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बेहद रईस है पाकिस्तान आर्मी, इस तरह बना डाली खरबों की संपत्ति….

भाग्य से ज्यादा और कम कभी किसी को ना मिला है और ना मिलता है चाहे वह हमारी आम जीवन हो या हम अपनी सेना की बात करें जो कि देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति तक दे देती है लेबनान की सेना इस समय आर्थिक संकट से गुजर रही है और उसको बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है आज हम आपसे इसी विषय में बात करेंगे..

पश्चिमी एशिया के देश लेबनान की सेना भीषण आर्थिक संकट…

लेबनान की सेना को अपना फर्ज के लिए बहुत ज्यादा कठिनाइयों से गुजरना पड़ रहा है ऐसी हालात आ गए हैं कि उन्हे अपने खर्च के अलग-अलग तरीके खोजने पढ़ रहे हैं. सैन्य हेलीकॉप्टर पर नागरिकों को सैर करवाई जा रही है इसके बदले उन्हें पैसे मिलते हैं और उम्मीद की जा रही है कि ऐसे तरीके खोज कर सेना अपना घाटा पूरा कर सकेगी. अगर हम पाकिस्तानी सेना की बात करें तो वहां की सेना इससे एकदम अलग ही है. पाकिस्तान की सेना के पास बेशुमार दौलत है 2 वर्ष पहले वर्ल्ड बैंक ने कह दिया था कि सेना को बजट में अपना हिस्सा घटाना चाहिए ताकि आम लोगों की बुनियादी जरूरतें पूरी हो सके अपने यहां काफी ताकतवर रही है पाक सेना.

सैन्य और राजनैतिक ताकत के हिसाब से पाकिस्तानी आर्मी अपने देश में सबसे ज्यादा ताकतवर मानी जाती है लेकिन यह ताकत इतनी तक ही सीमित नहीं पाकिस्तान की सेना के पास बहुत ज्यादा दौलत भी है. इस पर मीडिया में बहुत बार प्रश्न भी उठे लेकिन सेना के इस देश में काफी ताकतवर होने के कारण बात कभी उठना सकी और इसको दबा दिया गया.

फायदा देने वाले सारे बिजनेस में शेयर…

आपकी जानकारी के लिए बता दें क्वार्ट्ज. कॉम के अनुसार यह आर्मी वर्ष 2016 में ही 50 से ज्यादा व्यापारिक संस्थानों की मालिक बन चुकी थी जिसकी कीमत 20 मिलियन डॉलर से भी कहीं ज्यादा थी यह कीमत अब और ऊपर जा चुकी है. पेट्रोल पंप,इंडस्ट्रियल प्लांट, बैंक,स्कूल, यूनिवर्सिटी, दूध से जुड़े उद्योग,सीमेंट प्लांट और यहां तक की सबसे ज्यादा मुनाफा देने वाली बकरीज़ भी सेना के हिस्से में हैं देश के 8 बड़े शहरों में हाउसिंग प्रॉपर्टी में भी सेना का सबसे बड़ा शेयर है.

चैरिटी की तरह हो रहा बिजनेस….

पाकिस्तानी सेना के हिस्से में ज्यादातर बिजनेस चैरिटी के नाम पर चलते हैं और उनकी टैगलाइन में कहीं ना कहीं इसका जिक्र रहता है कि यह सेना द्वारा चल रहे हैं इसलिए ज्यादा ईमानदारी से काम करते हैं.सीधे सेना के जनरल इन उद्योगों से जुड़ते हैं ताकि शक की कोई गुंजाइश ना रहे.

प्रॉपर्टी का हिसाब देने में आनाकानी…
इतने दौलतमंद होने के बाद भी सेना अपनी कमाई का सीधा स्रोत और कुल कमाई बताने से हमेशा बचती रही. डेलिओ इनके मुताबिक इस बात का कोई पक्का डाटा नहीं है कि सेना को बिजनेस से कितना मुनाफा हो रहा है.वर्ष 2007 में सैन्य मामले की जानकार आयशा सिद्दीकी ने कहा था कि आर्मी के पास 20 बिलियन डॉलर से ज्यादा कीमत का बिजनेस है यही डाटा वर्ष 2016 में पाकिस्तानी संसद ने भी दिया,इससे साफ है कि कारपोरेट में बदल चुकी पाक सेना अपने बिजनेस प्रॉफिट को छुपा कर रखना चाहती हैं.

सेना को बजट में भी चाहिए होता है बड़ा हिस्सा…..

इसके साथ ही पाकिस्तान सेना बजट का हिस्सा भी लेती है और बजट का हिस्सा 2018 में कुल 21 प्रतिशत पाक सेना के पास गया. इसके बाद का डाटा सपष्ट नहीं दिया गया है. इतना बड़ा बजट का हिस्सा सेना में चला जाता है इसको भी पाकिस्तानी गरीबी का एक कारण माना जाता है वर्ष 2019 में खुद वर्ल्ड बैंक को यह कहना पड़ा था कि पाकिस्तान को अपना सैन्य बजट कुछ कम करना चाहिए।

लेबनान गुजर रहा भीषण आर्थिक तंगी से….

अगर हम बात करें लेबनान की तो बहुत ज्यादा आर्थिक संकट से गुजर रहा है और पूरा देश ही बुरी तरह तंगी के हालातों से जूझ रहा है बीबीसी की एक खबर के अनुसार यहां पर जितना उत्पादन है उससे ज्यादा कर्ज़ है इस तरह से कर्ज लेने वाले देशों में यह दुनिया में तीसरे नंबर पर रहा यहां बेरोजगारी दर 25% से भी ज्यादा हो चुकी है लगभग एक तिहाई

आबादी गरीबी रेखा से नीचे है.

बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं..

यहां पर बिजली कटौती दिन के 20 घंटे होना एक आम बात है. सड़कों पर कचरे का ढेर जमा रहता है लेकिन उसे उठाने के लिए सफाई कर्मी नहीं क्योंकि सरकार उन्हें भी वेतन नहीं दे पा रही है यहां तक कि लोग कम पैसों पर एक्सपायर्ड खाना खरीदने और गंदा पानी पीने को मशहूर हो चुके हैं.

क्यों लेबनान के हालात नहीं सुधर रहे…..

खबरों के अनुसार यह पता लगा कि इसकी सबसे बड़ी राजनीतिक अस्थिरता मानी जाती है मध्य पूर्व का यह देश सबसे जटिल देशों में से आता है वर्ष 1943 में आजादी से पहले फ्रांस के अधीन रहा यह देश के शिया,सुन्नी औरका इसाई मिश्रण है.इसके बाद में सीरियल से यहां बहुत बड़ी संख्या में फिलिस्तीनीआ गए इनके आने के बाद यहां राजनैतिक अस्थिरता और बड़े स्तर की शुरुआत हो गई यहां पर अलग-अलग मजहब के लोग लड़ने लगे यहां तक कि ईरान और इजरायल जैसे देशों के लिए लेबनान लड़ाई का मैदान बन कर रह गया.

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