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एक बार फिर मसीहा बने सोनू सूद ,बच्ची के पैरों में देखि तकलीफ तो उठाया इतना बड़ा कदम

बॉलीवुड के वह दिग्गज अभिनेता जिनका नाम दर्शकों  लोगों के लिए एक खास नाम बनकर उभरा है.एक मसीहा के रूप में वह अब जनता के मन में जगह बना चुके हैं.  चहेते स्टार सोनू सूद जो करोना काल में ज्यादा सुर्खियों में बने रहे. हर एक की पूरे दिल से सहायता की कितने ही कोविड-19 के कारण लोगों  की पूरे मन से खाने से लेकर सम्भव सहायता की . आज भी अपने कार्य मे पीछे नहीं है यह नेक दिल इंसान .

 


खबरों के अनुसार सोनू सूद ने अब एक 10 वर्ष की बच्ची के लिए सहायता का हाथ बढ़ाया है.यह बच्ची अपने एक पैर से कूद कूद कर स्कूल जाती है ताकि  पढ़ाई कर सके और गरीबी को दूर कर सके. आपको बता दें एक्टर सोनू सूद ने बच्चे की सहायता की जानकारी को अपने ऑफिशल टि्वटर अकाउंट के द्वारा सूचना देते हुए उन्होंने ट्वीट कर कहा,”अब यह अपने एक पैर नहीं दोनों पैरों पर कूदकर स्कूल जाएगी.

टिकट भेज रहा हूं चलिए दोनों पैरों पर चलने का समय आ गया”.एक्टर की इस दरियादिली को देखकर फिर से ही लोग काफी ज्यादा सराहना कर रहे हैं. सोनू सूद ने इससे पहले बिहार के सोनू कुमार की भी सहायता की थी. जो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा का विषय बना हुआ था.

 

 

जानकारी के लिए बता दें बिहार के जमुई के बच्ची का हौसला इतना मजबूत है मुसीबतों में भी हार नहीं मानी.टीचर बनने का सपना इसने देखा बच्ची एक पैर से एक किलोमीटर का रास्ता तय करती है. ताकि स्कूल जाकर पढ़ाई कर सके  गरीब बच्चों को पढ़ा सके. बच्ची की उम्र सिर्फ 10 वर्ष है. इस बच्ची का नाम सीमा है. वह फतेहपुर गांव में रहती है जो नक्सल प्रभावित इलाका है. एक हादसे ने सीमा से उसके पैर छीन लिए लेकिन हौसला अभी भी बुलंद है.

इस हादसे में उसका एक पैर काटना पड़ा था.सीमा अपने गांव में शिक्षा की एक नई मिसाल कायम करना चाहती है. वह इस हालात के बाद भी स्कूल पढ़ने जाती है.गांव की लड़कियों को भी शिक्षा के लिए प्रेरित करती हैं.मजदूर पिता की बेटी है जो जज्बे और जुनून से काफी ज्यादा भरी हुई है.पिता मजदूरी करके परिवार का खर्च चलाता है.माँ ने बताया बेटी को पढ़ने का बहुत शौक है. बच्चे स्कूल जाने के लिए रोते थे. लेकिन बिटिया ने स्कूल जाने की इच्छा जताई. वह दूसरे बच्चों को देखती और स्कूल जाने का ख्वाब लिए टीचर बनने का सपना देखा है. आपको बता दें स्कूल में सीमा का एडमिशन हो गया है. लेकिन उसे स्कूल जाने में तकलीफ होती है. स्कूल 1 किलोमीटर दूर है.1 किलोमीटर पगडंडी रास्ते पर वह एक पैर से कूद,कूद कर स्कूल जाती है. सीमा का कहना है एक पैर कट जाने से मुझे कोई गम नहीं है. मैं अपने एक पैर से सभी काम कर लेती हूं सीमा को एक पैर से स्कूल जाते हुए जिसमें भी देखा वह हैरान हो गया लोगों का कहना है दिव्यांग होने के बाद भी सीमा आत्मविश्वास से भरी है उसकी स्कूल की टीचर का कहना है हमसे जितनी सहायता हो पाएगी हम सीमा के लिए करेंगे .

 

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