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चाय वाले की बेटी बनी फ्लाइंग ऑफिसर, IAF में जाने के लिए ठुकरा चुकी है 2 सरकारी नौकरी

अगर मनुष्य अपने लक्ष्य को लेकर एक ही पद पर चलता रहे और मन में ठान ले  मुझे अपने इस संकल्प को पूरा करना है.पूरे मेहनत और लगन से उसे अपने पथ पर चलता ही रहे और पूरी तरह  लगन से उस कार्य के प्रति अपने आप को समर्पित कर दें.  तो अवश्य ही इसका वह लक्ष्य प्राप्त कर पाता है.मेहनत और लगन से किया हुआ कार्य में  सफलता प्राप्त होती है.

 

हम आपसे बात करने जा रहे हैं एक चाय वाले की बेटी जिसने अपने परिवार में माता-पिता का ही नहीं अपने देश का भी से गर्व से ऊंचा कर दिया है वायु सेना से जुड़कर.आपको बता दें वायु सेना के प्रमुख एस भदौरिया की मौजूदगी मे आंचल को बतौर अधिकारी चयन किया गया है.इस अफसर पर आंचल ने कहा कि मैं हमेशा से अपने पिता का सर गर्व से ऊंचा करना चाहती थी.

आँचल ने कहा ये मेरा सपना था मै वायु सेना से जुडू.इंडियन एक्सप्रेस को इंटरव्यू देते हुए आंचल ने बताया कि उनके पिता सुरेश गंगवाल घर खर्चा चलाने के लिए मध्यप्रदेश के नीमच जिले में एक छोटी सी चाय की दुकान चलाते हैं.

आपको बता दें आँचल ने पढ़ाई के समय से ही भारतीय सेना से जुड़ना चाहती थी.लेकिन भारतीय वायु सेना में नियुक्ति से पहले उन्होंने मध्य प्रदेश पुलिस में सब इंस्पेक्टर के तौर पर भी कार्य किया जूजू गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज से अपनी स्नातक की डिग्री हासिल करने के पश्चात आँचल ने सेना ज्वाइन करने का प्रयास जारी रखा था. शुरू के 6 बार की उनकी प्रयास करना विफल रहा था. आंचल ने फिर भी हिम्मत ना हारी 6 बार असफलता के बाद खुद को खुद को इतना सफल प्रयत्न किया कि एयर फोर्स में जगह बना ली और अब वह भारतीय वायु सेना में बतौर ऑफिसर अपनी सेवा दे रही हैं.

देश की सेवा के लिए बहुत से ऐसे व्यक्ति होते हैं जो अपनी जान भी निछावर कर देते हैं देश सेवा के लिए कई प्रयत्न करने के बाद भी इस तरह की परीक्षाएं गहन अध्ययन के बाद संपूर्ण रूप से करने के बाद ही हासिल होता है. यह मुकाम और देश की सेवा करने के लिए हमेशा तत्पर रहने वाले ऐसे व्यक्ति बहुत कम होते हैं.आँचल ने एक चाय वाले की बेटी होते हुए भी  सभी कठिनाइयों को झेलते हुए इस मुकाम को हासिल किया है.

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