खबर

दोनों हाथ ना होने के बाद भी पुरे जूनून से पाल रही है अपनी बच्ची को ये माँ ,दोनों पैरों से करती है परवरिश

माँ वह है जो हमें जन्म देती है हमारी जिन्दगी की सबसे पहली गुरु हमारी माँ होती है और हम उसके शिष्य होने के नाते अपनी माँ को कोई गुरु दक्षिणा भी नहीं दे पाते क्योंकि माँ का कर्ज एक ऐसा कर्ज है जो हम अपनी पूरी जिन्दगी की कमाई देकर भी अदा नहीं कर सकते.परन्तु हम अपनी माँ को उसकी अच्छाई बताकर उसे उसके माँ रूप से मिलाकर उसे थोड़ी खुशी जरूर दे सकते है लेकिन दोस्तों हम अपनी माँ का कर्ज कभी नहीं चूका सकते है इसीलिए हमें उनकी कद्र करनी चाहिए क्योंकि अगर माँ न होती तो हम न होते और हमें अपनी माँ को हर वो खुशी देने की कोशिश जरूर करनी चाहिए जिससे की हमारी माँ के चेहरे की मुस्कान बनी रहे.

माँ एक ऐसा अनमोल रत्न है जिसके बारे में शब्दों में बयाँ करना बहुत कठिन है.कहते है कि भगवान हर किसी के साथ नहीं रह सकते थे इसलिए उन्होंने माँ जेसे अनमोल रत्न को बनाया. माँ भगवान के समान होती है.कितना भी पूजा पाठ कर लो लेकिन अगर आप अपनी माँ को खुश नहीं रख सकते तो सब नष्ट है क्योंकि माँ उस भगवान का बनाया हुआ वो अनोखा किस्सा है जिसे आज तक कोई नहीं समझ पाया क्योंकि अगर डांटती वो है तो मनाती भी वो ही है क्योंकि अगर मारती वो है तो प्यार भी वही करती है, अजीब होती है माँ लेकिन जिसके नसीब में होती है उसकी जिन्दगी खुशनसीब होती है.

माँ वो अहसास है जो हर किसी को नहीं मिलता जिसे मिलता है वो खुशकिस्मत होता है.अगर कोई दुनिया में हमसे बेपनाह प्यार करता है वो हमारी माँ ही होती है जो सिर्फ और सिर्फ हमारे लिए जीती है.हमारी हर ख़ुशी में अपनी ख़ुशी मानती है जो हमारी गलतियों को पापा से छुपाकर हमें पापा की डांट से बचाती है, हमें भूखा न छोड़कर खुद भूखी रह लेती है, हमें दो रोटी खिलाकर खुद आधी खा लेती है वो होती है माँ.माँ एक ममता का आंचल है जो आँचल हमें आने वाले हर तूफान से बचाता है जो हमें उस तूफान से लड़ना सिखाता है जो दुनिया की हर बुरी नजर से हमें काले टिके की तरह बचाता है.मैं क्या तारीफ करू उस माँ की जिसने नो महीने मुझे अपनी कोख में रख कर पाला है जिसने मुझे हर दर्द में संभाला है.अब बस इतना ही कहना चाहूँगा मेरी दुनिया में जितनी भी शोहरत है वो मेरी माँ के बदोलत है.


दोस्तों आज हम आप को ऐसी ही एक माँ के बारे में बताने जा रहे है जिसे खुद मालिक ने सक्षम नहीं बनाया मगर ये महिला अपने बच्चे को बेहद प्यार से पाल रही है.बेल्जियम की रहने वाली सराह ताल्बी.उनकी ज़िंदगी किसी मिसाल से कम नहीं है.सराह ताल्बी का जन्म ही ज़िंदगी की सबसे बड़ी ज़रूरत माने जाने वाले दो हाथों के बगैर हु था. उनके हाथ नहीं थे,लेकिन उन्होंने अपने पैरों पर न सिर्फ खड़े होकर दिखाया,बल्कि वे अपनी 3 साल की बच्ची के सारे काम खुद ही करती हैं.उनका ये संघर्ष असली है और उसके पीछे एक मां जज़्बा भी बिल्कुल खरा है.

वे अपनी 3 साल की बच्ची के छोटे-बड़े सारे काम खुद ही करती हैं.वे बात अलग है कि हाथों का काम वे पैरों से लेती हैं,लेकिन कुछ भी ऐसा नहीं है,जो वे न कर सकें.बच्ची को नहलाने, बाल सुखाने और तैयार करने से लेकर उसके लिए टेस्टी खाना बनाने का काम भी सराह खुद ही करती हैं.बच्ची के जन्म के बाद वे उसे उठाने में थोड़ा डरती थीं,

 

लेकिन अब उनकी बेटी को बिस्तर से उठाने से लेकर स्कूल भेजने तक खुद ही जाती हैं,वो भी बिना हाथों के.वे बताती हैं कि बेटी लिलिया भी समझ चुकी है कि उसकी मां कुछ अलग हैं. वो इन हालात को समझती है और उसी तरह रिएक्ट भी करती है.पहले वे अपने पति से बच्ची के कामों में मदद लेती थीं,लेकिन अब उन्हें खुद ये करना अच्छा लगता है. वे सोशल मीडिया पर लोगों को अपनी ज़िंदगी के बारे में वीडियो के ज़रिये अपडेट्स देती रहती हैं.

To Top