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मन्नत पूरी हुई तो रांच के भक्त ने विंध्यवासिनी मंदिर में लगवाया 101 KG का चांदी का दरवाजा ,दूर दूर से देखने आ रहे है लोग

दोस्तों इंसान आस्था में सब कुछ करता है एक आस्थ ही है जो इंसान को सही मायने में इंसानियत का पथ पर चलाती है.दोस्तों इंसान और भगवन का एक अटूट रिश्ता होता है कोई ये बात मने चाहे ना माने मगर भगवन अपने भक्तो अपने प्रियजनों को कभी अकेला नहीं रखता है,साथ ही इंसान भी कभी कभी कुछ पाने के लिए धार्मिक स्थानों पर कुछ काम करवाता है.कभी बिना किसी मतलब के भी कई धार्मिक लोग ऐसे स्थानों पर काम करवा देते है,ऐसा ही एक किस्सा आज हम आप को बताने जा रहे है जहाँ पर एक भक्त ने बेहद बड़ा काम कर दिया.

विंध्यवासिनी मंदिर पर नंबर एक प्रवेश द्वार

पर सवा क्विंटल का दरवाजा लगवाया.इसकी कीमत 80 लाख रुपये आंकी गई.यह दरवाजा सवा पांच फीट लंबा व दो फीट चौड़ा है.इसे राजस्थान से बनवाया गया है.इसको लगाने के लिए राजस्थान के झुंझुनू जिले से पांच कारीगर भी लाए गए हैं. जहां चांदी का दरवाजा लगाया गया, वहां पहले पीतल का गेट लगा था.विंध्यवासिनी मंदिर पर कसेरा समाज के लोगों ने चार जोड़ा पीतल का गेट लगवाया था.उस पर लिखा है कि जो चांदी या सोने का गेट लगवाएगा वही पीतल का गेट हटवाएगा.

परिवार के साथ विंध्याचल आए भक्त संजय चौधरी ने सबसे पहले मां विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन किया.इसके बाद विंध्यवासिनी मंदिर पर दरवाजा लगवाने की प्रक्रिया शुरू कराई.उनका कहना है कि वे 30 साल से विंध्याचल आ रहे हैं.अपनी श्रद्धा से विंध्यवासिनी पर दरवाजा लगवा रहे हैं.तीर्थ पुरोहित विकास पांडेय ने दर्शन-पूजन कराया.दानदाता परिवार के साथ विंध्याचल के एक होटल में रूके हैं.मंगलवार की रात दरवाजा लग जाएगा.बुधवार को मंदिर की सजावट कराएंगे और श्रृंगार पूजन के बाद भंडारा भी कराएंगे.

अभी पिछले साल अगस्त महीने में बिहार के एक मंत्री ने मां विंध्यवासिनी को एक किग्रा सोने का मुकुट व चरण दान किया था.इसकी कीमत 50 लाख रुपये आंकी गई थी.विंध्यवासिनी दरबार लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है.यहां आम दिनों में भी हजारों की संख्या में दर्शन-पूजन के लिए भक्त पहुंचते हैं और अपनी मनोकामना पूरी होने की कामना करते हैं. मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु अलग-अलग तरीके से अपनी श्रद्धा मां के चरणों में समर्पित करते हैं.ज्यादातर भक्त अपने सामर्थ्य अनुसार मां को आभूषण, परिसर में यात्री सुविधाओं से जुड़े उपकरण इत्यादि दान करते हैं.अनुमान के मुताबिक सालभर में करोड़ों के आभूषण मां के चरणों में चढ़ाए जाते हैं.

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