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यूपी में भदोही के रहने वाले क्रिकेटर यशस्वी जायसवाल को बेचने पड़े थे गोलगप्पे, अब राजस्थान ने 8 करोड़ रुपये में किया रिटेन

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के सुरयावां नगर के ऑल राउंडर यशस्वी जायसवाल का यश गुरुवार को आईपीएल सीजन-13 की नीलामी में भी खूब फैला.गुरुवार को कोलकाता में खिलाड़ियों की नीलामी हुई.यशस्वी को राजस्थान ने अपनी टीम शामिल किया है.लंबी बोली के बाद राजस्थान ने उन्हें 2 करोड़ 40 लाख रुपए में खरीदा है.बेस प्राइस 20 लाख रुपए थी.हाल ही में यशस्वी का अंडर-19 वर्ल्ड कप 2020 के लिए चयन हुआ है.वे अभी तक मुंबई की टीम से खेलते थे.आईपीएल में चयन से उनके गांव में खुशी का माहौल है.लोगों ने आतिशबाजी कर अपनी खुशी का इजहार किया है.

मां के निधन के बाद प्रियम ने छोड़ दी थी प्रैक्टिस, पिता दूध बेचकर बनाया क्रिकेटर, हैदराबाद ने 1.9 करोड़ में खरीदापिता भूपेंद्र को बधाई देने के लिए लोग उनके घर पहुंच रहे हैं.दैनिक भास्कर से उन्होंने कहा- बेटे की मेहनत रंग ला रही है.वह आईपीएल में अच्छा प्रदर्शन करे और टीम इंडिया में शामिल हो.कितने में बिका, यह मायने नहीं रखता.वह अंडर-19 वर्ल्ड कप भारत को दिलाए और आगे के विश्वकप के लिए तैयारी करे.बचपन से ही यशस्वी में क्रिकेटर बनने का जुनून था.10 साल की उम्र में उसने पिता से मुंबई जाने की जिद की. पिता भी बेटे की प्रतिभा को समझ रहे थे.उन्होंने उसे नहीं रोका.मुंबई के वर्ली इलाके में रहने वाले एक रिश्तेदार संतोष के यहां यशस्वी को भेज दिया.यशस्वी 5-6 महीना वहीं रहे.वह यहां से आजाद मैदान में प्रैक्टिस करने जाते थे.रिश्तेदार का घर छोटा था.इतनी जगह नहीं थी वहां लंबे समय तक रह पाते.

आजाद मैदान में कई महीने उसे ग्राउंड के बाहर ही दूसरे बच्चों के साथ खेलना पड़ा.नेट तक नहीं पहुंच पाया.इसके बाद रिश्तेदार संतोष यशस्वी को आजाद ग्राउंड ले गए.वहां पर उनका एक परिचित ग्राउंडमैन सुलेमान था.उनसे बात करके यशस्वी को वहीं पर रहने की व्यवस्था करवाई.यहां करीब तीन साल तक यशस्वी टेंट में रहा और क्रिकेट की बारीकियां सीखीं.पिता कहते हैं कि उन तीन सालों में उसने बहुत संघर्ष किया.जमीन पर सोता था कीड़े और चींटी काटते थे.फोन करके कहता था-पापा बहुत चींटी काटती है.मैंने कहा- बेटा तकलीफ बहुत है.वापस आ जाओ उसने कहा- पापा बूट पालिश कर लूंगा.लेकिन, मैं बिना कुछ बने वापस नहीं आऊंगा.ये तकलीफें पापा मुझे एक दिन आगे बढ़ाएंगी.आप परिवार का ख्याल रखिए.

पिता के मुताबिक, ‘यशस्वी 13 साल की उम्र में अंजुमन ए इस्लामिया की टीम से आजाद ग्राउंड पर लीग खेल रहा था.इस दौरान ज्वाला सर आए, उनकी शांताक्रूज में एकेडमी है.वह यशस्वी के खेल से प्रभावित हुए.उन्होंने उनसे पूछा-कोच कौन है तुम्हारा? उसने जवाब दिया कोई नहींयशस्वी ने कहा कि मैं बड़ों को देखकर सीखता हूं. उन्होंने बताया कि इसके बाद ज्वाला सर ने मुझसे बात की.दो दिन बाद वह यशस्वी को अपनी एकेडमी ले गए.यह उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट था.

 

 

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