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नामीबिया के चीतों को रास आया भारत, जल्द होगा नामकरण, पढ़ें कैसी चल रही है उनकी दिनचर्या

मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले के राष्ट्रीय कूनो पालपुर अभ्यारण्य में नामीबिया से लाए गए 8 चीतों को कूनो में 24 घंटे से ज्यादा समय बीत चुका है. उनकी स्थिति सामान्य है. चीतों को खाने के लिये कूनो उद्यान में भैंसे का मांस दिया जा रहा है. फिलहाल उनके बाड़ों में चीतल या दूसरे वन्यजीवों को शिकार के लिए नहीं छोड़ा जाएगा. अगले कुछ दिनों तक उन्हें इसी तरह से भैंसे का मांस ही खिलाया जाएगा. जब ये चीते यहां के माहौल में ढल जाएंगे तो फिर उनके शिकार के लिये वहां वन्यजीवों को छोड़ा जाएगा.

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राष्ट्रीय कूनो पालपुर अभ्यारण्य के डीएफओ प्रकाश वर्मा ने बताया कि सभी आठ चीते पूरी तरह से स्वस्थ हैं. उन्हें यहां के वातावरण में ढालने में अभी थोड़ा समय लगेगा. अभी उन्हें अलग-अलग छोटे-छोटे बाड़ों में क्वारंटाइन किया गया है. उन्हें अभी भैसें का ही मांस दिया जाएगा. कुछ दिन बाद जब वे कूनो के माहौल मे पूरी तरह से ढल जाएंगे उसके बाद उन्हे बड़े बाड़े मे छोड़ा जाएगा.

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डीएफओ ने बताया कि वहां वे चीतल आदि दूसरे जानवरों का शिकार कर सकेंगे. उनके व्यवहार के अनुसार उनके नाम भी आने वाले समय में कूनो वन मंडल की ओर से रखे जायेंगे. फिलहाल चीतों का दीदार करने के लिए पर्यटकों के लिए कूनो में रोक रहेगी. यह बात दीगर है कि पर्यटक उनके दीदार के लिये बेसब्र हो रहे हैं. नामीबिया के चीते शनिवार को यहां लाकर छोड़े गए हैं.

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इन चितो को करीब आठ हजार किलोमीटर की दूरी नामीबिया से हवाई मार्ग से लाया गया है. इन चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ते ही ये कुछ सहमे से नजर आए. कुछ देर बाद वे सामान्य हो पाए. भारत में चीतों को विलुप्त हो जाने के बाद यह पहली बार है कि बाहर से उनको यहां लाकर फिर से बसाने की कोशिश की जा रही है. इन आठ चीतों में से तीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में उनके नये बसेरे कूनो उद्यान में छोड़ा था. पांच को चीतों को अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने उद्यान में छोड़ा गया था.

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