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पिता की मौत के बाद भी नहीं मानी हार जीरकपुर के अर्पित बने NEET 2022 में पंजाब के टॉपर,इस तरह हासिल की सफलता

नीट परीक्षा में जी जान से मेहनत कर और अपने पिता की मौत को अपने लिए एक ऐसी चुनौती मान लेना काफी ज्यादा कठिन और बहुत चुनौतीपूर्ण कार्य है.लेकिन जीरकपुर के अर्पित नारंग ने पंजाब में नीट परीक्षा में टॉप किया है और सफलता प्राप्त कि परिवार का माता पिता का नाम रोशन किया है.

NEET 2022 Zirakpur's Arpit Narang became the Punjab topper's father's death as a challenge

NEET 2022 Zirakpur’s Arpit Narang became the Punjab topper’s father’s death as a challenge

खबरों के अनुसार नेशनल एजिबिलिटी एंड ट्रांसफर नीति 2022 में 720 अंक के पेपर में से 710 अंक प्राप्त करने के बाद पंजाब में टॉप करने वाले जीरकपुर निवासी अर्पित ने कहा सफल होने के लिए पढ़ाई के दौरान कभी तनाव को हावी न होने दें.अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां प्रीति नारंग को देते हुए कहा, ” पिता की मौत के बाद मां ने कैरियर को बनाने के लिए कभी पीछे मुड़कर देखने नहीं दिया .मां नौकरी के बाद शाम को घर लौट कर मेरे साथ बैडमिंटन खेल कर दिन भर की गई पढ़ाई से हुए इस्ट्रेस से मुक्ति करवाती थी.

NEET 2022 Zirakpur's Arpit Narang became the Punjab topper's father's death as a challenge

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हैदराबाद में अपने परिवार के साथ रह रहे अर्पित ने फोन पर बात करते हुए बताया 2020 के बाद पढ़ाई ऑनलाइन हो गई थी. सुबह 8:00 बजे कक्षा शुरू होकर दोपहर 1:00 से 2:00 बजे तक चलती थी. इसके बाद दोपहर का खाना खाने के बाद नीट के एग्जाम की तैयारी करने के लिए लग जाया करता था. लगातार 5 घंटे तक पढ़ाई करने के बाद शाम 6:00 बजे जब माँ नौकरी से घर लौटती तब उनके साथ कुछ देर तक बातचीत होती थी.

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NEET 2022 Zirakpur's Arpit Narang became the Punjab topper's father's death as a challenge

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अर्पित ने बताया सोशल मीडिया से भी दूरियां रखि कभी महसूस नहीं हुआ अच्छे अंक पाने के लिए पढ़ाई करनी है अच्छी पढ़ाई तभी होगी जब दिमाग तनावमुक्त होगा.एक बात जरूर कुछ दिक्कत आई थी तब माँ ने अपने पास बैठा कर बहुत प्यार से समझाया आज फक्र है उनकी बदौलत में जीरकपुर के साथ-साथ पंजाब का नाम रोशन कर पाया.अर्पित ने आगे बताया नेशनल साइंस ओलंपियाड और इंटरनेशनल मैथमेटिक्स ओलिंपियाड में तीन बार गोल्ड मेडलिस्ट रह चुके हैं. राज्य इस्तर के शतरंज के खिलाड़ी भी हैं और चैस खेलना अपने दादा के साथ शुरू किया.इसका फायदा यह हुआ अर्पित कभी अपने ऊपर तनाव हावी नहीं होने देते.इसका फायदा उन्हें नीट के एग्जाम की परीक्षा के दौरान जरूर हुआ. डॉक्टर बनने का लक्ष्य रखने वाले अर्पित ने 10वीं में अपने पिता को गंभीर बीमारी के चलते खो दिया. इस सदमे को सेट बैक के रूप में नहीं बल्कि चैलेंज के रूप में लिया. परिवार की खुशी के लिए और अर्पित ने दिन रात एक कर पढ़ाई की.वही आपको बता दें फार्मा कंपनी में कार्यरत अर्पित की मां प्रीति नारंग ने बताया अर्पित का लगाओ मेडिकल लाइन के प्रति बचपन से था.जब भी वह पीजीआई में अकाउंट पर विभाग में कार्यरत अपनी सास से मिलने जाती तब अर्पित अपनी दादी से कुछ पलों के लिए आसपास के डॉक्टरों से बातचीत करता था.अर्पित को डॉक्टर बनने की प्रेरणा यहीं से मिलनी शुरू हुई. लेकिन पिता को खोने के बाद वह प्रेरणा एक उद्देश्य के रूप में तब्दील हो गई.और इसका फल पंजाब टॉपर और ऑल इंडिया रैंक में 7वां स्थान पाकर प्राप्त किया अर्पित ने बताया मां उनकी रोल मॉडल मां है.अर्पित का कहना है उन्होंने पहले अपनी बड़ाई चंडीगढ़ के सेंट जेवियर स्कूल से की. इसके बाद वह जीरकपुर शिफ्ट हो गए.जीरकपुर आने के बाद उन्होंने दीक्षांत इंटरनेशनल स्कूल में सेकंड क्लास में दाखिला लिया. पढ़ाई शुरू की स्कूल की टीचर ने हमेशा किसी न किसी रूप में पढ़ाई के लिए प्रेरित किया. स्कूल की मैथ टीचर लीना मल्होत्रा से काफी प्रभावित हैं.उन्होंने क्लास के बाद एक्स्ट्रा क्लास लगाकर सवालों को समझाने में मेरी मदद की. जबकि दिशांत स्कूल सब ग्रुप के चेयरमैन मितुल दीक्षित सर अक्सर उन्हें नोवेल पढ़ने के लिए देते थे इसकी मदद से हमेशा नई-नई जानकारियां मिलती थी.

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