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लॉकडाउन में बीयर की बोतलों और मिट्टी से बनाया घर, खर्च आया सिर्फ 6 लाख रुपये

हमारे देश में कोरोना महामारी के चलते काफी लंबा लॉक डाउन लगा और ऐसे में सभी लोगों को लॉक डाउन का नियमों का पालन करते हुए अपने घरों में ही रहना पड़ा और इस महामारी से निकलने के लिए सभी को यह लॉकडाउन के नियमों का पालन करना जरूरी था.लॉकडाउन के नियमों का पालन करें ऐसे मे लोगों का उनके घर पर रहते हुए काफी समय मिलता था ऐसे में बहुत से लोगों ने अपने समय का सदुपयोग किया और अपने रूचि के अनुसार कार्य में अपना समय बिताया.

अब केरल से एक मामला सामने आया है जहां बहुत ही कम लागत में और बहुत ही अनोखे तरीके से घर बनाया. जिसमें पैसे का भी बहुत कम खर्च आया तो आइए हम आपको बताते हैं क्या है पूरा मामला.आपको बता दें केरल के अजी आनंद ने पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए और पर्यावरण के अनुसार काफी कम लागत में ऐसा घर बनाया जिसमें मिट्टी और बीयर की बोतलों का उपयोग किया गया.

अजीत ने “द बेटर इंडिया “से बातचीत के दौरान बताया “लॉकडाउन मैंने और मेरी पत्नी थानिया लिला ने अपने एक जमीन के टुकड़े पर घर बनाने का निर्णय लिया.यह जमीन मेरे ससुर जी ने मुझे उपहार में दी थी.और हमने यह निर्णय लिया कि एक ऐसा इको फ्रेंडली घर तैयार किया जाए लेकिन हम इस पर ज्यादा पैसा भी खर्च करना नहीं चाहते थे”.

इसके पश्चात अजीत ने 1000 स्क्वायर फीट जमीन पर दो कमरों का घर अपने परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर तैयार किया.उनका यह घर बनने मे 6 महीने का समय लगा और ₹6 लाख रूपये भी लगे.अपनी ही जमीन से खोदी हुई मिट्टी और 2500 बियर की बोतले इसके अलावा बहुत सारी चीजें जो रीसाइक्लिंग कर कर इस घर को बनाने में इस्तेमाल की गई.

आपको बता दें कुन्नूर के 36 वर्ष के अजीत की कपड़ों की एक दुकान है और उनकी पत्नी एक निजी स्कूल में प्रिंसिपल है.उनके दो बच्चे हैं और वह अपने संयुक्त परिवार में पुश्तैनी घर में ही रहते हैं.अजीत का शुरू से ही एक सपना था कि उनका खुद का एक घर हो.वर्ष 2020 में करोना महामारी के चलते अजीत को लोकडाउन के नियमों का पालन करते हुए उन्हें घर में रहने के लिए काफी समय मिला और उन्होंने इस समय का सदुपयोग किया.

तब अजीत ने अपने सपने को पूरा करने के लिए मन बना लिया. लेकिन वह अपने जमा किए हुए पैसों को ज्यादा खर्च नहीं करना चाहते थे. इसलिए उन्होंने इस विषय पर अपने भाई आकाश कृष्ण राज से सलह ली.उनके भाई आकाश स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर (भोपाल) के फाइनल ईयर के छात्र थे.अजीत ने बताया कि उनके भाई आकाश ने उन्हें सलाह दी अर्थबैग तरीके से घर बनाया जाए इसमें खर्चा भी कम आता है और काफी मजबूत दीवारें और घर मजबूती से बनता है.बाढ़ प्रभावित इलाकों में इसी प्रकार से घर बनाया जाता है जो काफी मजबूत रहता है.

बांस के केन और बीयर की बोतलों से बनाया घर

वर्ष 2021 में लॉकडाउन में जब थोड़ी ढील दी गई.तब अजीत ने नए घर के निर्माण के लिए जरूररत का सभी सामान जमा कर लिया. इसमें 850 मीटर की प्लास्टिक की थैलियां  थीं, जिसमें उन्होंने खुदाई से निकाली गई मिट्टी को भरा और दीवार बनाने के लिए ईंटों की तरह इस्तेमाल किया. इसके लिए कुछ पुरानी प्लास्टिक की थैलियों को रीसाइकिल किया गया और कुछ बाजार से भी खरीदनी पड़ी ताकि इनका आकार ना बिगड़े एक जैसे आकार मे बनी रहें मिट्टी से भरी इन थैलियों के ऊपर कंटीले तार लगाए गए ताकि ये हिले नहीं.अजीत ने बताया कि हमने सोकपिट भी बनवाया उसके लिए काफी गहरा गड्ढा खोदा गया उस से निकली हुई मिट्टी और आसपास जो निर्माण कार्य  चल रहा था वहां से भी निकली मिट्टी को हमने उपयोग में लिया.जीत ने बताया खुदाई का सभी कार्य उन्होंने और उनके परिवार वालों ने मिलकर किया.घर बनाने के कार्य में उनके बच्चों ने भी उनका सहयोग किया.घर के काम में भारी सामान उठाने के लिए दो मजदूरों को भी रखा था.अजीत और उनके दोस्त और उनका कज़िन कई घंटे प्लॉट पर काम करते थे.इनमे  से कुछ थेली में मिट्टी भरते थे और दूसरे इसको डिजाइन के अनुसार दीवार में चुनते थे.इस घर को बनाने के लिए कचरे का भी इस्तेमाल कियाअजीत ने बताया कि जब छत और दीवारों के बीच गैप रह गया था जिसको भरने के लिए उन्होंने बांस की बोतलों, बीयर की बोतलों और नारियल के जटाओं का इस्तेमाल किया.अजी ने बताया कि इन दीवारों को भरने के लिए तीन दीवारों पर हमने इन बोतलों का इस्तेमाल किया इन बोतलों को दोस्तों से कबाड़ी वाले से और कुछ घर से लेकर इस्तेमाल किया और उनको आधा काटकर मिट्टी में थोड़ा सीमेंट मिलाकर एक दूसरे के सहायता से उसको चुन दिया.अजीत ने बताया उन्होंने बांस और कायर को भी उन्होंने दीवारों में चुन दिया. अजी ने अपने घर में कलर नहीं किया क्योंकि वह इसके नेचुरल लुक को बरकरार रखना चाहते थे. घर की छत पर टेराकोटा की सेकंड हैंड टाइल्स लगाई गई है. जो घरों से टूटे हुए टाइल्स ली  उनको इखट्टा कर कर इन्हें इस्तेमाल में लिया गया. वहीं से लकड़ी के टुकड़ों को भी खरीदकर अपने घर के दरवाजे खिड़कियां और अलमारियां तैयार कर ली.अजी ने बताया कि जुलाई में पूरा घर बनकर तैयार हो गया था. उनकी पत्नी यह घर देखकर काफी ज्यादा खुश हुई थी. बच्चों को यकीन नहीं हो रहा के घर मिट्टी से बना हुआ है. वही बच्चों ने भी देखा कि जिस घर के लिए हमने मिट्टी को खोदा था और मिट्टी से कितना खूबसूरत प्यारा घर बनकर तैयार हुआ है.आकाश के दोस्तों ने घर के बाहर दीवारों पर कलाकृतियां बनाई हैं. अजीत नाम जल्द से जल्द अपने नए घर में रहना शुरू कर देंगे बस अब उन्हें इंतजार है घर में लाइट फिटिंग और पुलम्बीन्ग फिटिंग का

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