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सातों समंदर में है जितना पानी, सूरज पर है उससे भी बड़ा विशालकाय सोने का भंडार,जानिए अद्भुत खोज…..

सोना एक ऐसी अमूल्य धातु है जिसको पाने के लिए हर कोई चाहता है और हर किसी के मन को लुभाता है सोना ऐसी धातु है कि  महिलाओं को बहुत ज्यादा पसंद आता है महिलाएं गोल्ड के लिए दीवानी होती हैं उन्हें सोने के आभूषण बहुत आकर्षित करते हैं. लेकिन अब यह सवाल भी उठता है कि आखिर मूल्यवान धातु सोना धरती पर आया कहां से?वैज्ञानिकों के अनुसार कुछ खोज करने के दौरान यह पता चला है कि सोने जैसी धातु हमें सूरज से ही प्राप्त हुई है. लेकिन अब आपके मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि सूरज से किस प्रकार इतनी मूल्यवान धातु हमें मिल सकती है तो आइए हम आज आपसे इस विषय पर चर्चा करते हैं.

वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी पर सातों समंदर में जितना पानी है सूरज पर उससे भी ज्यादा सोने का बहुत बड़ा भंडार है. जैसा कि सभी जानते हैं पृथ्वी पर सबसे कीमती धातुओं में से सोना एक मूल्यवान धातु है. लेकिन वैज्ञानिकों ने जो एक खोज की है उसके अनुसार बहुत ज्यादा चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. वैज्ञानिकों की खोज में पाया गया कि हमारी पृथ्वी पर जीवन देने वाले सूरज के पास सातों समंदर में जितना पानी है उससे अधिक सूरज के पास सोना है.बहुत सदियों पहले वैज्ञानिकों ने सोने के भंडार की खोज की और इसके पीछे क्या कहानियां हैं यह हम आज आपसे चर्चा करेंगे.

आग से हुई थी खोज की शुरुआत….

खबरों के अनुसार एस्ट्रोनॉमी पत्रिका ने 1859 में एक खबर छपी थी इसमें प्रसिद्ध रसायनज्ञ रॉबर्ट बैसन और गुस्ताव ने जर्मनी के मैनहेम शहर में आग बढ़ती हुई देखी. आग उनकी हीडलबर्ग यूनिवर्सिटी लैब से करीब 10 मील 16 किलोमीटर दूर जल रही थी जिसे देखने के लिए उन्होंने अपने नए स्पेक्ट्रोस्कोप का इस्तेमाल करने का विचार किया.इससे टेक्नोलॉजी के द्वारा प्रकाश को विभिन्न तरंगदैर्ध्य में बाँठकर रसायनिक तत्वों की पहचान की जा सकती है उन्होंने खिड़की पर ही स्पेक्ट्रोस्कोप लगा दिया और जांच में आग की लपटों में बेरियम और स्ट्रोंटीअम की पहचान कर ली रॉबर्ट जिन्होंने आज दुनिया भर की प्रयोगशालाओं में उपयोग किए जाने वाले बेनसन बर्नर को डिजाइन किया है,उन्होंने सुझाव दिया कि एक ही स्पेक्ट्रोस्कॉपी का उपयोग सूर्य और चमकीले सितारों के वायुमंडल पर भी किया जा सकता है.

सूरज पर सोने की खोज….

इस घटना के 10 वर्ष बाद 18 अगस्त 1868 को पूर्ण सूर्य ग्रहण के दिन कई खगोल शास्त्रियों ने सूरज पर स्पेक्ट्रोस्कोपी की मदद से हीलियम की खोज करने में सफलता प्राप्त की. इसके बाद सूरजके वातावरण में एक के बाद एक कार्बन नाइट्रोजन लोहा और अन्य धातुओं की खोज कर ली गई इनमें से सोना 18वीं सदी के अंत और 19वीं सदी के आरंभ में जैसे-जैसे भरतरी की उत्पत्ति और इतिहास की समझ बढ़ी वैसे वैसे यह सवाल भी उठने लगे कि.
आखिरकार अरबों वर्षों तक सूरज और अन्य तारे कैसे चमकते रहे?

सूरज पर है 2.5 ट्रिलियन टन सोना..

काफी लंबे समय से चल रही रिसोर्ट में  इन वैज्ञानिकों ने पाया कि सूरज पर 2.5 से 11 टन सोना है इतना सोना पृथ्वी के सभी महासागरों को भर सकता है और फिर भी यह खत्म नहीं होगा.एक और दिलचस्प खोज के बाद जिसमें यह देखा गया कि आखिर पृथ्वी पर सोना कैसे आया वैज्ञानिकों को खोज में पता चला कि सूरज के जैसे तारों से न्यूट्रॉन तारों का निर्माण हुआ और उनके आपस में टकराने के कारण से पृथ्वी पर सोना आया.

धरती पर कैसे आया सोना….

रिसर्च में पता चला कि जब कोई तारा अपने जीवन के अंतिम चरण में होता है तो उसका कोर टूट कर बिखर जाता है और फिर एक सुपरनोवा विस्फोट होता है.और फिर तारों की बाहरी पड़ते अंतरिक्ष में फैलने लगती हैं.इस दौरान न्यूट्रॉन कैप्चर रिएक्शन होता है लोहे से भारी अधिकांश तत्व से उत्पन्न होते हैं जब दो ऐसे न्यूट्रॉन तारे टकराते हैं तो न्यूट्रॉन कैप्चर रिएक्शन से स्ट्रोंटीयम, थोरियम, यूरेनियम और सोना पैदा होता है.

तारों से जमीन पर उतरा है सोना.

रिसर्च के अनुसार हमारे ब्रह्मांड के बनने के बाद इस तरह के कई टकराव हुए हैं और जो सोना पृथ्वी के अंतरिक्ष में आया वह धीरे-धीरे धरती पर पहुंच गया, मतलब सोना सिर्फ इसलिए खास नहीं है क्योंकि यह पृथ्वी पर काफी दुर्लभ माना जाता है सोना इसलिए भी है काफी खास क्योंकि यह तारों से सीधे जमीन पर उतरता है.

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