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देश में इस पेड़ को दी जाती है VVIP सुविधा ,हर साल खर्च होते है 15 लाख रुपए ,24 घंटे पुलिस रहती है तैनात

आपने कई बार सुना होगा कि वीआईपी सुरक्षा बहुत बड़े और ऐसे लोगों को दी जाती है जिनकी जान को खतरा होता है, ऐसे में वीआईपी सुरक्षा का काफी महत्व होता है अगर हम आपसे यह कहे कि के नेता अभिनेता और बड़े पदों और पर बैठे लोगों के अलावा यह सुरक्षा एक पेड़ को भी दी जा रही है, यह बात सुनने में थोड़ी आश्चर्यचकित करने वाली है परंतु यह सब सच है कि वीआईपी सुरक्षा एक पेड़ को दी जा रही है जिसकी सुरक्षा में कम से कम तो जवान 24 घंटे तैनात रहते हैं और अगर इस पेड़ की एक पत्ती भी झड़ जाती है तो तुरंत अधिकारी पहुंच जाते हैं, इतना ही नहीं इस पेड़ के रखरखाव के लिए 15 दिन में एक बार ऐसा मेडिकल चैकअप होता है.

इसके अलावा इस पेड़ के रखरखाव में साल भर में15 लाख रुपए का खर्च आता है,तो चलिए आपको बताते हैं आपसे इस पेड़ का इतना रखरखाव क्यों किया जाता है, यें पेड़ मध्य प्रदेश के रायसेन सलामतपुर में है, इस पेड़ को 21 सितंबर, 2012 को श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे ने बोधि वृक्ष को रोपा था. रायसेन जिले में सांची एक पर्यटन स्थल है. यहां सालों पहले बौद्ध यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई. इसी यूनिवर्सिटी की पहाड़ी पर यह बोधि वृक्ष लगाया गया है. उस समय श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद थे. इस पेड़ की सुरक्षा पर अब तक सरकार लाखों रुपये खर्च कर चुकी है.

इस पेड़ के सुरक्षा के लिए 15 फीट लंबी जालियां लगाई गई हैं,ताकि कोई पेड़ को नुक्सान ना पंहुचा सके,साथ ही सांची नगर परिषद, पुलिस, राजस्व और उद्यानिकी विभाग लगातार इस पर नजर रखते हैं. हर 15 दिन में इसकी मेडिकल जांच कर खाद और पानी की व्यवस्था की जाती है. स्पीड को भी देखना चाहता है तो भोपाल से सांची जाना होगा यें करीब 50 किमी की दूरी पर स्थित है. हवाई मार्ग से सांची पहुंचने के लिए के लिए कोई सुविधा नहीं है.


भोपाल में राजाभोज हवाई अड्डा सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है. आखिर इस पेड़ की क्यों देख रखी जाती है? यें एक बोधि वृक्ष है. इसे श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने 21 सितंबर 2012 को रोपा था. इसकी सुरक्षा इसलिए की जाती है क्योंकि बौद्ध धर्म में इसका विशेष महत्व है. कहा जाता है कि भगवान बुद्ध को इसी पेड़ के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था. यें भी कहा जाता है की सम्राट अशोक भी इसी पेड़ के सहारे शांति की खोज में गए थे.

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