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हिंदी न आते हुए भी रतन टाटा ने बोली टूटी-फूटी हिंदी कहा-हिंदी न बोल पाने पर मैं माफी मांगता हूं

आज हम आपसे चर्चा करेंगे जानी-मानी हस्ती रतन टाटा. जो कि इक काफी शानदार व्यक्तित्व के मालिक हैं. जानी-मानी हस्ती रतन टाटा के विषय पर चर्चा करेंगे रतन टाटा अपने आप में ही एक जाना माना नाम है. रतन टाटा ने अपने जीवन में कई उपलब्धियां हासिल की हैं. किसी पहचान के मोहताज नहीं है रतन टाटा.

खबरों के अनुसार इन दिनों रतन टाटा का एक स्पीच जो कि काफी सुर्खियों में बना हुआ है रतन टाटा ने इस चुप्पी को अंग्रेजी से शुरू किया लेकिन फिर उन्होंने हिंदी में अपने भाषण को शुरू कर दिया हिंदी टूटी फूटी थी इसी कारण उन्होंने ठीक से हिंदी में भाषण ना देने को लेकर माफी भी मांगी

बहुत ही महान व्यक्तियों में से एक हैं. रतन टाटा किसी पहचान के मोहताज नहीं है अपना में ही एक बहुत बड़ी उपलब्धि है. उन्होंने अपने जीवन में वह सभी चीजें प्राप्त की जो एक मनुष्य अपने जीवन को साकार करने के लिए सपना देखता है. रतन टाटा ने अपने एक भाषण में उन्होंने हिंदी ना आते हुए भी हिंदी भाषा को बोला और टूटी-फूटी हिंदी बोली उसके बाद माफी भी मांगी हिंदी ना बोल पाने के लिए. तो आइए इस पूरी खबर पर चर्चा करते हैं.

आपकी जानकारी के लिए बता दें रतन टाटा ने कहा, मैं अपने जीवन के आखिरी साल असम को ऐसा राज्य बनाने के लिए समर्पित करता हूं, जो सबको पहचाने और जिसे सब पहचानें.रतन टाटा ने असम में कैंसर अस्पतालों के उद्घाटन के अवसर पर एक भावुक स्पीच दी. उन्होंने अंग्रेजी में स्पीच दी और कहा कि- हिंदी में भाषण नहीं दे पाऊंगा.इसके लिए मैं माफी मांगता हूं. लेकिन मैं जो भी बोलूंगा वो मेरे दिल की बात होगी.

आपको बतादे रतन टाटा की आवाज में कंपन थी.वह रुक-रुककर बोल रहे थे. आवाज में थरथरा रही थी.रतन टाटा ने अपने स्पीच की शुरुआत अंग्रेजी में की लेकिन कुछ देर अंग्रेजी बोलने के बाद वह टूटी फूटी हिंदी बोलने की भी कोशिश की.उन्होंने कहा, मेरा संदेश एक ही होगा, मेरे दिल से निकला हुआ. रतन टाटा जब स्पीच दे रहे थए तब तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा मैदान गूंज उठा था.खुद पीएम मोदी ने भी ताली बजाकर उनकी स्पीच की तारीफ की.रतन टाटा ने कहा,असम में 17 कैंसर देखभाल केंद्रों का एख नेटवर्क सभी को कम खर्ष पर उचार उपलब्ध करवाएगा.क्योंकि यह कैंसर अमीर लोगों का रोग नहीं है. असम के इतिहास में आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है.कैंसर के उपचार के लिए उच्चतर स्तर की स्वास्थ्य देखभाल सुविधा जो अब तक राज्य में उपलब्ध नहीं थी. वह यहां लाई गई है.असम अब यह कह सकता है कि भारत का एक छोटा राज्य भी विश्व स्तरीय कैंसर उपचार सुविधाओं से लैस है.इस दौरान पीएम श्रीमान नरेंद्र मोदी ने सात कैंसर देखभाल केंद्रों का उद्घाटन भी किया. इन केंद्रों का विकास राज्य सरकार और टाटा ट्रस्ट्स के संयुक्त उद्दम असम कैंसर केयर फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है.

 

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