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पेट्रोल के बढ़ते दामों के बीच शत्रुघ्न सिन्हा ने शेयर किया वीडियो, पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को यूं किया याद

भाजपा ने एनडीए से अपने 40 उम्मीदवार घोषित कर दिए थे. इनमें से एक सीट थी पटना साहिब की. इस सीट से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा का टिकट काट दिया गया था. इस सीट पर रविशंकर प्रसाद को टिकट दिया गया है.शत्रुघ्न सिन्हा कांग्रेस से जुड़ गए,हालांकि उन्होंने बहुत बार इस तरह के संकेत दिए थे कि वो जल्द भाजपा को छोड़ सकते हैं. कई बार शत्रुघ्न सिन्हा ने भाजपा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नोटबंदी के खिलाफ बयान दिया था. उन्होंने विपक्ष के मंच पर भी खड़े होकर विवादित बयान दिया था

पढ़े शत्रुघ्न सिन्हा के विवादित बयान

– शत्रुघ्न सिन्हा ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) द्वारा आयोजित कोलकाता में संयुक्त विपक्ष की रैली में भी शामिल होकर मंच से पीएम नरेंद्र मोदी और नोटबंदी के खिलाफ बयान दिए थे.– शत्रुघ्न सिन्हा कई बार विपक्षी नेताओं की खुलकर तारीफ भी कर चुके हैं. बिहार की प्रमुख विपक्षी पार्टी राजद की रैली में भी शत्रुघ्न सिन्हा शामिल हुए थे.
– उन्होंने एक बार ट्वीट करके पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा था कि सर, राष्ट्र आपका सम्मान करता है, पर नेतृत्व में विश्वसनीयता और विश्वास की कमी है. नेतृत्व जो कर रही है और कह रही है, क्या लोग उसपर विश्वास कर रहे हैं? शायद नहीं. जनता से किए गए वादे अभी भी पूरे होने बाकी हैं. जो अब पूरा हो भी नहीं पाएंगे. आशा, इच्छा और प्रार्थना, हालांकि मैं अब आपके साथ नहीं रह सकता.

– शत्रुघ्न ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मैं भी चौकीदार’ अभियान के बारे कहा कि श्रीमान यह महत्वपूर्ण नहीं है कि आप लाखों/सैकड़ों में संबोधित करें. महत्वपूर्ण यह है कि उनकी दुर्दशा को दूर करना, उन्हें बेहतर नियम, वेतनमान दिया जाना तथा उनकी जीवन शैली को बेहतर करना और गरिमा के साथ जीने के लिए प्रोत्साहित करना.

-उन्होंने ट्वीट कर कहा, सरजी, आपके अनुसार 20 से ज्यादा पार्टियां ‘महामिलावट’ हैं, लेकिन आपको 40 से ज्यादा दल सपोर्ट कर रहे हैं. आप इसे क्या कहेंगे? ‘महागिरावट’. यही समय है जब आप अपने सभी या कुछ वादों को पूरा कर वादों और प्रदर्शन के बीच की खाई पाटें. 100 स्मार्ट शहरों का क्या हुआ? क्या किसी एक का नाम बता सकते हैं?. अगर ताली कप्तान को मिलती है तो गाली भी कप्तान की है

शत्रुघ्न सिन्हा ने याद दिलाया की कैसे अटल जी पेट्रोल के दाम जब बढे तो बैल गाडी पर इस का विरोध किया था,पार्टी वही है मगर अब सोच अलग है,लगता है इनको जनता का ख्याल नहीं है,ये भूल चुके है की सबसे पहले नोट बंदी,कोरोना काल से जूझ रहे लोगो की मदद कैसे करनी है,कही ऐसा न हो की देश के प्रधान मंत्री को फिर से राज्यों के चुनाव में हर राज्य में जाकर भाषण देना पड़े,अपनी पार्टी को जिताने के लिए,

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार आज भले ही पेट्रोल, डीज़ल के दामों में बढ़ोतरी को जायज ठहरा रही हो, लेकिन 44 साल पहले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसी मुद्दे पर इंदिरा गांधी की सरकार के ख़िलाफ़ हल्ला बोला था.वाजपेयी पेट्रोल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन में बैलगाड़ी से संसद पहुंचे थे और अपना विरोध दर्ज किया था.

 

न्यूयॉर्क टाइम्स के 12 नंवबर, 1973 को प्रकाशित अंक के मुताबिक तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को संसद में विरोधी दलों के गुस्से का सामना करना पड़ा था.इस दिन संसद में छह सप्ताह तक चलने वाले शीतकालीन सत्र की शुरुआत हुई थी.दक्षिण और वामपंथी पार्टियों ने बढ़ी हुई कीमतों को रोकने में असर्मथता का आरोप लगाते हुए सरकार से इस्तीफ़े की मांग की थी.जन संघ के नेता अटल बिहारी वाजपेयी और दो अन्य सदस्य बैलगाड़ी से संसद पहुंचे थे. इनके अलावा कई अन्य साइकिल से संसद आए थे.

वे देश में पेट्रोल और डीजल की कमी में इंदिरा गांधी का बग्घी से यात्रा करने का विरोध कर रहे थे.इंदिरा गांधी इन दिनों लोगों के बीच पेट्रोल बचाने का संदेश देने के लिए बग्घी से यात्रा कर रही थीं.तेल का उत्पादन करने वाले मध्य-पूर्व देशों ने भारत को निर्यात होने वाले पेट्रोलियम पदार्थों में कटौती कर दी थी. जिसके बाद इंदिरा गांधी की सरकार ने तेल की कीमतों में 80 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी कर दी थी.

1973 में तेल संकट तब आया था जब तेल निर्यात करने वाले देशों के संगठन यानी ओपेक ने दुनिया भर में तेल आपूर्ति में कटौती कर दी थी.अभी देश में पेट्रोल की कीमतें 70 रुपए के पार कर गई है. जिसपर केंद्रीय पर्यटन मंत्री केजे अल्फोंस ने पिछले दिनों कहा था कि जिनके पास कार और बाइक है वे ही पेट्रोल ख़रीद रहे हैं. जाहिर है, वे लोग भूखे नहीं मर रहे हैं.

उन्होंने कहा था कि जो लोग टैक्स दे सकते हैं, सरकार उनसे वसूली ज़रूर करेगी.उद्योग संगठन एसोचैम भी पेट्रोल-डीजल पर टैक्स कम करने के पक्ष में है. एसोचैम द्वारा जारी नोट में कहा गया है, “जब कच्चे तेल की कीमत 107 डॉलर प्रति बैरल थी, तब देश में पेट्रोल 71.51 रुपये लीटर बेचा जा रहा था. अब कच्चे तेल की कीमत घटकर 53.88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है. उपभोक्ता तो यह पूछेंगे ही कि अगर बाज़ार से कीमतें निर्धारित होती हैं तो इसे 40 रुपये लीटर पर बेचा जाना चाहिए.

वरिष्ठ आर्थिक पत्रकार कहते हैं, “एक उपभोक्ता के लिहाज से देखें तो जो पैसा हम-आप प्रति लीटर दे रहे हैं, उसका क़रीब आधा पैसा सरकार के पास पहुंच रहा है.”वो बताते हैं कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग कर ज़रूर है, लेकिन उपभोक्ता जो पैसा चुकाते हैं और उसका आधा हिस्सा सरकार के पास पहुंचता है.”सरकार को फ़ायदा हो रहा है, लेकिन इसका बोझ आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है. अर्थशास्त्रियों का मोटा-मोटी अनुमान है कि पिछले तीन साल में कम से कम पांच लाख करोड़ रुपए सरकार के पास इस तरह जमा हुए हैं.

वो आगे कहते हैं, “ऐसी स्थिति में कोई सरकार इस मुनाफे का विरोध नहीं कर सकती है. चाहे सत्ता भाजपा के पास हो या कांग्रेस के पास.”हालाँकि भाजपा का कहना है कि पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कीमतों से जुड़ी हुई हैं. भाजपा ने पेट्रोल कीमतों पर उठ रहे सवालों का जवाब सोशल मीडिया पर दिया है.

 

भाजपा के ऑफिशियल ट्वीटर हैडंल पर कीमतों की बढ़ोतरी पर तर्क भी पेश किए गए थे. धर्मेंद्र प्रधान ने पेट्रोल की बढ़ी कीमतों को लेकर कई ट्वीट्स किए. प्रधान ने लिखा, ”जापान, स्विटज़रलैंड, सिंगापुर, यूके, जर्मनी, फ्रांस समेत 68 देशों में भारत के मुकाबले पेट्रोल की कीमत ज़्यादा है.”ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से पेश किए गए, जिनका लब्बोलुआब ये कि पेट्रोल की कीमतें सिर्फ भारत में नहीं बढ़ रही हैं या भारत में पेट्रोल की कीमतें कम बढ़ रही हैं.

 

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