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पिता ने कहा खेती के लिए नौकरी छोड़ी तो प्रॉपर्टी से बेदखल कर दूंगा, अब बेटा कमाता है 40 लाख रुपये

आज के जमाने में जहां बच्चे अपनी ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए अपने मां-बाप के खिलाफ चले जाते हैं ।बगावत करते हैं ।वही एक ऐसा भी मामला आया है जहां माता पिता अपनी बात मनवाने के लिए बच्चों को जायदाद से बेदखल करने का धमकी दे रहे हैं ।यह मामला बिहार के एक समस्तीपुर जिले के गांव का है ।वहां के रहने वाले सुधांशु कुमार ने एक अनोखी मिसाल पेश की है। सुधांशु कुमार ने दिल्ली कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी कर मुन्नार के टाटा टी गार्डन में नौकरी ज्वाइन कर ली थी ।लेकिन ऐसा करने के बाद भी उन्हें एक संतुष्टि नहीं मिली थी ।


जिसके चलते उन्होंने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया ।और फिर अपने पैतृक गांव बिहार लौट आए ।उनके इस फैसले पर उनके पिताजी बहुत नाराज हुए ।उन्होंने उन्हें समझाया कि इतनी अच्छी पढ़ाई लिखाई और अच्छी नौकरी के बावजूद भी तुम गांव में अपना पैत्रक व्यवसाय अपनाना चाहते हो ।इस खेती बाड़ी में कुछ भी नहीं रखा है ।और यदि तुम मेरा कहना नहीं मानते हो तो मैं तुम्हें अपनी जायदाद से बेदखल कर दूंगा ।पिताजी ने सुधांशु कुमार को समझाने की बहुत कोशिश की।


उन्होंने कहा कि आसपास के रिश्तेदार ,गांव के लोग क्या कहेंगे कि बेटे को इतना पढ़ा लिखा कर भी गांव में खेती करा रहे हैं ।लेकिन सुधांशु कुमार कहां मांगने वाले थे। उन पर तो खेतीबाड़ी करने की धुन सवार थी उन्होंने अपने पिता से कहा कि वे उन्हें एक मौका जरूर दें। सुधांशु कुमार खेती के व्यवसाय को अपनाकर उसको एक नया रूप दिया उन्होंने पारंपरिक पद्धति का त्याग कर आधुनिक पद्धति से खेती बाड़ी शुरू की जिसका परिणाम यह रहा कि आज उनका सालाना व्यवसाय 30 से 40 लाख हो जाता है सुधांशु जी बताते हैं कि बिहार क्षेत्र में मक्का की खेती करना एक बड़ा जटिल काम है लेकिन उस काम में भी वह आधुनिक पद्धति का प्रयोग कर पैसा कमा रहे हैं वे जब भी किसी किसान से मिलते हैं,


तो उसे यही समझाने का प्रयास करते हैं कि वह किस तरह से ज्यादा से ज्यादा धन कमा सकता है सुधांशु कुमार के अपने खुद के बाग बगीचे हैं और आज उनकी स्थिति यह है कि उनके बगीचे में लगे पेड़ से मिलने वाले फल पूरे पकने से पहले ही बिक जाते हैं एवं उनकी बुकिंग हो जाती है उन्होंने आज तक लगभग आम की अलग-अलग वैरायटी उत्पन्न करके बेच डाली है जिससे उन्हें बहुत मुनाफा मिलता है उत्तर प्रदेश क्षेत्र में विक्की भी बहुत फेमस फल के रूप में पाई जाती है लीची की बहुत अधिक उत्पत्ति कर इन्होंने बहुत अधिक मुनाफा कमाया था,


जिसको लेकर यह बहुत चर्चा में रहे थे खेती-बाड़ी के प्रति उनकी रुचि उनकी लगन एवं मेहनत का ही परिणाम है कि उन्हें केंद्र सरकार के द्वारा कई बार सम्मानित किया जा चुका है इसके अलावा सुधांशु कुमार खेती संबंधित ज्ञान एवं उससे संबंधित जानकारी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संबोधन के रूप में बता चुके हैं वर्तमान समय में सुधांशु कुमार इंडियन फार्मर नेटवर्क के महासचिव पद पर नियुक्त हैं.


किसानों को गए एक ही राय देते हैं कि उन्हें गेहूं धान मक्का की खेती के अलावा फलों की खेती पर भी ध्यान देना चाहिए व्यवसाई पद्धति को अपनाकर किसान अपने आय को बढ़ा सकता है इसके साथ-साथ उन्हें आधुनिक तकनीकी का प्रयोग भी करना होगा सिंचाई के लिए आधुनिक यंत्रों को लगाना होगा,


वे 2000 से भी ज्यादा किसानों को खेती के आधुनिक तकनीकों के बारे में प्रशिक्षण दे चुके हैं जिसका फल यह है कि आज उनके गांव के किसान यह कहते हैं कि अगर खेती भी करनी है तो पहले पढ़ाई लिखाई करो इनकी खेती करने का ढंग और इनकी मेहनत को देखने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं सुधांशु कुमार के खेतों पर आ चुके हैं सुधांशु कुमार का मानना है कि खेती-बाड़ी सिंचाई के प्रति किसानों की सोच एवं नजरिया बदल कर ही खेती-बाड़ी को नया रूप दिया जा सकता है।

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