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कहीं मटन बिरयानी तो कहीं चिकन, भारत के इन मंदिरों में प्रसाद में चढ़ता है मांस

मंदिर में नॉन-वेज आहार के प्रसाद के रूप में मिलने की बात थोड़ी अटपटी लगे, लेकिन वास्तव में यह सच है। भारत में कई ऐसे मंदिर और धार्मिक स्थल हैं जहां प्रसाद के तौर पर मीट मांस चढ़ता और बंटता है। देश के अलग अलग राज्यों में यह मंदिर स्थित हैं। कुछ मंदिरो में लोग बलिदान परंपरा को मानते है और इसलिए अपने आराध्य को प्रसन्न करने के लिए मांसाहारी आहार को बतौर भोग चढ़ाते हैं। बाद में, वहीं भोग प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। तो आइए जानते हैं उन मंदिरों के नाम और जानते हैं प्रसाद में क्या चढ़ता है –

विमला मंदिर, ओडिशा

ओडिश के पुरी में स्थित प्रसिद्ध मंदिर जगन्नाथ मंदिर परिसर के भीतर पवित्र तालाब रोहिणी कुंड के बगल में विमला मंदिर स्थित है। विमला को जगन्नाथ की तांत्रिक पत्नी और मंदिर परिसर की संरक्षक माना जाता है। इसलिए, इसका महत्व जगन्नाथ मंदिर से भी अधिक है। भगवान जगन्नाथ को कोई भी प्रसाद तब तक महाप्रसाद के रूप में नहीं चढ़ाया जा सकता, जब तक कि उसे पहली बार विमला देवी को नहीं चढ़ाया जाता। इस मंदिर में देवी को विशेष दिनों में मांस और मछली का भोग लगाने की परंपरा बदस्तूर जारी है।

मुनियांदी स्वामी मंदिर, तमिलनाडु

मुनियांदी स्वामी मंदिर तमिलनाडु के मदुरै में वडक्कमपट्टी नामक एक छोटे से गांव में स्थित है। यह मंदिर भगवान मुनियादी अर्थात मुनीस्वरार को समर्पित है। इन्हें भगवान शिव का अवतार माना जाता है। भगवान मुनियादी के सम्मान में इस मंदिर में एक तीन दिवसीय वार्षिक उत्सव का आयोजन किया जाता है, जिसमें चिकन और मटन बिरयानी को प्रसाद के रूप में परोसता है और लोग नाश्ते के लिए बिरयानी खाने के लिए मंदिर में आते हैं।

तारकुल्हा देवी मंदिर, उत्तर प्रदेश

तारकुल्हा देवी मंदिर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में स्थित है। इस मंदिर में हर साल वार्षिक खिचड़ी मेला आयोजित किया जाता है, जिसमें भक्तों की भीड़ उमड़ती है। माना जाता है कि यहां पर आने वाले हर भक्त की मनोकामना पूरी होती है। खासतौर से, चैत्र नवरात्रि में देश भर से लोग इस मंदिर के दर्शन करने आते हैं।

कालीघाट मंदिर, पश्चिम बंगाल

कालीघाट काली मंदिर कोलकाता के पश्चिम बंगाल भारत में स्थित है और देवी काली को समर्पित है। यह एक महत्वपूर्ण हिन्दू मंदिर है और 51 शक्तिपीठों में से सिर्फ एक है। किदवंती है कि यहां पर सती का पैर का अंगूठा भी यही पर गिरा था। यह एक प्राचीन मंदिर है और लगभग 200 वर्ष पुराना है। मंदिर में देवी काली भगवान कोलकाता शिव की छाती पर पैर रखी हुई हैं और उनके गले में नरमुंडो की माला है। मंदिर में पशु बलि दी जाती है। बता दें कि देवी को साल भर में लगभग 499 बकरियां प्रदान की जाती हैं।

 

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