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एक रॉन्ग कॉल और हाथ से चलने वाले दिव्यांग को दे बैठी दिल, शादी करने के लिए खुद से पहुंची प्रेमी का घर

आज ज़्यादातर लोग शायद दावा करें कि वे शादी को एक पवित्र बंधन मानते हैं,अगर यही बात है तो फिर बहुत-से जोड़े तलाक लेकर अपना बंधन क्यों तोड़ देते हैं, कुछ लोगों के लिए शादी महज़ प्यार-मुहब्बत की एक कसम और एक कानूनी करारनामा है,इसलिए उन्हें लगता है कि इस कसम को तोड़ने में कोई हर्ज़ नहीं,जो लोग ऐसा नज़रिया रखते हैं, वे अपनी शादी-शुदा ज़िंदगी में ज़रा-सी गड़बड़ी होने पर इस बंधन को आसानी से तोड़ देते हैं,

परमेश्‍वर, शादी के इंतज़ाम को किस नज़र से देखता है, इसका जवाब हमें उसके वचन, बाइबल के इब्रानियों 13:4 में मिलता है। वहाँ लिखा है: “विवाह सब में आदर की बात समझी जाए,” जिस यूनानी शब्द का अनुवाद “आदर की बात” किया गया है, उसका मतलब है एक ऐसी चीज़ जो बहुत अनमोल है, और गहरा सम्मान पाने के लायक है, हम जिस चीज़ को बहुत अनमोल समझते हैं, उसे हम बहुत सँभालकर रखते हैं, और पूरा-पूरा ध्यान रखते हैं कि गलती से भी वह कहीं खो न जाए,शादी के इंतज़ाम के बारे में भी हमें यही नज़रिया अपनाना चाहिए,मसीहियों को चाहिए कि वे इस इंतज़ाम को आदर की बात समझें मानो यह कोई अनमोल खज़ाना हो जिसकी वे हर हाल में हिफाज़त करना चाहते है,

 

कुछ ऐसा देखने को मिला बिहार के सुपौल में, जहां झारखंड की एक लड़की क बिहार के एक दिव्यांग को दिल दे बैठी और शादी कर ली,दरअसल, यह मामला बिहार के सुपौल से है जहां एक रॉन्ग कॉल से एक दिलचस्प प्रेम कहानी की शुरुआत हुई,बता दें कि झारखंड के रांची की एक युवती को रॉन्ग कॉल पर सुपौल के एक दिव्यांग युवक से प्यार हो गया। जिसके बाद दोनों ने शादी कर ली,

बता दें कि रांची की रहने वाली गौरी नाम की एक युवती ने एक दिन गलती से एक नंबर पर मिस कॉल किया. वो नंबर सुपौल के बसबिट्टी गांव के रहने वाले मुकेश को जा लगा। जिसके बाद दोनों में बातचीत होना शुरू हो गई, यह बातचीत धीरे-धीरे प्यार में बदल गई, दोनों इसी तरह एक साल तक बात करते रहे। लेकिन जब युवती ने युवक से शादी की बात की तो युवक ने शादी करने से साफ मना कर दिया और अपनी सारी सच्चाई युवती को बता दी,सबूत के तौर पर दिव्यांग ने युवती को अपनी एक फोटो भेजी। लेकिन इसके बावजूद भी युवती ने इनकार नहीं किया और शादी करने के लिए सुपौल पहुंच गई, वहीं लड़की का पीछा करते हुए उसके पिता और भाई भी वहां पहुंच गए,

युवक दिव्यांग है, और वह अपने पैरों पर खड़ा भी नहीं हो सकता,बावजूद इसके युवती ने उससे शादी कर ली,वहीं दोनों की इस शादी को हर कोई हैरान है,वहीं दोनों को शादी ना करने के लिए खूब समझाया गया लेकिन दोनों नहीं माने जिसके बाद दोनों को सदर थाना लाया गया. प्रेमिका ने अपने पिता और भाई से साफ कहा दिया कि वो बालिग है और अपने प्रेमी मुकेश के साथ अपनी जिंदगी बिताना चाहती है, वहीं सोमवार को मुकेश अपनी मौसी के साथ पहुंचा और दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली,

बसबिट्टी गांव का रहने वाला मुकेश दोनों पैरों से दिव्यांग है, उसकी मां का निधन बचपन में ही हो गया था और उसके पिता बाहर रहकर मजदूरी करते है,वहीं, अधिवक्ता ने कहा शपथ पत्र के द्वारा प्रेमिका ने शादी को कन्फर्म कराया और उस लड़की के जज्बे को सलाम करते हुए समाज के लिए प्रेरणा दायक बताया और कहा कि विकलांग प्रेमी स्वीकारना बड़ी हिम्मत की बात है, उन्होंने सरकार से इस जोड़ी को आर्थिक सहयोग देकर मनोबल बढ़ाने का आग्रह किया है,वहीं अधिवक्ता ने उनके आत्मबल को देखते हुए कोई फीस नहीं ली,

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