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300 साल पहले नागवंशी राजा मैं बनवाया था जगन्नाथपुर मंदिर,बहुत ही रोचक है इसकी कहानी….

हमारा भारत देश ऐसा देश है जहां पूजा और आस्था का काफी महत्व है. भगवान की आस्था में विश्वास रखा जाता है. हर किसी व्यक्ति के मन में भगवान के प्रति और अपने धर्म को लेकर काफी खास महत्व रखते हैं. यहां के वासी हर कोई पूजा अर्चना में पूरा ध्यान लगाता है. भगवान की पूजा अर्चना को ही अपना पहला कर्तव्य मानते हैं ऐसे ही एक मंदिर के बारे आज हम बात करेंगे जिसको लेकर लोगों के मन में सच्ची आस्था और विश्वास है उस प्रेम भाव से सच्चे मन से लोग मंदिर में आते हैं और भगवान के आगे अपनी प्रार्थना रखते हैं.

आज हम आपको रांची के झारखंड की राजधानी जगन्नाथपुर के मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं. यह मंदिर रथ यात्रा के लिए प्रसिद्ध है जगन्नाथपुर के मंदिर के संस्थापक प्रत्याशी उत्तराधिकारी लाल प्रवीर नाथ शाहदेव ने बताया था कि 1691 में बड़कागढ़ में नागवंशी राजा ठाकुर एनी नाथ शाहदेव ने रांची में धुर्वा के पास भगवान जगन्नाथ मंदिर का निर्माण कराया था.ठाकुर एनी नाथ शाहदेव अपने नौकर के साथ पूरी गए थे.

नौकर भगवान का भक्त बन गया और बहुत दिनों तक उनकी उपासना की एक रात वह भूख से बहुत ज्यादा बिलखने लगा. मन ही मन प्रार्थना की भगवान भूक मिटाए  उसी रात भगवान जगन्नाथ ने रूप बदलकर अपनी भोग वाली थाली में खाना लाकर उसे खिलाया. लाल प्रवीर नाथ ने बताया कि मंदिर की स्थापना के साथ ही मानवीय मूल्यों की भी स्थापना कर समाज को जोड़ने के लिए हर वर्ग के लोगों को जिम्मेदारी दी गई.उराव परिवार को मंदिर की घंटी देने और तेल और भोग के लिए सामग्री देने की जिम्मेदारी दी गई आज भी बंधन उरांव और विमल उराव इस जिम्मेदारी को निभा रहे हैं.नौकर ने पूरी आपबीती ठाकुर साहब को सुनाई भगवान ने ठाकुर को सपनों में कहां की “यहां से लौटकर मेरे विग्रह की स्थापना कर पूजा अर्चना करो, पूरी से लौटने के बाद एनी नाथ ने पूरी मंदिर की तर्ज पर रांची में मंदिर की स्थापना की.

कुम्हार परिवार मिट्टी के बर्तन की व्यवस्था करते हैं…
मुंडा परिवार को झंडा फहराने पगड़ी देने और वार्षिक पूजा की व्यवस्था की जिम्मेदारियां दी गई.रजवार और अहीर जाति के लोगों को भगवान जगन्नाथ को मुख्य मंदिर से गर्भ ग्रह तक ले जाने की जिम्मेदारी दी गई.बढ़ई परिवार को रंग रोगन की जिम्मेदारी दी गई. लोहरा परिवार रथ की मरम्मत करते हैं. कुमार परिवार मिट्टी के बर्तन की व्यवस्था करते हैं.

भगवान जगन्नाथ से क्षमा भी मांगी…

जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सोमवार को रथयात्रा के अवसर पर धुर्वा रांची स्थित जगन्नाथ मंदिर पहुंचे थे मुख्य मंदिर के पट बंद रहने के कारण सीएम ने बाहर द्वार से ही शिश जुका कर भगवान से प्रार्थना की.मौके पर मंदिर के पुजारी ने गर्भ ग्रह के बाहर ही विधि विधान पूर्वक पूजा संपन्न कराई.सरकार के निर्देश के तहत मंदिर का पट आम लोगों के लिए बंद रखनेका निर्णय लिया गया. जिसके कारण मुख्यमंत्री ने भी मंदिर के बाहर से ही पूजा अर्चना की इस दौरान उन्होंने राज्य की सुख समृद्धि की भगवान जगन्नाथ से प्रार्थना की.मुख्यमंत्री ने सरकार द्वारा रथ यात्रा की अनुमति नहीं देने के लिए भगवान जगन्नाथ से क्षमा भी मांगी.

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