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नवजात नाले में बह रहा था, बिल्लियों ने देख ऐसे किया अलर्ट, पुलिस ने बचाया

मुंबई में एक नवजात को बचाने की अनोखी घटना सामने आई है. यहां के पंतनगर इलाके में एक नवजात नाले में बह रहा था.उसे पहले बिल्लियों ने देखा और अपनी आवाज से आसपास के लोगों को अलर्ट किया.इसके बाद लोगों ने पुलिस को जानकारी दी. मुंबई पुलिस ने मौके पर पहुंचकर नवजात को नाले से निकाला और अस्‍पताल ले जाकर उसकी जान बचाई. मुंबई पुलिस ने इस घटना को लेकर ट्वीट कर जानकारी दी है.इसमें कहा गया है कि नवजात कपड़े में लिपटा था.उसे देखकर बिल्लियों ने आवाजें निकालनी शुरू कर दींं.इसके बाद लोगों का ध्‍यान नवजात की ओर गया..

लोगों ने उसे देखते ही पुलिस को सूचना दी.पुलिस की निर्भया स्‍क्‍वाड को तुरंत मौके पर भेजा गया.पुलिस टीम ने बच्‍चे को नाले से बाहर निकाला और उसे राजावाड़ी अस्‍पताल ले जाया गया. वहां उसका इलाज किया जा रहा है. हालांकि अब नवजात खतरे से बाहर है और ठीक हो रहा है. पुलिस ने ट्वीट में नवजात की फोटो भी साझा की है.हालांकि अभी तक बच्‍चे के मां-बाप या उन लोगों की पहचान नहीं हो पाई है, जिन्‍होंने उसे नाले में छोड़ा था.इस संबंध में पुलिस जांच कर रही है.भारतीय दंड संहिता सीरीज के अंतर्गत पिछले आलेख में आत्महत्या का दुष्प्रेरण तथा हत्या के प्रयास के अपराध के संबंध में चर्चा की गई थी,

अब इस आलेख में गर्भपात और शिशुओं से संबंधित अपराध पर सारगर्भित चर्चा की जा रही है.भारतीय दंड संहिता 1860 एक अत्यंत विषाद ग्रंथ है.भारत के राज्य द्वारा अपने नागरिकों को किस प्रकार की सुरक्षा दी जाएगी इसका पूरा उल्लेख इस दंड संहिता के अंतर्गत मिलता है.भारतीय दंड संहिता केवल जीवित व्यक्तियों के ही प्राणों की रक्षा नहीं करती है अपितु गर्भ में रहने वाले व्यक्तियों की भी प्राणों की रक्षा भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत की गई है.शिशु अबोध होता है उसे समाज तथा प्रकृति का कोई ज्ञान नहीं होता है, एक शिशु ही आगे चलकर एक समाज का निर्माण करता है.राज्य का यह कर्तव्य है कि वे अपने राज्य में जन्म लेने वाले शिशुओं के अधिकारों को संरक्षित करें तथा उन सभी कार्यों को अपराध घोषित करें जिन कार्यों के माध्यम से कहीं न कहीं गर्भ में स्थित और नवजात शिशु को क्षति पहुंचाई जा रही है तथा उनके जन्म लेने में कोई रुकावट पैदा की जा रही है.

भारतीय दंड संहिता की धारा 315 शिशुओं से संबंधित अपराध का उल्लेख कर रही है.इस धारा के अनुसार यदि किसी शिशु को जन्म लेने से रोका जाता है, प्रयास किए जाते हैं कि जिससे कोई शिशु जीवित रूप से जन्म नहीं ले तथा इस प्रकार के किए गए प्रयासों से उस शिशु की मृत्यु हो जाती है.किसी भी प्रकार से शिशु को जन्म लेने से रोका जाता है प्रयास ही होते हैं कि जन्म के होते ही शिशु की मृत्यु हो जाए या फिर शिशु के जन्म लेने के पश्चात उसकी मृत्यु कारित कर दी जाती है ऐसी स्थिति में भारतीय दंड संहिता की धारा 315 के अंतर्गत 10 वर्ष तक की अवधि के कारावास का निर्धारण किया गया है, इसके साथ जुर्माना भी अधिरोपित किया जा सकता है.भारतीय दंड संहिता की धारा 312 गर्भपात कारित करने को अपराध करार देती है तथा धारा 313 इस प्रकार का गर्भपात स्त्री की सहमति के बिना करने पर दंडनीय अपराध करार देती है.अब धारा 314 इस प्रकार के गर्भपात कारित करने के आशय से किए गए कार्य को जिसके परिणामस्वरूप स्त्री की मृत्यु हो जाए.

दंडनीय अपराध करार देती है.गर्भपात दो प्रकार से किया जाता है पहला प्रकार है स्त्री की स्वेच्छापूर्वक गर्भपात कारित किया जाना और दूसरा प्रकार है स्त्री की सहमति के बिना गर्भपात किया जाना.धारा 314 दो प्रकार के दंड का निर्धारण करती है,यदि गर्भपात स्त्री की स्वेच्छा से किया जा रहा था और ऐसे गर्भपात में उस स्त्री की मृत्यु हो गई तो गर्भपात करने वाला 10 वर्ष तक की अवधि के दंड से दंडित किया जाएगा और यदि गर्भपात स्त्री की सम्मति के बिना किया जा रहा था मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट,1971 के अधिनियम के प्रावधानों के विरुद्ध किया जा रहा था तब ऐसे गर्भपात में स्त्री की मृत्यु होने पर आजीवन कारावास के दंड का निर्धारण धारा 314 के अंतर्गत किया गया है.

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