कुछ हटकर

पति हुए बीमार तो बिहार की इस महिला ने उठाई घर की जिम्मेदारी ,खुद चला रही हहि टेम्पो बन गई मिसाल

दोस्तों भगवान की तरफ से स्त्रियों को देवी माँ,भगवन का दर्जा मिला हुआ है,आज की महिला पुरषो के कंधे से कन्धा मिलाकर चल रही है,दोस्तों एक महिला परिवार को जैसे चलाती है उस तरह से शायद ही कोई पुरुष चला सकता है,महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं है, इस बात को महिलाओं ने कई बार पुरुषों की तरह कार्य करके साबित कर दिया है.आज हम आपको पूनम चौधरी के बारे में बताएंगे, वह अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए मालवाहक वाहन और ऑटो रिक्शा चला रही है.आइए जाने पूनम के बारे में.

महिलाएं कुछ भी कर सकती है.हमारे देश की महिलाएं अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए पुरुषों की तरह ही अपने परिवार का जिम्मेदारी उठा सकती हैं.पूनम चौधरी महिला सशक्तिकरण का एक जीता जागता उदाहरण है.उन्होंने यह साबित कर दिया है कि परिवार का जब पुरुष शारीरिक रूप से काम करने में शक्ष्म न हो तो महिला पुरुष के तरह परिवार का भरण-पोषण अच्छी तरह से कर सकती है.पूनम चौधरी बिहार की रहने वाली है.

पूनम चौधरी पिछले सात सालों से अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए मालवाहक वाहन और ऑटो रिक्शा चला रही हैं.पूनम मालवाहक वाहन और ऑटो रिक्शा चलाकर अपने बीमार पति का इलाज कराती है और साथ ही अपने बेटे और बेटी को शिक्षा दिलाने का काम करती हैं.पूनम के पति के बीमार होने के बाद उनके घर की आर्थिक स्थिति बहुत ही खराब हो गई थी जिसके कारण पूनम ने स्वयं कमाना शुरू कर दिया.

पूनम पिछले 5 सालों से छोटे-छोटे मालवाहक वाहन चलाती थी लेकिन पिछले 2 सालों से ऑटो रिक्शा चला कर अपने परिवार का भरण पोषण कर रही है.पूनम प्रतिदिन जगदीशपुर से भागलपुर तक यात्रियों को ढो कर लाने का काम करती है और फिर भागलपुर शहर में ऑटो रिक्शा चलाने के बाद शाम को जगदीशपुर के लोगों को भागलपुर से जगदीशपुर ले जाने का काम करती है.

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