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देश के लिए मिसाल बने ये IAS अफसर,मुफ्त में दे रहे है विद्यार्थियों को कोचिंग ,दुनिया भर में हो रही है तारीफ

आज हम आपसे बात करने जा रहे हैं एक ऐसे विषय पर जिसमें जितना हो सके हमें सहयोग करना चाहिए और जो भी इस लिहाज से इस मुकाम पर हैं कि अपनी शिक्षा प्राप्त करने के बाद वह किसी अशिक्षित कोई शिक्षित को और आगे शिक्षा प्रदान करने के लिए उसकी मदद कर सकते हैं.तो सहायता के लिए अवश्य ही सोचना चाहिए और ऐसे प्रयत्न करने चाहिए जिससे हम अपने देश के में विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित कर सकें जहां तक हो सके संभव मदद कर सके. हमारी सरकार हमेशा ही शिक्षा को लेकर काफी ज्यादा प्रोत्साहित करती है.

कई योजनाएं ऐसी बनाती है जिससे जनता को लाभ हो सके.लेकिन फिर भी कुछ लोग सरकारी इन योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते हैं.अब ऐसे ही एक मामला सामने आया है जहां पर पूरी मदद करने की कोशिश की जा रही है. आपको बता दें झारखंड के कोडरमा के डिप्टी कमिश्नर ने बच्चों के लिए एक अनोखी शुरुआत की खबरों के मुताबिक आईएएस आदित्य रंजन ने अपने इलाके के बच्चों को डिजिटल साक्षर बनाने के लिए उन्हें फ्री में कोचिंग दे रहे हैं. इसके अलावा आदित्य रंजन ने अपने इलाके में नई योजना शुरू की है. जिसका नाम एक्सीलेंट 200 रखा गया है.

आईएएस आदित्य रंजन ने बताया वर्ष 2017 में 14वें वित्त आयोग के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर की भर्ती निकली थी. उस भर्ती में झारखंड के भी कई युवाओं ने आवेदन भरा था परंतु कंप्यूटर का बेसिक नॉलेज ना होने की कारण केवल 10% ही झारखंड के युवाओं नौकरी में चयनित हो सके. उन्होंने सोचा था यहां के युवाओं को मुफ्त में डिजिटल साक्षर बनाने पर ही काम करेंगे.आईएएस आदित्य रंजन ने उस परीक्षा में फेल हुए सभी विद्यार्थियों को कंप्यूटर की बेसिक ट्रेनिंग देने की क्लासेस शुरु की. चाईबासा में अपनी ड्यूटी के दौरान कुल 2100 लोगों को उन्होंने ट्रेनिंग दी थी.इनमें से 700 लोग कहीं ना कहीं नौकरी पर लग चुके हैं. आदित्य रंजन की बदली कोडरमा में हुई तो वहां उन्होंने वह काम जारी रखा.

 

उन्होंने अपने जिले में एक गवर्नर सोसायटी कंप्यूटर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया 2 महीने का एक प्रशिक्षण वर्ग होता है जिसमें 32 शेड्यूल्स सिखाए जाते हैं इस पाठ्यक्रम में कंप्यूटर का पूरा बेसिक हो जाता है. आईएएस आदित्य रंजन ने बताया कि अपने जिले में चलाई जाने वाली एक्सीडेंट 200 योजना के तहत कुल 14 बच्चों ने आवेदन दिया.जिसमें 800 बच्चों ने एग्जाम देकर पहले बैच के 200 बच्चे सेलेक्ट किए गए. आने वाले महीने से इन बच्चों की सिविल सर्विस एग्जाम के लिए ट्रेनिंग शुरू कर दी जाएगी.आईएएस आदित्य रंजन ने अपनी प्राथमिक शिक्षा गवर्नमेंट स्कूल से पूरी की. उन्होंने अपने उच्च शिक्षा में इंजीनियरिंग की औरैकल नाम की मल्टीनैशनल कंपनी में नौकरी पर भी लगे. लेकिन नौकरी पर उनका बिल्कुल भी मन नहीं लगता था. आदित्य रंजन देश की सेवा करना चाहते थे. इसीलिए उन्होंने नौकरी छोड़कर सर्विस की तैयारी शुरू कर दी. 2014 में यूपीएससी की परीक्षा दी और उन्हें ऑल इंडिया की जरूरत है.और सेवा कर रहे हैं. यह एक प्रेरणा का कार्य है लोगों को इससे प्रेरणा मिलेगी.

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