओं की कमी का हवाला देकर अपने सपनों को साकार नहीं कर पाते हैं.आइए जानते हैं देश की सबसे कठिन परीक्षा में उन्होंने कैसे सफलता हासिल कर ली.

इंजीनियरिंग से स्नातक करने वाली राधिका बताती हैं कि वो एक ऐसे जिले से आती हैं, जहां की साक्षरता दर तकरीबन 36.10 फीसदी है और यही उनके लिए सबसे बड़ा प्रेरणा स्रोत भी है.भारत के सबसे कम शिक्षित जिले में रहकर उन्हें समझ आया कि शिक्षा किसी के जीवन में कितनी बड़ी भूमिका निभाती है,

इसलिए उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की.राधिका बताती हैं कि पहली बार में रैंक कम होने के कारण उन्हें UPSC सिविल सेवा परीक्षा के जरिए भारतीय रेलवे अलॉट हुआ था, लेकिन उन्हें अपने समाज के लिए कुछ बेहतर काम करना था, इसलिए हिम्मत न हारते हुए उन्होंने दोबारा कोशिश की और सफल होकर दिखाया,राधिका बताती है कि उन्होंने सबसे पहले UPSC की परीक्षा के पैटर्न को समझा. जिसके बाद उन्होंने सिलेबस पूरा करने के लिए एक टाइम टेबल तैयार किया और उसी को फॉलो करते हुए पढ़ाई की.राधिका का कहना है अक्सर लोगों को ये भ्रम होता है कि UPSC में सिलेक्शन के लिए 10-12 घंटे पढ़ाई करना जरूरी है, लेकिन ऐसा नहीं है, हर दिन 8-10 घंटे की पढ़ाई भी काफी है

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