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काशी करवट मंदिर के महंत का दावा, ‘ज्ञानवापी में शिवलिंग नहीं, फव्वारा है

वाराणसी के ज्ञानव्यापी मस्जिद में शिवलिंग मिलने की बात को लेकर बवाल मचा हुआ है. हिंदू पक्ष की ओर से मस्जिद में शिवलिंग का होने का दावा किया जा रहा है.तो वहीं मुस्लिम पक्ष इस बात को सिरे से खारिज कर रहा है.मुस्लिम पक्ष मस्जिद में शिवलिंग बात को खारिज करते हुए कह रहा है कि जिसे शिवलिंग बताया जा रहा है.दरअसल में वह एक फव्वारा है.ज्ञानव्यापी मस्जिद के सर्वे की रिपोर्ट कोर्ट में जमा हो चुकी है. सभी लोगों को कोर्ट के फैसले का इंतजार है. देखना होगा कि कोर्ट क्या फैसला सुनाता है.दोनों पक्षो की ओर से अलग-अलग दावे के बीच काशी के महंत का दावा है. काशी विश्वनाथ मंदिर के पीछे स्थित काशी करवत मंदिर के महंत गणेश शंकर उपाध्याय का कुछ अलग ही दावा है. काशी के महंत ने दावा किया है कि ज्ञानवापी में शिवलिंग नहीं है, बल्कि फव्वारा ही है. जैसा कि वह पिछले 50 सालों से देखते आ रहे हैं.

14 से 16 मई के बीच ज्ञानवापी मस्जिद में चले सर्वे की रिपोर्ट गुरुवार को सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट में दाखिल कर दी गई. कोर्ट कमिश्नर विशाल सिंह की ओर से दाखिल रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि मुस्लिम पक्ष जिसे फव्वारा कह रहा है,उसमें पाइप घुसाने की कोई जगह नहीं है.वाराणसी की जिला कोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों ने जोरदार बहस की. दोनों तरफ की दलीलें सुनकर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है.अब कोर्ट `इस पर अपना फैसला सुनाएगी. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मामले को वाराणसी कोर्ट में ही ट्रांसफर कर दिया था.

1991 में याचिकाकर्ता स्थानीय पुजारियों ने वाराणसी कोर्ट में एक याचिका दायर की. इस याचिका में याचिकाकर्ताओं ने ज्ञानवापी मस्जिद एरिया में पूजा करने की इजाजत मांगी थी. इस याचिका में कहा गया कि 16वीं सदी में औरंगजेब के आदेश पर काशी विश्वनाथ मंदिर के एक हिस्से को तोड़कर वहां मस्जिद बनवाई गई थी.काशी विश्वानाथ मंदिर का निर्माण मालवा राजघराने की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था. याचिकाकर्ताओं का दावा था कि औरंगजेब के आदेश पर मंदिर के एक हिस्से को तोड़कर वहां मस्जिद बनवाई गई. उन्होंने दावा किया कि मस्जिद परिसर में हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियां मौजूद हैं और उन्हें ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में पूजा की इजाजत दी जाए. हालांकि, 1991 के बाद से यह मुद्दा समय-समय पर उठता रहा, लेकिन कभी भी इसने इतना बड़ा रूप नहीं लिया, जितना इस समय है.

 

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कुछ इतिहासकार हिंदू संगठनों के उस दावे को सिरे से नकारते हैं, जिसमें वह औरंगजेब के आदेश पर मंदिर का हिस्सा गिराकर वहां मस्जिद बनाने का दावा करते हैं. उनका कहना है कि मुगल बादशाह अकबर ने अपने दीन-ए-इलाही धार्मिक व्यवस्था पर जागरुकता फैलाने के लिए यहां ज्ञानवापी मस्जिद और काशी विश्वनाथ मंदिर का एक साथ निर्माण करवाया था. कुछ इतिहासकार ऐसे भी हैं जो औरंगजेब द्वारा मंदिर के कुछ हिस्से को तोड़कर वहां ज्ञानवापी मस्जिद बनाने के दावे को सही ठहराते हैं.

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