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‘बालिका वधू’ शो के डायरेक्टर पर भरी पड़ा कोरोना और लॉकडाउन , ठेले पर सब्जी बेच के कर रहे गुजारा

सफलता के बाद असफलता का मुँह देखना बहुत बड़े हादसे से कम नही. लेकिन इस साल जो सबसे ज़्यादा नुकसान हुए है. वो कोरोना और लॉक डाउन से हुए. इसका जितना असर आम जनता पर पड़ा है उतना ही फ़िल्म स्टार पर भी दिखा है. एक ऐसे ही निर्देशक पर भी दिखा है. कौन है वो निर्देशक बताते उनके बारे में.

टीवी के पॉपुलर शो बालिका वधु के डायरेक्टर रामवृक्ष की. इस लॉक डाउन के चलते रामवृक्ष मुंबई से अपने बच्चो को एग्जाम दिलाने रामगढ़ आये थे मगर आय का कोई साधन ना होने की वजह से वो वापस नही जा सके और रामगढ़ में रहकर परिवार का पेट पालने के लिए सब्ज़ी बेचने पर मजबूर है. उनके परिवार से मिली जानकारी से पता चला की वो यह काम बहुत मजबूरी में कर रहे है. मगर उनको विश्वास है की वो एक दिन इससे बाहर निकल आएंगे. रामवृक्ष गौड़ ने बताया, ‘मैं एक फिल्म के लिए आजमगढ़ आया था. हम यहां तब थे जब लॉकडाउन की घोषणा की गई थी और फिर वापस लौटना संभव नहीं हो पाया. जिस प्रोजेक्ट पर हम काम कर रहे थे, उसे रोक दिया गया और निर्माता ने कहा कि काम पर वापसी में एक साल या उससे अधिक समय लग सकता है. मैंने फिर अपने पिता के धंधे को संभालने का फैसला किया और ठेले पर सब्जियां बेचनी शुरू कर दी. मैं इस काम से अच्छी तरह से वाकिफ हूं और कोई पछतावा नहीं है रामवृक्ष गौड़ ने मायानगरी मुंबई के अपने सफर के बारे में बात करते हुए कहा, ‘मैं अपने दोस्त और लेखक शाहनवाज खान की मदद से 2002 में मुंबई गया था. मैंने लाइट डिपार्टमेंट में और फिर टीवी धारावाहिकों के प्रोडक्शन डिपार्टमेंट में काम किया. मैं पहले कई धारावाहिकों में एक सहायक निर्देशक बन गया. फिर, ‘बालिका वधू’ के लिए एपिसोड निर्देशक और यूनिट निर्देशक के रूप में काम किया.’

इस महामारी कोरोना के चलते हुए. लोगो को अपने कर्रिएर को खत्म करना पड़ा है. काम मै कोई छोटा बड़ा नही होता परन्तु इतने बदलाव से आदमी दुःखी ज़रूर हो जाता है

आपको बता दे कलर्स चैनल के सबसे प्रसिद्ध धारावाहिको में से एक बालिका वधु भी रहा है इस सीरियल में बाल विवाह पर लोगो को जागरूक कराने के उद्देश्य से निर्धारित किया गया. और इस धारावाहिक को बहुत सफलता भी मिली है. किन्तु समय कैसे आगे बढ़ जाता है आज इसके निर्देशक को कोई जानता भी नही. यह बहुत दुख की बात है

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