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होटल ताज का कर्मचारी कुत्ते को बारिश से बचाने के लिए छाता पकड़े खड़ा था, बॉस रतन टाटा ने की सरहाना

रतन नवल टाटा का नाम वर्तमान में भारत के सबसे बड़े बिज़नेस-मेन और इन्वेस्टर्स में आता है, इनका जन्म 28 दिसम्बर 1937 को मुंबई में हुआ था. ये टाटा ग्रुप के संस्थापक जमेशद जी टाटा के प्रपौत्र है.1940 दशक में रतन टाटा के माता-पिता नवल टाटा और सोनो दोनों अलग हो गये थे.उस समय रतन टाटा केवल 10 वर्ष के और उनके छोटे भाई जिमी केवल 7 वर्ष के थे.तत्पश्चात दोनों भाइयों का पालन-पोषण उनकी दादी नवजबाई टाटा ने किया,रतन टाटा जितने बड़े बिजनस मेन है उतने ही बड़े दानवीर और रहम दिल भी है.आज का आर्टिकल इसी बारे में है दोस्तों.


रतन टाटा का कुत्तों के लिए प्यार जगजाहिर है, खासकर बेसहारा कुत्तों के लिए उनकी फिक्र.स्ट्रीट डॉग्स के लिए रतन टाटा के प्यार और फिक्र की झलक एक बार फिर देखने को मिली है.रतन टाटा ने अपनी एक इंस्टाग्राम पोस्ट में ताज होटल के एक कर्मचारी की तारीफ करते हुए फिर से अपना दिल खोला है.रतन टाटा ने इंस्टाग्राम पर एक फोटो शेयर की है, जिसमें एक व्यक्ति बारिश में छाता लिए हुए है और उस छाते के नीचे उसके साथ एक कुत्ता भी है. वह व्यक्ति ताज होटल का कर्मचारी था. रतन टाटा ने इस फोटो के साथ पोस्ट में लिखा है, ‘इस मानसून में आवारा जानवरों के साथ आराम बांटना..ताज का यह कर्मचारी काफी दयालु था क्योंकि उसने भारी बारिश में एक बेसहारा कुत्ते के साथ अपना छाता शेयर किया. मुंबई की भागदौड़ के बीच दिल को छू लेने वाला पल कैमरे में कैद हुआ है.इस तरह के संकेत बेसहारा जानवरों के लिए एक लंबा रास्ता तय करते हैंरतन टाटा की इस पोस्ट को अब तक 11 लाख से ज्यादा लाइक्स मिल चुके हैं और कई यूजर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है.एक इंस्टाग्राम यूजर ने लिखा,यह वास्तव में मानवता का एक आदर्श उदाहरण है और यह जानकर खुशी हुई कि यह अभी भी मौजूद है.हमें अपने जानवरों की बेहतरी के लिए इनके जैसे और लोगों की ज़रूरत है.धन्यवाद सर रतन टाटा इस तस्वीर को साझा करने के लिए. एक दूसरे यूजर ने लिखा,’हमारे देश के कुत्ते सम्मान और प्यार के हकदार हैं.आप जैसी इतनी उच्च हस्ती की ओर से ऐसी पोस्ट आम आदमी के लिए एक सकारात्मक प्रेरणा है.

इससे पहले रतन टाटा ने एक बेजुबान दिव्यांग बेसहारा कुत्ते को घर दिलाने में मदद की थी.उस पैरलाइज्ड कुत्ते का नाम स्प्राइट था. रतन टाटा ने दिसंबर 2020 में इस आवारा कुत्ते को एक घर दिलाने के लिए इंस्टाग्राम पर पोस्ट डाली थी.उसके बाद इस साल जून रतन टाटा ने इंस्टाग्राम स्टोरीज के माध्यम से बताया कि स्प्राइट को घर मिल गया है.


रतन टाटा ने अपनी प्रारभिक पढाई मुंबई के कैंपियन स्कूल में की थी और सेकेंडरी शिक्षा जॉन केनन स्कूल से ली. इसके बाद 1962 में कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से वास्तुकला और स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी.उनके बाद उन्होंने हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल से सन 1975 में एडवांस्ड मैनेजमेंट प्रोग्राम पूरा किया.

टाटा ग्रुप के साथ अपने करियर की शुरुआत सन 1961 में की.इसके लिए सबसे पहले उनको जमशेदपुर के टाटा स्टील प्लांट में भेजा गया,जहा कारीगरों के साथ मिलकर उन्होंने काम की बारिकिया सीखी.1971 में, उन दिनों फाइनेंसियल प्रॉब्लम से जूझ रही राष्ट्रीय रेडियो और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी लिमिटेड(नेल्को) का डाईरेक्टर-इन-चार्ज बने.1991 में JRD टाटा ने टाटा संस के चेयरमैन के रूप में रतन टाटा को उनका उत्तराधिकारी घोषित किया और उनको सारा कार्यभार सौंप दिया.1991 में टाटा ग्रुप को सम्भालने के बाद उन्होंने टाटा ग्रुपको इतनी ऊँचाइयों तक पंहुचा दिया है, जो हम सब आज देख पा रहे हैं.

रतन टाटा के मार्गदर्शन में, Tata Consultancy Services सार्वजनिक निगम बनी और टाटा मोटर्स न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड हुई.उसके बाद उन्होंने टाटा चाय,टाटा मोटर्स, टाटा स्टील जैसी कंपनियों को शिखर तक पहुचाया,जिसके कारण आज उनके बिज़नेस का 65% धन विदेशी व्यापार से आता है. सन 1998 में टाटा मोटर्स ने पहली पूर्णतः भारतीय यात्री कार टाटा इंडिका को पेश किया, जब केवल Maruti Suzuki कंपनी का एकछत्र राज था.तत्पश्चात टाटा टी ने टेटली, टाटा मोटर्स ने ‘जैगुआर लैंड रोवर’ और टाटा स्टील ने ‘कोरस’ का अधिग्रहण किया, जिससे टाटा ग्रुप की साख भारतीय उद्योग जगत में बहुत बढ़ी.

28 दिसंबर 2012 को, वे अपने 75वें जन्मदिवस पर टाटा ग्रुप के सभी कार्यकारी जिम्मेदारी से सेवानिवृत्त हुए. उनका स्थान 44 वर्षीय साइरस मिस्त्री ने लिया, परन्तु हाल ही में साइरस मिस्त्री द्वारा एक्सपेक्टेड ग्रोथ को अचीव नहीं कर पाने की वजय से निलंबित कर दिया गया हैं और रतन टाटा के फिर कुछ समय के लिए कार्यभार सम्भाल लिया.अभी हाल में ही उन्होंने भारत के इ-कॉमर्स कंपनी स्नैपडील में अपना पर्सनल इन्वेस्ट किया है. इसके साथ उन्होंने एक और इ-कॉमर्स कंपनी अर्बन लैडर और चाइनीज़ मोबाइल कंपनी Xiomi में भी निवेश किया है. इसके बाद उन्होंने ओला कैब, एयर पेटीएम् में भी पैसा निवेश किया हैं.रतन टाटा ने भारत के साथ ही दूसरे देशों के कई संगठनो में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है. वह प्रधानमंत्री की व्यापार और उद्योग परिषद और राष्ट्रीय विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता परिषद के एक सदस्य हैं और वें कई कम्पनियो के बोर्ड पर निदेशक भी हैं.

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