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इस एक वजह के चलते कुंवारी रही सुरों की मालकिन लता मंगेशकर ,जन्मदिन पर पढ़े इनकी अधूरी प्रेम कहानी

बॉलीवुड की सबसे बेहतरीन गायिका लता मंगेशकर का 28 सितंबर को जन्मदिन होता है,सुरु की देवी लता जी देश भर से उनके चाहने वाले बधाई दे रहे है, ऐसे में आज हम लता मंगेशकर जी के जीवन से जुडी कुछ ख़ास बाते बताने जा रहे है,उनके फैंस उत्सुक रहते हैं, लता मंगेशकर जी के बारे में लोग काफी कुछ जानते हैं,लता जी के चाहने वालो के दिमाग में कसार ये सवाल रहता है की आखिर उन्होंने शादी क्यों नहीं की,इसके पीछे क्या वजह थे ?

लता मंगेशकर जी ने अपने इंटरव्यू में बताया कि घर की जिम्मेदारियां निभाने में इतनी व्यस्त हो गयी की उन्होंने कभी शादी का नहीं सोचा,घर और छोटी बहन भाइयों की परवरिश का ज़िम्मा उनका था, वह कभी अपनी शादी के बारे में सोच नहीं पाए,छोटी बहनों को पढ़ाने के लिए उन्होंने खुद की पढ़ाई नहीं की।14 साल की उम्र में लता जी बड़े कार्यक्रमों और नाटकों में अभिनय करने लगीं।

लता मंगेशकर अपने पिता के साथ मराठी संगीत नाटक में काफ़ी छोटी उम्र मे ही काम करने लगी थी,लता अपने सभी पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी। उनकी परवरिश महाराष्ट्र में हुई, जहां एक तरफ राज अपने शौक में अपनी जिंदगी बिता रहे थे वही लता जी अपने बहन भाइयों की परवरिश पढ़ाई का ध्यान रख रही थी. लता जी ने शादी के बारे में नहीं सोचा, और अपनी जिम्मेदारियां निभाते रही.

लता जी की शादी ना करने का एक कारण ये भी था,मिली जानकारी के अनुसार लता जी की भी एक प्रेम कहानी थी,मंगेशकर को डूंगरपुर राजघराने के महाराजा राज सिंह से बेहद प्यार करती थीं। ये महाराजा लता के भाई ह्रदयनाथ मंगेशकर के दोस्त भी थे। लेकिन ये मोहब्बत मुक्कमल नहीं पो पाई। कहा जाता है कि राज ने अपने माता-पिता से वादा किया था कि वो किसी भी आम घर की लड़की को उनके घराने की बहू नहीं बनाएंगे। राज ने यह वादा मरते दम तक निभाया।

जहां एक तरफ लता जी ने शादी नहीं की वहीं राज ने अपने मां-बाप से किया हुआ वादा तो पूरा किया कि वह किसी और लड़की को इस घराने की बहू नहीं बनाएंगे लेकिन उन्होंने जीवन भर किसी से भी शादी नहीं की.लता और राज की उम्र में 6 साल का अंतर था. रात को क्रिकेट का बेहद शौक था जिसके चलते उन्होंने कई सालों तक बीसीसीआई में क्रिकेट खेला है.

लता मंगेशकर जी को शुरू की देवी कहां जाता है उनकी आवाज में जो सरस्वती बैठी है, वह मिठास आज तक किसी की आवाज में ना मिली उन्होंने 36 भारतीय भाषाओं में गाने रिकॉर्ड कराए हैं। लता मंगेशकर ने केवल हिंदी भाषा में 1,000 से ज्यादा गीतों को अपनी आवाज दी है। उन्हें साल 1989 में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। साल 2001 में लता मंगेशकर भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ दिया गया था।

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