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पिता की याद में बेटे ने बनवाई पिता की ऐसी मूर्ति…देखने में लगता है जैसे अब ही बोल देंगे…

कहानी उस बेटे की है जिसने पिता की याद में उनका ऐसा स्टैच्यू बनवाया कि पूरे परिवार को ऐसा लगता है कि वो उनके बीच वापस आ गए.महाराष्ट्र के सांगली जिले में रहने वाले अरुण कोरे ने पिछले साल कोरोना महामारी में अपने इंस्पेक्टर पिता को हमेशा के लिए खो दिया था.ऐसे में उन्होंने अपने पिता को सम्मान देने और उन्हें हमेशा परिवार के बीच रखने की मंशा के साथ उनका सिलिकॉन का स्टैच्यू बनवाया.यह स्टैच्यू सोफे पर बैठी मुद्रा में है, जिसे देखकर कोई भी धोखा खा जाए कि ये प्रतिमा है या जीवित व्यक्ति.अरुण का दावा है कि यह महाराष्ट्र का पहला सिलिकॉन स्टैच्यू है.

रुण कोरे ने 6 सितंबर, 2020 को अपने 55 वर्षीय पिता रावसाहेब शामराव कोरे को खो दिया था.उनकी मृत्यु कोरोना के कारण हुई थी.अरुण ने बताया, ‘उनकी मृत्यु हमारे लिए एक सदमा है.हम उन्हें बहुत याद करते हैं.एक दिन यूट्यूब पर मैं वीडियो देख रहा था, जिसमें कर्नाटक का एक व्यापारी पत्नी के निधन के बाद उसका स्टैच्यू बनवाता है.फिर मैंने भी अपने पिता का स्टैच्यू बनवाने का फैसला किया.

अरुण ने अपने दोस्त विजय पाटिल को फोन किया, जिनसे उन्हें बेंगलुरु के एक आर्टिस्ट (श्रीधर) का नंबर मिला.उसने दो महीने के भीतर स्टैच्यू तैयार कर दिया.वह कहते हैं,‘मैं पिछले हफ्ते स्टैच्यू लेने गया और अचंभित रह गया.वह इतना असली था कि हमें कभी महसूस ही नहीं होगा कि वो हमारे बीच नहीं हैं। यह बस बोल और हिल नहीं सकता.लेकिन ऐसा लगता है कि वह आराम कर रहे हैं.

कोरे ने बताया कि उन्होंने प्रतिमा को सिलिकॉन से बनवाने का फैसला किया, क्योंकि ये टिकाऊ है,और इसे आसानी से साफ किया जा सकता है.सबसे जरूरी बात कि यह एक इनडोर मूर्ति है.बता दें, यह परिवार सांगली शहर में पुलिस कॉलोनी के पास एक बंगले में रहता है.उन्होंने घर में एक छोटा सा संग्रहालय बनाया है, जिसमें रावसाहेब का सारा सामान जैसे वर्दी, पदक और पुरस्कार आदि को रखा गया है.

रावसाहेब की पत्नी लक्ष्मी ने कहा, ‘मेरे पति के निधन के बाद हमारा परिवार काफी परेशान था.मेरे बेटे और दामाद ने फैसला किया कि उन्हें हमारे बीच होना चाहिए.इसलिए हमने प्रतिमा बनवाई.कोरे के अनुसार इस स्टैच्यू को बनवाने में 15 लाख रुपय की लागत आई, जिसकी लाइफ लगभग 50 वर्षों तक है.

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