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सिक्योरिटी  गार्ड की नौकरी करने वाले ने अपनी मेहनत से पास की एनडीए परीक्षा अब लेफ्टिनेंट बनकर करेंगे देश सेवा

कहते हैं अगर सच्ची लगन हो मन में विश्वास हो निरंतर प्रयत्न करते रहे तो अवश्य ही सफलता प्राप्त होती है. हमें कभी भी हिम्मत नहीं तोड़नी चाहिए और अपने लक्ष्य को लेकर निरंतर प्रयत्न करते रहना चाहिए.आज हम आप से चर्चा करेंगे एक ऐसे सिक्योरिटी गार्ड की जिन्होंने नौकरी करने वाले ने अपनी मेहनत से पास की है एनडीए परीक्षा.

सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते हुए पढ़ाई की सारी रात नौकरी पर ड्यूटी भी निभाई और पढ़ाई भी की. अपनी मेहनत लगन से एनडीए की परीक्षा मे सफलता प्राप्त की और अब लेफ्टिनेंट बनकर करेंगे देश की सेवा.सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने वाले शख्स ने काफी कठिन परिश्रम किया रात को पढ़ाई कर मेहनत कर नौकरी भी की है दिन में सिर्फ 4 घंटे की नींद ली.

हम अपने संसार में अपने आसपास कई ऐसे मेहनत कश लोगों को अवश्य ही देखते हैं कि वह काफी कठिनाइयों का सामना करते हुए भी अपने लक्ष्य को नहीं भूलते एक और अपने लक्ष्य को हमेशा ही प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहते हैं.

आज हम आपसे बात करेंगे प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने वाले एक शख्स की जिन्होंने एनडीए परीक्षा पास की और अब वह सेना में लेफ्टिनेंट बनेंगे.

आपको बतादे राजस्थान के अलवर जिले के गांव पहाड़ी के रहने वाले नरेंद्र ने गोहाना में एक कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रहे थे. 2 दिन पहले एनडीए की परीक्षा का परिणाम आया उनकी खुशी का ठिकाना ना रहा उनको 267वी रैंक प्राप्त हुई.उनका लेफ्टिनेंट बनने का सपना पूरा होने को है.नरेंद्र को कंपनी के साथ ही कर्मचारियों और मकान मालिक ने सम्मानित किया.

नरेंद्र के पिता की अलवर जिले के गांव में 2 बीघा जमीन है. इस पर वह खेती करते हैं नरेंद्र ने प्रारंभिक पढ़ाई अलवर से शुरू की थी. फिर उन्होंने जयपुर में प्राइवेट कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर कुछ रुपए जमा कर लिए.उसके बाद उन्होंने चंडीगढ़ में जाकर इंडिया की कोचिंग ली. घर को चलाने के लिए फिर सोनीपत में प्राइवेट गार्ड की नौकरी करने लग गए और साथ-साथ अपनी तैयारी भी कर रहे थे. साथ ही रात में सिक्योरिटी गार्ड  की नौकरी करते रहे दिन सुबह में आकर 4 घंटे सोते फिर पढ़ाई करते थे.  फिर अपनी मेहनत के बल पर एनडीए की परीक्षा पास कर सके उनकी सफलता से उनके मकान मालिक पवन ढिल्लो भी काफी प्रभावित हुए हैं. मकान मालिक के अलावा निजी कंपनी के कर्मचारियों ने भी मिलकर उन्हें सम्मानित किया. कहते हैं कि प्रतिभा अगर है तो सुविधाओं की मोहताज नहीं होती है.

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